GM/ER के कार्यकलाप पर विवाद: मुर्शिदाबाद ट्रेन हादसे की पृष्ठभूमि में एडवांस तीज उत्सव का आयोजन!

प्रशासनिक कामकाज से ध्यान भटकाने और व्यवस्था में अनुचित प्रथाओं को बढ़ावा देकर रेलवे की साख और छवि को बट्टा लगा रही हैं महिला कल्याण संगठन की गतिविधियां

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए एक दर्दनाक ट्रेन हादसे के तुरंत बाद पूर्व रेलवे में बड़े पैमाने पर आयोजित किए गए उत्सवों को लेकर शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अंदरूनी असंतोष और जन-आक्रोश बढ़ता जा रहा है। 31 जुलाई 2026 को #GMER के सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले, उनके और उनकी श्रीमती जी के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारों के दुरुपयोग, सरकारी संसाधनों के अनुचित उपयोग और पद की मर्यादा के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

यह पूरा विवाद 17 जुलाई 2026 को पूर्व रेलवे के हावड़ा मंडल के अधीन अजीमगंज-कटवा रेल खंड पर हुई एक बड़ी दुर्घटना के बाद उत्पन्न हुआ है। गोविंदपुर के पास समपार फाटक (लेवल क्रॉसिंग गेट सं. 24A/2) पर एक यात्री ट्रेन ने स्कूली बच्चों को ले जा रही एक एसयूवी पूल कार और एक साइकिल सवार को टक्कर मार दी थी। इस दर्दनाक हादसे में चार मासूम स्कूली बच्चों समेत पांच लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। आधिकारिक जांच में समपार फाटक के गेटमैन की मानवीय भूल पाई गई, जिसने आ रही ट्रेन की अनदेखी कर जल्दबाजी में गेट खोल दिया था। इसके बाद गेटमैन को गिरफ्तार कर लिया गया और सीनियर सेक्शन इंजीनियर (#SSE/P-Way) को तुरंत निलंबित कर दिया गया।

इस भयानक हादसे की उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवारों में पसरे शोक के बीच, जीएम और उनकी श्रीमती जी के आचरण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, हादसे के मात्र चार दिन बाद, 21 जुलाई को पूर्व रेलवे महिला कल्याण संगठन (#ERWWO) के बैनर तले एक भव्य तीज उत्सव का आयोजन किया गया। रेलवे के अंदरूनी सूत्रों का आरोप है कि जीएम की श्रीमती जी द्वारा प्रधान विभाग प्रमुखों (#PHODs) की पत्नियों पर दबाव डालकर इस कार्यक्रम का आयोजन निर्धारित त्यौहार से लगभग एक महीना पहले ही करवा लिया गया, ताकि जीएम के सेवानिवृत्त होने से पहले यह उत्सव संपन्न हो सके और इसका लाभ उन्हें मिल सके।

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इससे पहले 3 जुलाई को भी जीएम की “मैडम” का जन्मदिन मनाने के लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें रेलवे के धन और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल के आरोप लगे हैं। इसके अलावा, विभिन्न मंडलों और विभागों में शीर्ष नेतृत्व के रूखे व्यवहार के बावजूद उन पर विदाई समारोह आयोजित करने का दबाव बनाने की बात भी सामने आ रही है। प्रशासनिक गलियारों में बिना पुष्टि के यह चर्चाएं भी जोरों पर हैं कि इन आयोजनों के नाम पर कीमती उपहार लिए गए और कुछ चुनिंदा अधिकारियों के माध्यम से अनुचित लाभ प्राप्त किए गए।

पूर्व रेलवे के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि महिला कल्याण संगठन के नाम पर इस प्रकार की गतिविधियां रेलवे की साख और छवि को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। सुरक्षा संकट के समय प्रशासनिक ध्यान भटकाने और व्यवस्था में अनुचित प्रथाओं को बढ़ावा देने को लेकर रेलवे के भीतर अभूतपूर्व चिंता व्यक्त की जा रही है।