IRWM-2026: नदियों के किनारे रेल अवसंरचना की सुरक्षा पर विशेष जोर

भारतीय रेल वर्क्स मैनुअल-2026 में नदियों और महत्वपूर्ण जलमार्गों के आसपास रेल अवसंरचना की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इसमें नदी-प्रशिक्षण कार्य, सुरक्षा एवं संरक्षण कार्य, उच्चतम बाढ़ स्तर तथा नदी-तल के कटाव की गहराई का आकलन रेल परियोजनाओं की अभियांत्रिकी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

आईआरडब्ल्यूएम के अनुसार, किसी भी पुल परियोजना में सबसे पहले स्थल पर नदी के प्रवाह की दिशा का सत्यापन कर उसे आरेख में दर्शाना आवश्यक है। साथ ही यह भी निर्धारित करना होगा कि नदी-प्रशिक्षण एवं संरक्षण कार्यों की आवश्यकता है या नहीं। आवश्यकता होने पर ऐसे कार्य भारतीय रेल पुल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार किए जाने हैं।

बड़े पुलों के मामले में नदी अथवा नाले के ऊपरी प्रवाह क्षेत्र और निचले प्रवाह क्षेत्र का सर्वेक्षण, नदी के अनुप्रस्थ काट तथा उच्चतम बाढ़ स्तर को अभिकल्पना में शामिल करने का प्रावधान है। यदि किसी महत्वपूर्ण नदी का पर्याप्त सर्वेक्षण उपलब्ध नहीं है, तो ऊपरी प्रवाह की ओर 8 किलोमीटर तथा निचले प्रवाह की ओर 2 किलोमीटर तक सर्वेक्षण किए जाने का प्रावधान रखा गया है।

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इसके अतिरिक्त, पुल की अभिकल्पना में जलमार्ग की क्षमता, अभिकल्पित जल-प्रवाह तथा अधिकतम कटाव की गहराई को ध्यान में रखना आवश्यक है, ताकि बाढ़, तेज जलप्रवाह और नदी द्वारा किए जाने वाले कटाव से पुल एवं अन्य रेल संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

रेल भूमि की सुरक्षा पर भी स्पष्ट प्रावधान

आईआरडब्ल्यूएम-2026 में नदी के किनारे स्थित रेल भूमि की सुरक्षा के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। दोनों किनारों पर ऊंचे सीमा-स्तंभ स्थापित करने तथा निर्धारित सीमा के भीतर आने वाली रेल भूमि को किसी भी स्थिति में छोड़ने या समर्पित न करने का प्रावधान है।

बाढ़ संभावित क्षेत्रों में पम्पिंग संयंत्रों की स्थापना के लिए नदी की ओर उचित तटबंध, पर्याप्त जल-निकासी व्यवस्था तथा उच्चतम बाढ़ स्तर से 1 से 2 मीटर का सुरक्षा अंतर रखने का प्रावधान किया गया है।

संदेश स्पष्ट है— रेल परियोजनाओं में नदी के प्राकृतिक प्रवाह, बाढ़, तट एवं नदी-तल के कटाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। परियोजना की अभिकल्पना के प्रारंभिक चरण से ही नदी-प्रशिक्षण, तट-संरक्षण और अन्य सुरक्षा उपायों की आवश्यकता का आकलन करना तथा आवश्यक होने पर उनका समुचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करना रेल अभियांत्रिकी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

रेलवे निर्माण नियमावली 2026 में अभियंत्रण अधिकारियों की जवाबदेही तय, लेकिन वरिष्ठ स्तर पर भी है प्रश्न

भारतीय रेल द्वारा जारी भारतीय रेल निर्माण कार्य नियमावली 2026 में अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारियों, निरीक्षण, निर्माण, अनुरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा व्यय की निगरानी को विस्तार से निर्धारित किया गया है। वर्ष 2000 के बाद इस नियमावली में व्यापक संशोधन किया गया है।

नियमावली के अनुसार मंडल अभियंता, वरिष्ठ मंडल अभियंता तथा उप मुख्य अभियंता अपने नियंत्रणाधीन भवनों एवं संरचनाओं के निरीक्षण, अनुरक्षण तथा निर्माण के लिए सामान्य रूप से उत्तरदायी हैं। सहायक मंडल अभियंता अथवा अधीनस्थ सुपरवाइजरों से प्राप्त मामलों की जांच, समीक्षा तथा आवश्यक कार्रवाई करना भी उनके दायित्व में शामिल है।

वहीं सहायक मंडल अभियंता को अनुरक्षण, कार्यों के निष्पादन, शुद्धता, गुणवत्ता, प्रगति तथा व्यय के संबंध में समग्र उत्तरदायित्व दिया गया है। उसके दायित्वों में निरीक्षण, योजनाओं एवं प्राक्कलनों की निगरानी, कार्यों का निष्पादन, माप, भंडार का सत्यापन, भूमि संबंधी प्रबंधन तथा अभिलेखों की निगरानी भी शामिल है।

निरीक्षण है जवाबदेही का महत्वपूर्ण आधार

नियमावली में निरीक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। सहायक मंडल अभियंता को वार्षिक निरीक्षण योजना तैयार करने, निर्धारित निरीक्षण करने तथा पूर्व में दर्ज निरीक्षण टिप्पणियों की अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भवनों, जलापूर्ति व्यवस्था, जल निकासी व्यवस्था, मल-जल निकासी व्यवस्था तथा वर्षाजल संचयन संरचनाओं की स्थिति पर भी नियमित निगरानी अपेक्षित है।

ठेके के कार्यों में स्पष्ट व्यक्तिगत जिम्मेदारी

वरिष्ठ अनुभाग अभियंता तथा कनिष्ठ अभियंता (कार्य) को अपने अधिकार क्षेत्र के कार्यों की सही आधार-स्थापना तथा स्वीकृत चित्रों और विनिर्देशों के अनुरूप कार्य निष्पादन के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाया गया है।

गुणवत्ता एवं मात्रा की नियमित जांच, सामग्री का लेखा-जोखा, कार्य की प्रगति की सूचना तथा ठेके के कार्यों की उचित माप भी उनके निर्धारित दायित्वों में शामिल हैं।

हरित क्षेत्र के लिए भी स्पष्ट जिम्मेदारी

नियमावली में भू-दृश्य निर्माण, उद्यानिकी, वृक्षारोपण, पौधशाला, नवरोपित एवं युवा वृक्षों की देखभाल, उद्यान तथा वनीकरण संबंधी कार्यों को भी अभियंत्रण संबंधी जिम्मेदारियों में शामिल किया गया है।

वृक्षों के सर्वेक्षण तथा परिपक्व वृक्षों से संबंधित प्रावधान भी इसमें दिए गए हैं।

वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर की भूमिका

यह कहना उचित नहीं होगा कि वरिष्ठ प्रशासनिक समूह स्तर के अधिकारियों को कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है। नियमावली में अनेक महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ स्तर की स्वीकृति एवं निर्णय की स्पष्ट व्यवस्था है।

उदाहरण के लिए, सामान्य व्यवस्था चित्र की स्वीकृति तथा महत्वपूर्ण संरचनाओं में परिवर्तन या अतिरिक्त कार्यों जैसे मामलों में संबंधित वरिष्ठ अधिकारी की स्वीकृति निर्धारित की गई है।

फिर भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आता है—

जब दैनिक कार्य निष्पादन, निरीक्षण, माप, गुणवत्ता नियंत्रण और अनुरक्षण की विस्तृत परिचालन जिम्मेदारियां मुख्यतः सहायक मंडल अभियंता तथा वरिष्ठ अनुभाग अभियंता या कनिष्ठ अभियंता स्तर पर स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं, तो वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर स्वीकृति, समीक्षा, पर्यवेक्षण और उच्चस्तरीय निर्णय की जवाबदेही किस प्रकार निर्धारित होगी?

यही प्रश्न भारतीय रेल निर्माण कार्य नियमावली 2026 के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण जवाबदेही का विषय बनता है।

काम नीचे के स्तर पर, निर्णय ऊपर के स्तर पर—जवाबदेही किसकी?

काम का प्रत्यक्ष निष्पादन नीचे के स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाता है। निरीक्षण, माप, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रगति की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हीं स्तरों पर स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। दूसरी ओर, महत्वपूर्ण स्वीकृतियां और निर्णय वरिष्ठ स्तर पर लिए जाते हैं।

ऐसी स्थिति में यदि किसी पुराने अथवा पहले ही निष्पादित कार्य पर वर्षों बाद आपत्ति उठती है, तो वास्तविक जिम्मेदारी किस आधार पर निर्धारित की जाएगी?

विशेष रूप से तब, जब किसी कार्य का निष्पादन उस समय के सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति, निरीक्षण, माप और प्रमाणन के आधार पर पूरा हो चुका हो, तो बाद में उठाई गई आपत्ति की स्थिति में केवल कार्य निष्पादन स्तर के अधिकारियों की जवाबदेही तय करना क्या नियमावली में निर्धारित संपूर्ण उत्तरदायित्व श्रृंखला के अनुरूप होगा?

भारतीय रेल निर्माण कार्य नियमावली 2026 केवल कार्य करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं करती, बल्कि यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी सामने रखती है कि स्वीकृति, पर्यवेक्षण, निरीक्षण, निष्पादन और प्रमाणन की पूरी श्रृंखला में जवाबदेही समान रूप से कैसे निर्धारित की जाएगी।