वंदे भारत के शेड और कोच केयर सेंटर में EPC मॉडल: हल्का डिजाइन, ठेकेदारों को भारी फायदा?
वंदे भारत ट्रेनों के लिए बनाए जा रहे शेड और कोच केयर सेंटर के ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण) ठेकों को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। आरोप है कि निविदा के समय स्वीकृत/निर्धारित मूल डिजाइन और तकनीकी मानकों की तुलना में निर्माण के दौरान काफी हल्का डिजाइन स्वीकृत कराया जा रहा है, जिससे निर्माण लागत में बड़ी कमी आ सकती है और ठेकेदार कंपनियों के मुनाफे में असामान्य वृद्धि की आशंका पैदा होती है।
मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि ईपीसी व्यवस्था में ठेकेदार को डिजाइन, सामग्री की खरीद और निर्माण—तीनों की जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में यदि निविदा की मूल डिजाइन की तुलना में संरचनात्मक स्टील, सेक्शन, मोटाई, भार क्षमता या अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी विनिर्देशों में कमी की अनुमति दी जाती है, तो प्रश्न उठता है कि इसका लाभ किसे मिल रहा है और रेलवे के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि क्या निविदा के समय जिस डिजाइन और तकनीकी आवश्यकता के आधार पर प्रतिस्पर्धी दरें प्राप्त की गईं, बाद में उसी कार्य के लिए कम लागत वाला डिजाइन स्वीकार कर ठेकेदार को अतिरिक्त लाभ दिया जा रहा है?
यदि डिजाइन में बदलाव वास्तव में तकनीकी रूप से उचित है, तो रेलवे को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि—
- मूल और संशोधित डिजाइन में क्या-क्या बदलाव किए गए?
- स्टील की मात्रा और संरचनात्मक भार क्षमता में कितना अंतर आया?
- डिजाइन परिवर्तन से परियोजना लागत में कितनी बचत हुई?
- इस बचत का लाभ रेलवे को मिला या ठेकेदार के खाते में गया?
- डिजाइन परिवर्तन को किस स्तर पर स्वीकृति दी गई और उसका स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण हुआ या नहीं?
वंदे भारत जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में केवल निर्माण पूरा होने का ही प्रश्न नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि रेलवे को निविदा में निर्धारित गुणवत्ता, मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता के अनुरूप ही परिसंपत्ति मिले।
अब मांग उठ रही है कि ऐसे सभी ईपीसी शेड और कोच केयर सेंटरों में मूल निविदा डिजाइन बनाम अंतिम स्वीकृत डिजाइन, स्टील की मात्रा, लागत और डिजाइन परिवर्तन का तुलनात्मक ऑडिट कराया जाए। यदि जांच में पाया जाता है कि बिना पर्याप्त तकनीकी कारण के डिजाइन को हल्का कर ठेकेदार को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया, तो जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।

