‘काहिल सिस्टम’: NCR में भुगतान और अनुबंध समापन में देरी से ठेकेदार और MSMEs वेंटिलेटर पर; तत्काल हस्तक्षेप की मांग

रेलसमाचार ब्यूरो, प्रयागराज: उत्तर मध्य रेलवे (#NCR) के विद्युत एवं सिविल विभागों की सुस्त कार्यप्रणाली और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्राउंड पर काम करने वाले ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और MSME इकाइयों का दम घुट रहा है। समय पर काम पूरा करने के बावजूद, भुगतानों में महीनों की देरी और अनुबंधों (Contract Closure) को लटकाए रखने के ‘काहिल रवैये’ ने इन उद्यमों को गंभीर वित्तीय संकट में धकेल दिया है।

काम समय पर, पर भुगतान क्यों अधर में?

ठेकेदारों का स्पष्ट कहना है कि रेलवे परियोजनाओं के तहत कार्य पूर्ण करने, सामग्री की आपूर्ति करने और सभी आवश्यक दस्तावेज सौंपने के बाद भी अंतिम बिलों को दबाकर बैठना सिस्टम की आदत बन चुका है।

  • अतिरिक्त वित्तीय बोझ: इस प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा ठेकेदारों को भारी बैंक ऋण, ऊंचे ब्याज और कार्यशील पूंजी (Working Capital) के संकट के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
  • MSMEs पर प्रहार: सरकार एक तरफ MSMEs को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की कछुआ चाल इन छोटी इकाइयों का अस्तित्व ही खतरे में डाल रही है।

फाइलों में कैद सुरक्षा राशि और बैंक गारंटी

परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी अंतिम बिलों का निस्तारण, अनुबंधों का समापन, सुरक्षा जमा (Security Deposit) की वापसी और बैंक गारंटी को मुक्त करने जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं महीनों से फाइलों में धूल फाँक रही हैं। इस अनावश्यक देरी के कारण ठेकेदारों की पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती है, जिससे वे नए टेंडरों और देश के अन्य विकास कार्यों में भाग लेने से वंचित हो जाते हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर सिस्टम की जवाबदेही और कार्यकुशलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।

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पारदर्शिता का अभाव और प्रशासनिक पुनर्गठन की जरूरत

विभिन्न स्तरों पर मापन (Measurement) और बिल प्रसंस्करण की धीमी गति को लेकर ठेकेदारों में गहरा असंतोष है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की भारी कमी महसूस की जा रही है।

नोट: हालांकि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर किसी भी शिकायत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकती है और न ही किसी अधिकारी पर सीधे आरोप मढ़ा जा रहा है, लेकिन जनहित और संस्थागत शुचिता के लिए इस ढ़र्रे को बदलना अनिवार्य है।

ठेकेदारों का यह भी मानना है कि जिन महत्वपूर्ण तकनीकी और अंतिम बिल संबंधी कार्यों को लंबे समय से जूनियर इंजीनियर (JE) स्तर पर लटका कर रखा गया है, वहां तुरंत पर्याप्त संख्या में वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (SSE) स्तर के सक्षम अधिकारियों की तैनाती होनी चाहिए ताकि निर्णय प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और दक्षता आ सके।

ठेकेदारों एवं आपूर्तिकर्ताओं की प्रमुख मांगें:

  • विशेष अभियान: विद्युत एवं सिविल विभागों में सभी लंबित भुगतानों का निस्तारण करने के लिए एक समयबद्ध विशेष अभियान चलाया जाए।
  • जवाबदेही तय हो: कार्य पूर्ण होने के बावजूद भुगतान में हो रहे असामान्य विलंब की उच्चस्तरीय जांच हो और सुस्ती बरतने वाले बाबुओं और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
  • समयबद्ध अनुबंध समापन: लंबित अनुबंधों (Contract Closure) को बेवजह लटकाने के बजाय उनका त्वरित समापन सुनिश्चित किया जाए।
  • पूंजी की तत्काल रिहाई: अंतिम बिलों, सुरक्षा जमा और बैंक गारंटी की वापसी से संबंधित मामलों को प्राथमिकता पर निपटाया जाए।
    प्रशासनिक सुधार: महत्वपूर्ण संविदात्मक कार्यों के लिए पर्याप्त संख्या में SSE स्तर के अधिकारियों की तैनाती की जाए।
  • शिकायत निवारण तंत्र: ठेकेदारों और MSMEs की समस्याओं को सुनने और तय समय में सुलझाने के लिए एक प्रभावी और पारदर्शी ‘ग्रीवांस रेड्रेसल सिस्टम’ बने।
    श्वेत पत्र/पारदर्शिता: #PMGatiShakti एवं अन्य प्रमुख विकास परियोजनाओं के भुगतानों की वर्तमान स्थिति और प्रगति रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।

रेल प्रशासन और सरकार से अपेक्षा

रेल प्रशासन, रेलवे बोर्ड और भारत सरकार से पुरजोर अपील है कि वे इस गंभीर और दम घोटने वाली स्थिति का तत्काल संज्ञान लें। राष्ट्र निर्माण में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करने वाले #ठेकेदारों और #MSME इकाइयों के वैध भुगतानों को इस काहिल व्यवस्था के चंगुल से मुक्त कराएं।

विशेष: यह खबर किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही, समयबद्ध भुगतान और आवश्यक प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित करने की मांग के उद्देश्य से जनहित में प्रकाशित की गई है।