केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 6 राज्यों के 19 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

भारतीय रेल के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 901 किमी की वृद्धि होगी

इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹23,437 करोड़ है और ये 2030-31 तक पूरी हो जाएंगी

दिल्ली (पीआईबी): प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार, 5 अप्रैल 2026 को रेल मंत्रालय की लगभग ₹23,437 करोड़ की कुल लागत वाली तीन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं में बुढ़वल-सीतापुर तीसरी एवं चौथी लाइन, नागदा-मथुरा तीसरी एवं चौथी लाइन तथा गुंतकल-वाडी तीसरी एवं चौथी लाइन का निर्माण सम्मिलित है।

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इन परियोजनाओं के चलते बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। ये बहु-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को सुव्यवस्थित करने और भीड़भाड़ को कम करने की तैयारियाँ हैं। ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नये भारत के विजन के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को ‘आत्मनिर्भर‘ बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएँ प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से बहु-मार्गीय संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना राज्यों के 19 जिलों को कवर करने वाली तीन परियोजनाओं से भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 901 किमी. की वृद्धि होगी। प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,161 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 83 लाख है।

प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनमें नैमिषारण्य (नीमसर), महाकालेश्वर, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम (श्री राघवेंद्र स्वामी मठ), श्री नेट्टिकंती अंजनेय स्वामी वारी मंदिर (कासापुरम), श्यामनाथ मंदिर आदि सम्मिलित हैं।

प्रस्तावित परियोजनाएँ कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, तेल, लोहा और इस्पात, लौह अयस्क, कंटेनर, उर्वरक आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 60 मिलियन टन माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी। रेलवे पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की रसद लागत को कम करने में सहायक होगा, साथ ही तेल आयात (37 करोड़ लीटर) को कम करेगा और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन (185 करोड़ किग्रा.) को घटाएगा, जो 7 करोड़ पौधारोपण के बराबर है।