विशेष रिपोर्ट: आरडीएसओ में नियम विरुद्ध पोस्टिंग से गिरता तकनीकी स्तर और रोटेशन नीति की अनदेखी

भ्रष्टाचार और पसंदीदा पोस्टिंग के चलते आरडीएसओ के तकनीकी प्रदर्शन पर गंभीर असर

यदि रोटेशन नीति को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो देश की यह प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था मात्र वेंडरों से उगाही और दोषपूर्ण सामग्रियों को प्रमाणित करने का एक साधन मात्र बनकर रह जाएगी, जिसका सीधा खामियाजा भारतीय रेल के करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा को भुगतना पड़ेगा!

भारतीय रेल के लिए नए अनुसंधान, डिजाइन और सुरक्षा मानकों को तय करने वाली देश की शीर्ष संस्था, अनुसंधान अभिकल्प और मानक संगठन (#RDSO) वर्तमान में गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी संकट से गुजर रहा है। प्राप्त दस्तावेजों और आंतरिक सूचनाओं के अनुसार, संगठन के भीतर दागी और विवादित पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों की लगातार हो रही पदस्थापनाओं के कारण इसकी कार्यप्रणाली और प्रतिष्ठा पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक द्वारा रेलवे बोर्ड को भेजी गई हालिया रिपोर्ट (जून 2026) इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आरडीएसओ द्वारा स्वीकृत वेंडरों द्वारा आपूर्ति की जा रही सुरक्षा सामग्रियों (#Safety Stores Items) में बड़े पैमाने पर विफलताएं (#Material Failures) आ रही हैं। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल एंड टेलीकॉम (S&T) और सिविल इंजीनियरिंग विभागों में हजारों की संख्या में इलास्टोमेरिक पैड, प्राइमरी स्प्रिंग्स, और ट्रैक्शन कनवर्टर्स जैसे महत्वपूर्ण घटक फेल हो रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी जांच करने वाले प्रमुख निदेशालयों में ऐसे अधिकारियों को बैठाया गया है जो कथित तौर पर वेंडर सांठगांठ और प्रशासनिक अनियमितताओं में लिप्त हैं। 

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रेलवे बोर्ड की स्थानांतरण नीति का खुला उल्लंघन और ‘एग्रीड लिस्ट’ की अनदेखी

रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी की गई व्यापक स्थानांतरण नीति (Comprehensive Transfer Policy), विशेषकर अप्रैल 2023 और अक्टूबर 2018 के सर्कुलर के तहत आरडीएसओ और रेलवे बोर्ड जैसे संवेदनशील पदों पर कार्यकाल और रोटेशन के कड़े नियम लागू किए गए हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को एक ही सीट या संवेदनशील निदेशालय में लंबे समय तक रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि वेंडरों के साथ किसी भी प्रकार का अपवित्र गठजोड़ न बन सके।

इसके विपरीत, आरडीएसओ के ट्रैक, सिविल, और वैगन निदेशालयों में अधिकारियों को रोटेशन नीति के तहत अन्य दूरस्थ रेलवे जोनों में स्थानांतरित करने के बजाय, लगातार लखनऊ में ही पसंदीदा पोस्टिंग दी जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, कई अधिकारी सतर्कता विभाग की ‘एग्रीड लिस्ट’ (#AgreedList/#SecretList) में शामिल होने, गंभीर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई (Major Penalty D&AR Cases/SF-5) का सामना करने के बावजूद आरडीएसओ के अत्यंत संवेदनशील पदों पर जमे हुए हैं। नीतिगत दिशानिर्देशों के अनुसार, ऐसे दागी अधिकारियों की पदस्थापना से पहले उचित स्क्रीनिंग की जानी चाहिए, लेकिन वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था में इन नियमों को ताक पर रख दिया गया है।

निदेशालय-वार प्रभावित प्रदर्शन और प्रशासनिक अनियमितताओं का विवरण

  • ट्रैक निदेशालय (#Track Directorate): इस अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा विंग में कार्यकारी निदेशक (ED/Track) और निदेशक (Director/Track-2) जैसे शीर्ष पदों पर ऐसे अधिकारियों की तैनाती की गई है, जिन पर मेजर पेनल्टी चार्जशीट (SF-5) लंबित है और जो पूर्व में सतर्कता मामलों में घिरे रहे हैं। इसके कारण पटरियों और सुरक्षा मानकों की गुणवत्ता से समझौता होने और वेंडर लॉबी को बढ़ावा मिलने की आशंकाएं प्रबल हो गई हैं।
  • पुल और संरचना निदेशालय (B&S Directorate): जोनल रेलों से रोटेशन के स्थापित नियमों को दरकिनार कर, निदेशक (#Director/B&S) के पद पर चहेते अधिकारियों को फेवर देते हुए नियुक्त किया गया है। इसका सीधा असर पुलों की सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े तकनीकी अप्रूवल पर पड़ रहा है।
  • प्रशासनिक नेतृत्व (#ADG Level): संगठन के शीर्ष प्रशासनिक स्तर (ADG) पर भी ‘एग्रीड लिस्ट’ में रह चुके और विवादित पृष्ठभूमि वाले अधिकारियों की मौजूदगी ने आंतरिक सतर्कता और चयन प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
  • जियो-टेक्निकल और ट्रैक-8 अनुभाग (Geo-Tech & Track-8): संयुक्त निदेशक (JD/Geo Tech) और संयुक्त निदेशक (JD/Track-8) जैसे तकनीकी पदों पर उन अधिकारियों को समायोजित किया गया है, जिन्हें पूर्व में फिरोजपुर और अन्य डिवीजनों में सतर्कता जांच के दौरान दंडित किया जा चुका था।
  • रोलिंग स्टॉक और सिविल अनुभाग (Rolling Stock & Civil): प्रधान कार्यकारी निदेशक (PED/Rolling Stock) और संयुक्त निदेशक (JD/Civil) के स्तर पर भी लंबे समय तक एक ही भौगोलिक क्षेत्र (लखनऊ) में बने रहने और निरीक्षणों के दौरान भ्रष्टाचार को कथित तौर पर बढ़ावा देने के मामले सामने आए हैं, जिससे वैगन और रोलिंग स्टॉक घटकों की गुणवत्ता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 

मेधा और निष्पक्षता की पहचान खोने की कगार पर शीर्ष शोध संगठन

एक समय था जब आरडीएसओ में पदस्थापना के लिए केवल अत्यंत उत्कृष्ट, मेधावी और बेदाग छवि वाले अधिकारियों का ही कड़े चयन मानकों के माध्यम से चुनाव किया जाता था। उच्च स्तर (#SAG और ऊपर) के अधिकारियों की पोस्टिंग सीधे रेलमंत्री की मंजूरी से होती थी। लेकिन वर्तमान परिदृश्य को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि रेलवे बोर्ड के नीति-निर्माताओं द्वारा रेलमंत्री और सक्षम अधिकारियों के समक्ष पूरी और सही जानकारी नहीं रखी जा रही है, जिसके कारण दागी पृष्ठभूमि के अधिकारियों की बैक-टू-बैक नियुक्तियां संभव हो पा रही हैं।

यदि समय रहते इन विवादित नियुक्तियों को निरस्त नहीं किया गया और पारदर्शी मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (#HRMS Portal) के माध्यम से रोटेशन नीति को सख्ती से लागू नहीं किया गया, तो देश की यह प्रतिष्ठित तकनीकी संस्था मात्र वेंडरों से उगाही और दोषपूर्ण सामग्रियों को प्रमाणित करने का एक साधन मात्र बनकर रह जाएगी, जिसका सीधा खामियाजा भारतीय रेल के करोड़ों यात्रियों की सुरक्षा को भुगतना पड़ेगा। अब पूरी रेल बिरादरी की दृष्टि रेलवे बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व (मेंबर इंफ्रास्ट्रक्चर) पर टिकी हुई है कि क्या वे प्रशासनिक शुचिता का परिचय देते हुए इन दागी अधिकारियों का आरडीएसओ से बाहर तत्काल स्थानांतरण करेंगे!