उ.म.रे.: लंबित बिलों और निविदाओं का निपटारा न होने तथा लंबे समय से सुपरवाइजरों की तैनाती से परेशान ठेकेदार
प्रयागराज ब्यूरो: उत्तर मध्य रेलवे में इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के कार्य संचालन से संबंधित कुछ प्रशासनिक समस्याएँ संज्ञान में आई हैं, जिनसे फील्ड में कार्यों के सुचारु संपादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यहाँ ठेकेदारों के लंबित बिलों, और 2019 से लंबित निविदाओं का निपटारा न होने तथा लंबे समय से एक ही जगह कुछ सुपरवाइजरों (एसएसई) की तैनाती से न केवल ठेकेदारों का उत्पीड़न हो रहा है, बल्कि #रोटेशन के अभाव में सुपरवाइजरों की मनमानी भी चरम पर है।
यह देखा गया है कि मार्च 2026 के दौरान #SrDEE(G) कार्यालय प्रयागराज द्वारा ठेकेदारों के बिलों का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे ठेकेदारों को आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और उनके कार्मिकों का भुगतान भी नहीं हो पा रहा है तथा विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
यह भी संज्ञान में आया है कि वर्ष 2019 में जारी कुछ निविदाएँ अभी तक लंबित/ओपन दर्शाई जा रही हैं। इतनी लंबी अवधि तक निविदाओं का लंबित रहना प्रक्रियात्मक विलंब को दर्शाता है, जिसकी समीक्षा कर शीघ्र निस्तारण किया जाना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त यह भी देखा गया है कि कुछ एसएसई अपनी नियुक्ति के प्रारंभ से ही अपने गृह जनपद या उसके आसपास के क्षेत्रों में ही तैनात हैं तथा उनका अंतर-जिला स्थानांतरण नहीं किया गया है। उदाहरणार्थ—
- राहुल यादव – SSE, इटावा
- हरिपाल सिंह – SSE, टुंडला
- आर. के. पांडेय – SSE, PS Line
- रविन्द्र सिंह – SSE PS, प्रयागराज
- देवेंद्र सिंह – SSE, अलीगढ़
- सुनील श्रीवास्तव – SSE, सूबेदारगंज, इत्यादि
किसी अधिकारी या सुपरवाइजर का लंबे समय तक अपने गृह जनपद में अथवा एक ही स्थान पर तैनात रहना प्रशासनिक पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को प्रभावित करता है। सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था और नियम के अनुसार समय-समय पर आवधिक स्थानांतरण एवं रोटेशन किया जाना अत्यंत आवश्यक होता है।
इस संदर्भ में रेल प्रशासन से ठेकेदारों का विशेष आग्रह है कि उपरोक्त विषयों की समीक्षा करते हुए—
- ठेकेदारों के लंबित बिलों का शीघ्र भुगतान कराया जाए,
- वर्ष 2019 से लंबित निविदाओं की समीक्षा कर उनका शीघ्र निस्तारण किया जाए, तथा
- उपरोक्त एसएसई सहित ऐसे सभी अधिकारियों एवं सुपरवाइजरों का उनके गृह जनपद से भिन्न जिलों में स्थानांतरण किया जाए, जो लंबे समय से एक ही स्थान पर नियुक्त हैं, और इसके लिए पूर्व मध्य रेलवे का संदर्भ लिया जाए।
ठेकेदारों का कहना है कि इससे न केवल उत्तर मध्य रेलवे के इलेक्ट्रिकल विभाग में पारदर्शिता, प्रशासनिक दक्षता तथा कार्यों के सुचारु संचालन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रेलवे की भी छवि सुधरेगी।
हालाँकि #RailSamachar द्वारा इन सारे तथ्यों से उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, वरिष्ठ उपमहाप्रबंधक, पीसीईई एवं डीआरएम/प्रयागराज को पहले ही अवगत कराया गया है। ताजा अपडेट यह है कि सीईई/जी/उ.म.रे द्वारा उपरोक्त विषयों पर कुछ संज्ञान लिया गया है, तथापि अब तक कुछ पुख्ता कार्यवाही नहीं हो पाई है।
निष्कर्ष यह है कि रोटेशन के अभाव में रेलवे का हर डिपो-हर विभाग एक सड़ांध मारता हुआ तालाब बन गया है, और रेल प्रशासन की इस लापरवाही पर अब स्वयं ठेकेदार ही प्रश्न उठाने लगे हैं, जिन्हें अपने इच्छित अधिकारियों और सुपरवाइजरों को एक ही जगह टिकाए रखने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।
इस परिप्रेक्ष्य में जानकारों का मानना है कि अब तो रेल प्रशासन को जूनियर अधिकारियों के चैंबर्स से एसी उखड़वाने और मामूली बातों पर उन्हें चार्जशीट सर्व करने जैसी अनावश्यक गतिविधियों के बजाय उनके रोटेशन पर विशेष रूप से गंभीर होना चाहिए!

