द.पू.म.रे.—प्लेटफार्म एप्रन निर्माण का औचित्य क्या है?

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि, विस्तृत परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो भारतीय रेल केवल इंजीनियर्स के लिए कमाई का एक जरिया मात्र है। जबकि ट्रैफिक एवं अन्य अधिकारियों की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतरने से पहले ही धराशाई कर दिया जाता है। होता वही है, और वैसा ही है, जैसा इंजीनियर चाहते हैं।

उनका कहना था कि रेलवे में ठेका लेने वाले ठेकेदार राजा बन गए हैं, जो अपनी मर्जी से अपनी शर्तों पर ही काम करते हैं, और इंजीनियर उनकी पैरवी करने में लगे रहते हैं।

उन्होंने बताया कि गोंदिया जंक्शन पर प्लेटफॉर्म एप्रन का निर्माण दोनों दिशाओं में किया जाना है। पहले अप और बाद में डाउन। अभी अप दिशा में ब्लॉक किया जाएगा, जिसके लिए भरी गर्मी और छुट्टियों के मौसम में लगभग तीन सप्ताह के लिए दर्जनों गाड़ियों को रद्द किया जा रहा है।

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उन्होंने आगे बताया कि फिर जब डाउन दिशा का काम होगा, तब फिर इसी तरह दर्जनों गाड़ियों को रद्द किया जाएगा। और तब तक बारिश का मौसम आ जाएगा। ऐसे में जो यात्री महीनों पहले आरक्षण कराए हैं, उनकी समस्या को लेकर रवैया बहुत गैरजिम्मेदारी वाला है।

उन्होंने कहा कि यदि इंडिगो द्वारा मनमानी किए जाने पर सेवा में कमी का दोषी मानते हुए तगड़ा जुर्माना लगाया जाता है, तो भारतीय रेल को भी उसी तर्ज पर दंडित किया जाना चाहिए, और इसका हर्जाना उन ठेकेदारों से वसूला जाना चाहिए, जो बिना पर्याप्त संसाधनों के ठेका ले लेते हैं और काम कभी समय पर समाप्त नहीं करते।

उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि यह भी एक तथ्य है कि आजतक पूरी भारतीय रेल में जहां भी प्लेटफार्म एप्रन बनाए गए, वहां कहीं भी निर्धारित अवधि तक कभी टिके नहीं, और इन पर खर्च किया गया करोड़ों रुपया मिट्टी में मिल गया या फिर इंजीनियर्स की जेबों में चला गया।

तथापि उन्होंने कहा कि जब एक ही स्टेशन पर एक जैसा काम दोनों छोर पर होना है, तो जब ठेकेदार दोनों काम एक साथ कर सके तब ब्लॉक किया जाए। इसकी भी समय बाध्यता होनी चाहिए। और इसके लिए रेलवे को एक मानक आरेख तय करना चाहिए।