भुसावल मंडल: इलेक्ट्रिकल जनरल विभाग में कर्मचारियों का शोषण

मध्य रेल, भुसावल मंडल के इलेक्ट्रिकल जनरल विभाग में स्टाफ की कमी बताकर उससे निर्धारित से अधिक नाइट ड्यूटी कराई जा रही है, जो नियम विरुद्ध तो है ही, साथ ही कई स्टाफ, #DRM, #SrDEE/G और #SSE ऑफिस में कार्यरत हैं, उसका भार भी फील्ड स्टाफ पर पड़ रहा है।

रेलवे बोर्ड के #RBE क्रमांक 67/2016, दि. 16.06.2016 में कर्मचारियों के लिए संशोधित ड्यूटी रोस्टर अनिवार्य किए गए हैं, ताकि उनके लिए आवश्यक रेस्ट सुनिश्चित किया जा सके। इन प्रमुख संशोधनों में प्रति सप्ताह न्यूनतम 40 घंटे का रेस्ट और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि कर्मचारी सप्ताह के सातों दिन काम न करें।

परंतु विडंबना यह है कि भुसावल मंडल के इलेक्ट्रिकल जनरल विभाग में आज की परिस्थिति इसके विपरीत है। रेल का हर डिपो कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है, लेकिन सुपरवाइजर उन्हीं कम कर्मचारियों के साथ रोस्टर चला रहे हैं जिसमें उनकी नाइट ड्यूटी तय सीमा के ऊपर हो रही है।

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इस वजह से उनके नाइट ड्यूटी भत्ते (#NDA) के भुगतान में परेशानी आती है, और इस तरह कर्मचारी हितों के साथ कुठाराघात हो रहा है।

यदि मैनपॉवर शॉर्ट है तो क्या सुपरवाइजर ने वेकेंसी हेतु रिक्वेस्ट इंडेंट प्रेषित की? क्या प्रशासन द्वारा उचित कदम उठाए गए? अधिकतर ऐसा पाया गया है कि कुछ कर्मचारी और सुपरवाइजर तो डीआरएम ऑफिस में कार्य कर रहे हैं, जबकि इनकी ड्यूटी अन्य डिपो में है।

जहां एक तरफ विद्युत मुख्यालय में आराम से बैठकर कुछ विद्युत अधिकारी घूसखोरी कर मौज कर रहे हैं, वहीं नीचे कर्मचारी काम के बोझ में पिस रहे हैं। कितनी अनियमितताएं और गिनाई जाएं रेल प्रशासन की? हालाँकि इनका कोई अंत नहीं, तथापि इन परिस्थितियों में कर्मचारियों के साथ न्याय कौन करेगा?