पूर्वोत्तर रेलवे में ₹235 करोड़ से अधिक के ‘बैलेंस वर्क’ टेंडर चर्चा में, मूल ठेकों सहित जीएसटी और बिड कैपेसिटी तक जाँच की माँग

गतांक से आगे—

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि खलीलाबाद–बहराइच नई रेल लाइन परियोजना के इन हिस्सों में पहले ठेके दिए जा चुके थे, तो अब ₹235 करोड़ से अधिक के बैलेंस वर्क टेंडरों की नौबत क्यों आई? क्या इसके पीछे तकनीकी बदलाव, भूमि या डिजाइन संबंधी बाधाएँ, ठेकेदारों की विफलता या अनुबंध प्रबंधन की कमियाँ थीं? इन सभी संभावनाओं की निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। सार्वजनिक धन से बन रही रेल परियोजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना रेल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

मूल ठेकों से लेकर नए बैलेंस वर्क तक सभी संबंधित रिकॉर्ड की स्वतंत्र जाँच हो, संभावित वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि दस्तावेजों के आधार पर की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या सरकारी धन को नुकसान पहुँचाने की बात प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों और कंपनियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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जिम्मेदार रेल अधिकारियों और उनके परिजनों की चल-अचल संपत्ति की भी जाँच अनिवार्य हो!

खलीलाबाद–बहराइच नई रेल लाइन परियोजना में ₹235 करोड़ से अधिक के तीन बैलेंस वर्क टेंडरों के संदर्भ में यह पता लगाना आवश्यक है कि मूल ठेकों से लेकर नए टेंडरों तक किन अधिकारियों ने निर्णय लिए, किसने अनुमोदन दिया और किसकी निगरानी में कार्यों का मूल्यांकन एवं भुगतान हुआ।

सीवीसी और सीबीआई से माँग है कि जाँच के दायरे में संबंधित अधिकारियों की भूमिका के साथ उनकी ज्ञात आय, घोषित संपत्ति, वास्तविक संपत्ति और आय के ज्ञात स्रोतों का भी परीक्षण किया जाए। जहाँ दस्तावेजी साक्ष्य या लेन-देन के संकेत मिलें, वहाँ पत्नी, बच्चों, माता-पिता, भाई-बहन, सास-ससुर, साले-साली, जीजा तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम पर मौजूद चल-अचल संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की भी कानून के अनुसार जाँच हो।

जाँच का उद्देश्य किसी निर्दोष परिजनों को परेशान करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना होना चाहिए कि कहीं सरकारी पद का दुरुपयोग करके अर्जित धन को रिश्तेदारों, बेनामी संपत्तियों, कंपनियों या अन्य माध्यमों से तो नहीं छिपाया गया। केवल रिश्तेदारी के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जाना चाहिए; कार्रवाई ठोस साक्ष्यों के आधार पर हो।

जाँच में मूल ठेकों की लागत, टर्मिनेशन की स्वीकृति, बैलेंस वर्क की गणना, चेनज-वार लेवल बुक, माप पुस्तिकाएँ, जीएसटी संबंधी रिकॉर्ड, बिड कैपेसिटी और भुगतान की समीक्षा भी शामिल होनी चाहिए। यदि इन कार्यों में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है, तो निर्णय लेने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

जानकारों का कहना है कि रेल प्रशासन संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करे और सक्षम जाँच एजेंसियाँ आय से अधिक संपत्ति तथा संभावित बेनामी लेन-देन की निष्पक्ष जाँच करें। सरकारी धन जनता का है—इसकी सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।

मिट्टी, ब्लैंकेटिंग, बैलास्ट, रोड़ी और रेत की पर्चियों का मिलान होने तक भुगतान पर रोक की माँग

खलीलाबाद–बहराइच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न निर्माण सामग्री की वास्तविक आपूर्ति और उसके भुगतान का है। मिट्टी, ब्लैंकेटिंग मटेरियल, बैलास्ट, रोड़ी और रेत की जितनी मात्रा कागजों पर दिखाई गई है, क्या वास्तव में उतनी ही सामग्री साइट पर पहुँची और कार्य में उपयोग हुई?

माँग है कि संबंधित कार्यों के ठेकेदारों के भुगतान की समीक्षा कर, विवादित या संदिग्ध मदों का भुगतान तब तक रोका जाए, जब तक सामग्री की आपूर्ति और मात्रा का दस्तावेजी मिलान पूरा न हो जाए। इसमें प्रत्येक गाड़ी की सप्लाई पर्ची, माइनिंग चालान, रॉयल्टी रसीद, धर्मकाँटा पर्ची, वाहन नंबर, तौल पर्ची, साइट पर प्राप्त सामग्री का रिकॉर्ड और माप पुस्तिका (MB) का आपस में मिलान किया जाए।

यह भी जाँचा जाए कि जिस मात्रा पर भुगतान माँगा गया है, वह वास्तविक आपूर्ति, स्वीकृत स्रोत, लागू तकनीकी मानकों और साइट पर दर्ज कार्य की मात्रा से मेल खाती है या नहीं। कहीं एक ही गाड़ी की पर्ची दोबारा प्रयोग तो नहीं हुई, रॉयल्टी जमा किए बिना खनिज तो नहीं उठाया गया, अथवा कागजों पर दिखाई गई सामग्री और वास्तविक निर्माण कार्य की मात्रा में अंतर तो नहीं है।

संबंधित चीफ इंजीनियर की जवाबदेही भी निर्धारित की जाए। उनके अधीन अधिकारियों ने सामग्री की गुणवत्ता, मात्रा, स्रोत, रॉयल्टी, माप पुस्तिका और भुगतान के सत्यापन में क्या कार्रवाई की, इसका रिकॉर्ड जाँचा जाए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, गलत प्रमाणन या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जाँच पूरी होने तक सभी निर्विवाद और प्रमाणित कार्यों के भुगतान को अनावश्यक रूप से रोकने के बजाय, विवादित मदों तथा संदिग्ध भुगतानों पर नियमानुसार रोक लगाई जाए। इससे सरकारी धन की सुरक्षा भी होगी और वैध भुगतान पाने वाले ठेकेदारों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

रेलवे बोर्ड, पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक, संबंधित चीफ इंजीनियर, सतर्कता विभाग और आवश्यकतानुसार सीवीसी से माँग है कि इस परियोजना के सभी संबंधित ठेकेदारों के सामग्री रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

सीधा प्रश्न: जितनी मिट्टी, ब्लैंकेटिंग, बैलास्ट, रोड़ी और रेत की आपूर्ति दिखाई गई है, क्या उसकी हर गाड़ी की पर्ची, रॉयल्टी, माइनिंग, धर्मकाँटा रिकॉर्ड और साइट की माप का मिलान कराया जा सकता है? क्रमशः