NER में ₹94.91 करोड़ के SLT टेंडर पर प्रश्नचिन्ह: अर्थवर्क, ब्लैंकेटिंग, रॉयल्टी, और पारदर्शिता की स्वतंत्र जाँच की मांग

पूर्वोत्तर रेलवे (#NER) की खलीलाबाद–बहराइच नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत भगौली (छोड़कर) से बखीरा (सहित) सेक्शन में फॉर्मेशन में अर्थवर्क, ब्लैंकेटिंग तथा छोटे पुलों (संख्या 15, 25, 35 और 37) के शेष कार्यों के लिए जारी लगभग ₹94.91 करोड़ (विज्ञापित मूल्य ₹94,90,98,102.56) के स्पेशल लिमिटेड टेंडर (#SLT) (निविदा संख्या: DYCE-CON-G-GKP-08-2026) को लेकर कई गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

इस 9 महीने की अवधि वाले टेंडर (अंतिम तिथि: 28 अक्टूबर 2026) में अर्थवर्क के स्तर, पूर्व ठेकेदार को हुए भुगतान, शेष कार्य की मात्रा, दरों, स्रोतों और संभावित मिलीभगत की निष्पक्ष जाँच की मांग की जा रही है।

हालाँकि जानकारों का यह भी एक बड़ा प्रश्न है कि इतना बड़ा टेंडर “लिमिटेड” क्यों है?

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14 Oct. 2026: “रेलवे के स्पेशल लिमिटेड टेंडर पर प्रश्नचिन्ह: स्थानीय स्तर पर ठेकेदार चयन की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी?”

प्रमुख चिंताएँ और तकनीकी बिंदु

1. अर्थवर्क के लेवल और वास्तविक मात्रा का सत्यापन

संबंधित सेक्शन में अर्थवर्क के निर्धारित लेवल और वास्तविक कार्य की मात्रा में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

फॉर्मेशन की ऊँचाई, डिजाइन लेवल, क्रॉस-सेक्शंस, भराव की मोटाई और ब्लैंकेटिंग की मात्रा सीधे लागत को प्रभावित करती हैं। यदि पुराने कार्य की वास्तविक स्थिति और स्वीकृत डिजाइन में अंतर है, तो शेष कार्य की गणना और नए टेंडर की लागत पर भी उसका प्रभाव पड़ सकता है।

मूल डिजाइन ड्रॉइंग, लांगिट्यूडिनल सेक्शन, क्रॉस-सेक्शंस, लेवल बुक्स, मेजरमेंट बुक्स (MB), स्थल भौतिक सर्वेक्षण और भुगतान के रिकॉर्ड का स्वतंत्र तकनीकी मिलान कराया जाना चाहिए।

2. पूर्व ठेकेदार को अधिक भुगतान का आरोप

वर्तमान निविदा में कार्य को ‘बैलेंस वर्क’ बताया गया है। ऐसे में पूर्व अनुबंध के अंतर्गत मापी गई मात्रा, भुगतान किए गए बिल, स्थल पर उपलब्ध कार्य और अब दोबारा निविदा में शामिल की गई मात्रा का तुलनात्मक परीक्षण आवश्यक है।

जाँच में विशेष रूप से यह देखा जाना चाहिए कि कहीं किसी कार्य की मात्रा को गलत तरीके से मापने, अधूरे कार्य को पूरा दिखाने या किसी मद में वास्तविकता से अधिक भुगतान करने की स्थिति तो नहीं बनी। (नोट: उपलब्ध टेंडर दस्तावेज में पूर्व ठेकेदार के भुगतान का विवरण न होने के कारण इसे अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।)

3. अर्थवर्क की मात्रा, दरें और ओवरलैपिंग की समस्या

टेंडर के पृष्ठ 2 पर अर्थवर्क फिलिंग के लिए 10,50,000 घन मीटर की मात्रा और ₹265 प्रति घन मीटर की दर दर्ज है, जिसका मूल मूल्य ₹27.825 करोड़ है।

इसी मात्रा के लिए मैकेनिकल कम्पैक्शन की अलग मद में ₹30.83 प्रति घन मीटर की दर दर्ज है, जिसका कुल मूल्य लगभग ₹3.24 करोड़ बनता है।

विवरण में ब्लैंकेटिंग को 100% MDD तक कम्पैक्ट करने की बात है, लेकिन आगे लिखा है कि दर में कम्पैक्शन शामिल नहीं है और उसका भुगतान अलग होगा।

जानकारों का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि मद 1 में कौन-सा काम और मद 11 (या अन्य कम्पैक्शन मद) में कौन-सा काम शामिल है, ताकि भुगतान में ओवरलैप या विवाद न हो और कम्पैक्शन का भुगतान दो बार न हो सके।

4. SLT प्रक्रिया और दरों में संभावित मिलीभगत के आरोप

स्पेशल लिमिटेड टेंडर में आमंत्रित कुछ ठेकेदार रेलवे के स्थानीय क्लर्कों और अधिकारियों की कथित मदद से आपसी तालमेल बनाकर बोली की दरें मैनेज कर सकते हैं।

यदि ठेकेदारों के बीच पहले से दरों का समन्वय या अन्य अनुचित समझौता होता है, तो वास्तविक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है और सार्वजनिक धन पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

जाँच में ठेकेदारों के चयन के मानदंड, आमंत्रित फर्मों की सूची, प्राप्त बोलियों, दरों के अंतर और डिजिटल ऑडिट ट्रेल का परीक्षण किया जाना चाहिए।

अनिवार्य शर्तें एवं पारदर्शी मानक (रेलवे बोर्ड से माँगें)

1. चैनेज-वार पारदर्शिता:

  • रेलवे बोर्ड सुनिश्चित करे कि प्रत्येक अर्थवर्क टेंडर के साथ IREPS पर चैनेज-वार लेवल बुक्स, मौजूदा ग्राउंड लेवल (EGL), प्रस्तावित फॉर्मेशन लेवल (PFL), लांगिट्यूडिनल सेक्शंस, क्रॉस-सेक्शन ग्राफ्स, कटिंग-फिलिंग की मात्रा और अर्थवर्क क्वांटिटी कैलकुलेशंस अपलोड की जाएँ। बिना चैनेज-वार सर्वेक्षण रिकॉर्ड और प्रमाणित मात्रा विवरण के कोई बड़ा अर्थवर्क टेंडर जारी न किया जाए।

2. स्रोत और सामग्री का हिसाब:

  • Approved Earth Source: मिट्टी के स्वीकृत स्रोत का नाम, पूरा स्थान, रेलवे साइट से दूरी, स्वीकृति एवं लागू अनुमति का विवरण।
  • Approved Blanketing Source: ब्लैंकेटिंग मटेरियल के स्वीकृत स्रोत/खदान का विवरण, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, क्वालिटी टेस्ट रिपोर्ट्स, स्वीकृति तथा रेलवे साइट तक की दूरी।
  • Before-and-After Survey: रेलवे की जमीन से मिट्टी उठाने की स्थिति में खुदाई से पहले और बाद के प्रमाणित लेवल रिकॉर्ड्स उपलब्ध हों।
  • Material Accounting: रेलवे की अपनी जमीन से उपलब्ध मिट्टी और बाहर से लाई जाने वाली मिट्टी का हिसाब अलग रखा जाए।

3. रॉयल्टी एवं माइनिंग चार्जेज की रसीदें:

  • रेलवे यह सुनिश्चित करे कि फिलिंग में अर्थवर्क तथा ब्लैंकेटिंग मटीरियल के भुगतान से पहले ठेकेदार द्वारा वैध स्रोत, लागू रॉयल्टी/माइनिंग चार्जेज के भुगतान की रसीदें, ट्रांजिट पास/खनिज परिवहन चालान तथा अन्य आवश्यक वैधानिक दस्तावेज जमा किए जाएँ। इसके बिना भुगतान को स्वीकृति न दी जाए।

4. GST की स्पष्टता:

  • टेंडर में लागू GST दर कितने प्रतिशत है, विज्ञापित लागत GST सहित है या GST अतिरिक्त, और GST भुगतान किस आधार पर किया जाएगा, इसका मद-वार विवरण दिया जाए।

5. स्वाइल क्वालिटी क्लास (SQ1/SQ2/SQ3):

  • टेंडर में भराई के लिए स्वाइल क्वालिटी क्लास और ब्लैक कॉटन स्वाइल के उपयोग या निषेध की स्पष्ट शर्त दी जाए।

रेलवे बोर्ड और विजिलेंस से प्रमुख माँगें

  1. स्वतंत्र परीक्षण: ₹94.91 करोड़ के SLT टेंडर की चयन प्रक्रिया, आधार और स्वीकृति का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए।
  2. वित्तीय ऑडिट: पूर्व ठेकेदार के सभी संबंधित रनिंग अकाउंट्स बिल, फाइनल बिल, मेजरमेंट बुक्स और भुगतान रिकॉर्ड का ऑडिट हो।
  3. तकनीकी सर्वेक्षण: मूल डिजाइन लेवल, वास्तविक स्थल के लेवल और अर्थवर्क की मात्रा का स्वतंत्र सर्वेक्षण कराया जाए।
  4. कठोर जवाबदेही (ठेकेदार और अधिकारी दोनों के लिए):
  • अधिक ईएमडी एवं परफॉर्मेंस गारंटी: SLT में तुलनीय ओपन टेंडर की शर्तों के मुकाबले अधिक ईएमडी/परफॉर्मेंस गारंटी का औचित्य परखा जाए।
  • समय पर काम: ठेकेदार की गलती पर नियमानुसार टर्मिनेशन व दंडात्मक कार्रवाई हो।
  • रेलवे की जवाबदेही: यदि रेलवे द्वारा समय पर साइट, स्वीकृत ड्रॉइंग, डिजाइन या मंजूरी न मिलने से काम रुकता है, तो जीएम, सीएओ, चीफ इंजीनियर और डिप्टी चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारियों तथा फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी तय की जाए और गंभीर लापरवाही पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

निष्कर्ष

पब्लिक फंड और पारदर्शिता के हित में यह आवश्यक है कि सार्वजनिक धन से जुड़े ऐसे सभी बड़े प्रोजेक्ट्स में हर स्तर पर स्पष्टता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि रिकॉर्ड गायब होने या सिस्टम की कमियों से रेलवे के धन को नुकसान न पहुँचे।