बड़ी कंपनियों की तरह छोटे कारोबारियों को भी 25% आयकर! मोदी सरकार से कानून बदलने की मांग

नई दिल्ली | भारत में प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप फर्मों के साथ आयकर में समानता का मामला एक बार फिर चर्चा में है। छोटे कारोबारियों और ठेकेदारों की मांग है कि केंद्र सरकार वर्तमान आयकर कानून में संशोधन करके उनके कारोबारी मुनाफे पर भी “25% की मूल आयकर दर” लागू करे, ताकि उन्हें कंपनियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में उचित अवसर मिल सके।

आयकर विभाग के निर्धारण वर्ष 2026-27 के प्रकाशित विवरण के अनुसार, पात्र घरेलू कंपनियों पर 25% की मूल दर लागू हो सकती है, जबकि पार्टनरशिप फर्मों और एलएलपी (LLP) पर सामान्यतः 30% की मूल दर है। कंपनी की कुछ श्रेणियों के लिए 22% और 15% की विशेष दरें भी उपलब्ध हैं। अधिभार और उपकर अलग से लागू है।

छोटे कारोबारी अधिक दर क्यों चुकाएँ?

प्रोपराइटरशिप में मालिक अपनी पूँजी और कारोबार की जिम्मेदारी स्वयं उठाता है। पार्टनरशिप में साझेदार पूँजी, श्रम और व्यावसायिक जोखिम साझा करते हैं। इसके बावजूद, पार्टनरशिप (साझेदारी या भागीदारी) फर्मों की सामान्य मूल कर-दर 30% है, जबकि कुछ घरेलू कंपनियाँ 25% या उससे कम की दर का लाभ ले सकती हैं।

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छोटे ठेकेदारों का कहना है कि सामग्री की बढ़ती कीमतें, मजदूरी, बैंक गारंटी, ब्याज और सरकारी भुगतान में देरी पहले ही उनकी कार्यशील पूँजी पर दबाव डालते हैं। ऐसे में कर-दर में अंतर उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।

मोदी सरकार से स्पष्ट मांग

केंद्र सरकार को वर्तमान आयकर कानून में आवश्यक संशोधन करके निम्नलिखित प्रावधान करने चाहिए:

  1. प्रोपराइटरशिप से होने वाली व्यावसायिक आय के लिए उचित सीमा और शर्तों के साथ 25% की अधिकतम मूल कर-दर का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
  2. पार्टनरशिप फर्मों और LLP की सामान्य मूल आयकर दर 30% से घटाकर 25% की जाए।
  3. छोटे कारोबारियों को मिलने वाली कर-राहत की समीक्षा हर वित्त वर्ष में की जाए।
  4. बड़ी कंपनियों को मिलने वाली विशेष कर-दरों और प्रोत्साहनों के मुकाबले छोटे उद्यमों की स्थिति का भी सार्वजनिक आकलन किया जाए।

निष्कर्ष

जब छोटे कारोबारी भी रोजगार पैदा करते हैं, सरकारी परियोजनाओं में योगदान देते हैं और अपनी पूँजी जोखिम में लगाते हैं, तो उन्हें भी प्रतिस्पर्धी कर-व्यवस्था का उचित लाभ मिलना चाहिए। मोदी सरकार से मांग है कि वह इस प्रस्ताव को आगामी वित्तीय और विधायी प्रक्रिया में शामिल करे तथा प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप फर्मों के लिए 25% की समान मूल आयकर दर लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

छोटे कारोबारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, कर-व्यवस्था में उन्हें भी बराबरी का अधिकार मिले!