पूर्व मध्य रेलवे का निर्माण संगठन बना ‘ठेकेदारों का संगठन’, व्हिसलब्लोअर ने उजागर की अंदरूनी कार्यप्रणाली

भारतीय रेल के निर्माण संगठन, विशेषकर पूर्व मध्य रेलवे की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर व्हिसलब्लोअर इनपुट सामने आया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मध्य रेलवे अब रेलवे का उपक्रम न रहकर कथित तौर पर एक ठेकेदारों का संगठन बनकर रह गया है। आरोप है कि महत्वपूर्ण निर्णय रेलवे के वित्तीय हितों के बजाय भ्रष्ट ठेकेदारों की मर्जी से लिए जा रहे हैं, जबकि ईमानदार और सक्षम ठेकेदारों को हाशिए पर धकेल दिया गया है।

व्हिसलब्लोअर इनपुट में आरोप लगाया गया है कि मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कथित तौर पर ठेकेदारों के एजेंट सह संचालक की तरह काम कर रहे हैं। बिना रेलवे बोर्ड की मंजूरी के मनमाने ढंग से गैर-ईपीसी मोड पर बड़े ठेके दिए जा रहे हैं और चहेतों को विभिन्न अनुबंधों में समायोजित किया जा रहा है। लगभग सभी अनुबंधों में 40 से 50 प्रतिशत तक का भारी विएशन देखा जा रहा है। डिजाइन और ड्राइंग को टेंडर फाइनल होने के बाद अंतिम रूप दिया जाता है ताकि बाद में आसानी से लागत में बदलाव किए जा सकें, जो बेहद खराब योजना और टेंडर के बाद ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाने की शंका को जन्म देता है।

भारतीय रेलवे में पिछले कुछ वर्षों में भारी पूंजी निवेश हुआ है, लेकिन प्राथमिकताओं का घोर अभाव है। नई लाइनें और पुल मूल रूप से निर्धारित गति की तुलना में बहुत कम गति से शुरू किए जा रहे हैं। परियोजनाओं की लागत कई गुना बढ़ गई है और धन का अपव्यय हुआ है। आज तक कोई भी नई लाइन 130 किमी प्रति घंटा की गति से शुरू नहीं की जा सकी है।

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इसके अलावा, अगस्त 2023 में शिलान्यास किए गए अमृत भारत स्टेशनों को मई 2024 तक चालू होना था, लेकिन पूर्व मध्य रेलवे में शायद ही किसी स्टेशन ने अपने वांछित उद्देश्यों को हासिल किया हो। सोनपुर और दानापुर में विशाल इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन प्लेटफार्मों की सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ।

गया स्टेशन पर भारी मात्रा में स्टील के ट्यूबलर स्ट्रक्चर्स का उपयोग किया जा रहा है, जो यात्रियों के लिए अनुपयोगी हैं और भविष्य में इनके रखरखाव का खर्च अत्यधिक होगा। पटना एयरपोर्ट का काम बिना किसी बाधा के पूरा हो गया, लेकिन गया स्टेशन का काम यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, जिसकी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।

निर्माण संगठन के विद्युत और एसएंडटी विभागों की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई है। विद्युत विभाग में बिना सामग्री की आपूर्ति और फर्जी चालान के भुगतान किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है। एसएंडटी विभाग में भी भ्रष्टाचार का स्तर कल्पना से परे बताया गया है, जहां सामग्री डंप करके कागजों में हेरफेर किया जा रहा है। इसके साथ ही गिट्टी और मिट्टी के काम में जीएसटी और रॉयल्टी भुगतान में भारी वित्तीय फर्जीवाड़े की आशंका जताई गई है।

इनपुट के अंत में इस पूरी व्यवस्था को माफिया संगठन की तर्ज पर चलने वाला बताया गया है, जहां ठेकेदार बॉस और अधिकारी उनके एजेंट की भूमिका में हैं। इस पूरे तंत्र को दुरुस्त करने के लिए तत्काल प्रभाव से कम कार्यकाल वाले वर्तमान मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों को हटाने और कम से कम तीन साल का शेष कार्यकाल रखने वाले बेदाग अधिकारियों को नियुक्त करने की जोरदार मांग की गई है ताकि जातिगत समीकरणों और धन आधारित प्रबंधन पर हमेशा के लिए लगाम लगाई जा सके।