भारतीय रेल में अपर महाप्रबंधक का पद: प्रशासनिक संतुलन या मात्र औपचारिकता?
भारतीय रेल के संगठनात्मक ढ़ांचे में अपर महाप्रबंधक (#AGM) का पद केवल शो-पीस बनकर रह गया है, जबकि जोन स्तर पर महाप्रबंधक (जीएम) के बाद यह दूसरा सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद माना जाता है। नियमों के तहत एजीएम जोन का मुख्य जनशिकायत निवारण अधिकारी (ग्रीवांस ऑफिसर) होता है, जिसके कंधों पर विभिन्न विभागों के साथ समन्वय, समयबद्धता (पंक्चुअलिटी), स्वच्छता, कर्मचारी कल्याण और समग्र प्रशासनिक निगरानी इत्यादि का महत्वपूर्ण दायित्व होता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न जोनल रेलों में इस पद की उपयोगिता, अधिकारियों की तैनाती और कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
सजा या औपचारिकता का पद?
रेलवे बोर्ड द्वारा उच्च प्रशासनिक ग्रेड के अधिकारियों की पदस्थापना नीति पर अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या एजीएम का पद अब केवल सेवा-समायोजन (साइडलाइन पोस्टिंग) बनकर रह गया है। हाल ही में उत्तर रेलवे (एनआर) के एक वरिष्ठ इंजीनियरिंग अधिकारी का तबादला उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) में एजीएम पद पर किया गया था, लेकिन प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल कर उस आदेश को निरस्त करा लिया गया। यह घटना दर्शाती है कि कई वरिष्ठ अधिकारी एजीएम के पद को कार्यकारी और नीतिगत निर्णयों से दूर मात्र एक ‘सजा’ या ‘कम प्रभाव वाली कुर्सी’ के रूप में देखते हैं।
जोनल रेलों में पदस्थापना और कार्यप्रणाली का विश्लेषण
विभिन्न जोनों में एजीएम पद पर तैनात अधिकारियों की पृष्ठभूमि और वहां की कार्यप्रणाली—व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाती है:
- उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) एवं दक्षिण रेलवे (एसआर): एनसीआर में प्रशासनिक मतभेदों के चलते मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी का स्थानांतरण दक्षिण रेलवे के एजीएम पद पर किया गया। निर्माण संगठन से इस प्रकार के लगातार बदलाव शीर्ष स्तर पर नीतिगत तालमेल की कमी को दर्शाते हैं। वहीं दक्षिण रेलवे में निरीक्षण और प्रशासनिक कार्यों के बीच संतुलन की कमी की चर्चाएं आम हैं, जहां एजीएम की सक्रिय भूमिका सीमित दिखाई देती है।
- मध्य रेलवे (सीआर): भंडार विभाग के एक भंडारी यानि एक निहायत निकम्मे और केवल शो-ऑफ करने वाले अधिकारी को लंबे समय से मुंबई में पदस्थ रखते हुए एजीएम की जिम्मेदारी दी गई, जो कि वहीं एसडीजीएम के पद पर रहते हुए एक जोकर ही साबित हुआ था। प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बजाय खेल और अन्य गतिविधियों में अधिक समय देने के आरोपों के बीच जोन की परिचालन स्थिति पर विपरीत असर देखा जा रहा है। जोन के खेल प्रकोष्ठ को भी इस अधिकारी ने विजिलेंस की ही तरह जुगाड़, भ्रष्टाचार और राजनीति का अड्डा बना दिया।
- पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर): इंजीनियरिंग विभाग के एक अधिकारी, जिनका अधिकांश कार्यकाल वाराणसी मंडल, रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) और निर्माण संगठनों में बीता है, यहां एजीएम बनाए गए हैं। इनकी समस्त भ्रमण (निरीक्षण) गतिविधियाँ केवल गोरखपुर स्टेशन तक ही सीमित रहती हैं। स्थानीय व्यवसायिक निवेश, आवास आवंटन और सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते इनकी प्रशासनिक क्षमता और निष्पक्षता पर प्रश्न उठ रहे हैं। बताते हैं, राजनीतिक रुझान की चर्चा भी इनके द्वारा जानबूझकर अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए फैलाई गई है।
- दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर): इस जोन में विभाग प्रमुखों (पीएचओडी) के साथ समन्वय की भारी कमी देखने को मिल रही है, क्योंकि जोन का शीर्ष नेतृत्व भी अनुभवहीन और कमजोर है। प्रशासनिक फाइलों के निपटारे में देरी और अनुचित व्यवहार को लेकर शीर्ष स्तर पर कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।
- पूर्व रेलवे (ईआर) एवं पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर): पूर्व रेलवे में पूर्व शीर्ष नेतृत्व (जीएम) द्वारा व्यक्तिगत हितों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित किए जाने के कारण नीतिगत प्रक्रियाओं का पूरा नियंत्रण एजीएम कार्यालय के इर्द-गिर्द सिमट गया था, जिसमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं आया है। वहीं पूर्व मध्य रेलवे में तो कहना ही क्या, यहां एजीएम जैसे गरिमामय पद को मुख्य प्रशासनिक मुद्दों के बजाय जीएम के लिए सांस्कृतिक और अनौपचारिक आयोजनों तक सीमित कर दिया गया है।
- पूर्व तट रेलवे (ईसीओआर): निर्माण विभाग की पृष्ठभूमि वाले अधिकारी द्वारा पदभार संभाले जाने के बाद ‘कवच’ और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी परियोजनाओं के वित्तीय एवं प्रशासनिक मूल्यांकन पर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही का अभाव
उच्च स्तर (लेवल-16) में पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे अधिकारियों के लिए यह पद अक्सर बिना किसी ठोस उत्तरदायित्व के समय बिताने (टाइम पास करने) का माध्यम बनता जा रहा है। विशेषकर मुख्य ग्रीवांस अधिकारी होने के बावजूद यात्री सुविधाओं, कर्मचारी समस्याओं के निवारण और समयबद्धता जैसे बुनियादी रेलवे मानकों पर एजीएम स्तर से अपेक्षित गंभीरता का न दिखना संपूर्ण रेल प्रशासन के लिए एक विचारणीय विषय बन गया है।

