अमृत भारत योजना: उत्तर मध्य रेलवे में फंड की कमी, लंबित भुगतान, अकाउंट्स की मनमानी और गलत लेबर सेस कटौती

प्रयागराज ब्यूरो: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन वाली प्राथमिक राष्ट्रीय परियोजना ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ उत्तर मध्य रेलवे (#NCR) में प्रशासनिक सुस्ती, फंड के संकट और वित्तीय विसंगतियों के घेरे में आ गई है। परियोजना से जुड़े ठेकेदारों ने भुगतान में देरी, अनुबंध समापन में हीलाहवाली, अकाउंट्स विभाग में मनमानी और गलत लेबर सेस कटौती को लेकर #RailSamachar के माध्यम से महाप्रबंधक (#GMNCR) से गुहार लगाई है।

प्राथमिकता वाली योजना में बजट का संकट

केंद्र सरकार की उच्च प्राथमिकता वाली अमृत भारत योजना में धनराशि की कमी का हवाला देकर ठेकेदारों के वैध भुगतान रोक दिए गए हैं। आरोप है कि फंड न होने के बावजूद संबंधित SSE/JE और अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों पर निजी संसाधनों से काम जारी रखने का अनुचित दबाव बनाया जा रहा है, जिससे ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

अनुबंध समापन में देरी और PVC का अतिरिक्त भार

शिकायत के अनुसार, योजना के तहत अब तक एक भी अनुबंध को समय पर अंतिम रूप से बंद (क्लोज) नहीं किया गया है। कार्य पूरा होने के बावजूद माप पुस्तिका (एमबी), बिल तैयार करने और अंतिम भुगतान में अनावश्यक देरी की जा रही है। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण रेलवे को अतिरिक्त प्राइस वेरिएशन क्लॉज (#PVC) का भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे सार्वजनिक धन पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

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‘पिक एंड चूज’ और कथित सौदेबाजी के आरोप

कंस्ट्रक्शन अकाउंट्स विभाग पर भुगतान में “पिक एंड चूज” की नीति अपनाने का गंभीर आरोप लगा है। समान प्रकृति के कार्यों के बावजूद कुछ चुनिंदा ठेकेदारों का भुगतान किया जा रहा है, जबकि बाकी के बिल लंबित हैं। इसके साथ ही भुगतान जारी करने के एवज में कथित सौदेबाजी और अनुचित मांगों की शिकायतें भी सामने आई हैं।

विद्युत ठेकेदारों के बिलों से गलत लेबर सेस कटौती

विभागों के बीच नियमों के विरोधाभास का मामला भी सामने आया है। जहां डिवीजन अकाउंट्स ऑफिस विद्युत कार्यों के बिलों से लेबर सेस नहीं काट रहा है, वहीं कंस्ट्रक्शन अकाउंट्स ऑफिस द्वारा पूरी राशि पर गलत तरीके से लेबर सेस काटा जा रहा है। सामग्री आपूर्ति, स्थापना एवं कमीशनिंग जैसे तकनीकी कार्यों पर बिना वैधानिक आधार के की जा रही इस कटौती की समीक्षा और रिफंड की मांग की गई है।

ठेकेदारों की प्रमुख मांगें:

  • अमृत भारत योजना में फंड की कमी के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार स्तर की जांच हो।
  • बजट उपलब्ध न होने तक ठेकेदारों पर काम का अनुचित दबाव बंद किया जाए।
  • कार्यों के माप, बिलिंग, भुगतान और अनुबंध समापन के लिए समयबद्ध व्यवस्था बने।
  • देरी के लिए जिम्मेदार SSE/JE और संबंधित अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जाए।
  • अधिकारियों की लापरवाही से रेलवे पर पड़ रहे अतिरिक्त PVC भार की जांच कराई जाए।
  • अकाउंट्स विभाग में ‘पिक एंड चूज’ और कथित सौदेबाजी के आरोपों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच हो।
  • कंस्ट्रक्शन अकाउंट्स द्वारा विद्युत कार्यों पर काटी जा रही लेबर सेस राशि की समीक्षा कर तत्काल रिफंड/समायोजन किया जाए।
  • सभी ठेकेदारों के भुगतान के लिए पारदर्शी और समान प्रणाली लागू हो।

ठेकेदारों ने महाप्रबंधक/उ.म.रे. से पूरे मामले की उच्च स्तरीय, समयबद्ध और स्वतंत्र जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।