ईसीआर एसएंडटी में ‘सिंडिकेट राज’: महत्वपूर्ण पदों पर जातिगत गोलबंदी, प्रशासनिक मनमानी और ₹3,000 करोड़ के टेंडरों पर नजर!

हाजीपुर/पटना: पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के सिग्नल एवं दूरसंचार (S&T) विभाग में इन दिनों प्रशासनिक मर्यादा और नियमों को ताक पर रखकर एक संगठित ‘सिंडिकेट’ चलाने का खेल खुलकर सामने आ रहा है। विभाग के तमाम मलाईदार और नीतिगत पदों पर योग्यता और वरिष्ठता को दरकिनार कर एक खास समूह और बिरादरी से जुड़े अधिकारियों को बिठाया जा चुका है।

अक्षमता के बावजूद महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की कमान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, #CSTE/नॉर्थ/कंस्ट्रक्शन, CSTE/वर्क्स और अति-महत्वपूर्ण ‘कवच’ (#KAVACH) परियोजना की जिम्मेदारी संभाल रहे #SAG (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) स्तर के अधिकारी एक ही खास लॉबी और समूह से ताल्लुक रखते हैं। सूत्रों का दावा है कि पिछले 15 से 20 वर्षों के अपने सेवाकाल में इन अधिकारियों का कोई उल्लेखनीय तकनीकी या प्रशासनिक योगदान नहीं रहा है। तकनीकी समझ का वस्तुस्थिति यह है कि ये अधिकारी एक साधारण ‘नॉन-इंटरलॉकिंग’ (NI) का प्लान तक तैयार करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इसके बावजूद रेलवे के अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की मुखियाई इन्हीं के हवाले कर दी गई है।

स्थानीय पदस्थापना और प्रशासनिक मनमानी

विभाग में प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CSTE/वर्क्स अपने पूरे सेवाकाल में शायद ही कभी पटना/हाजीपुर से बाहर पदस्थापित रहे हों। वर्तमान में ईसीआर के एसएंडटी विभाग के अघोषित ‘सर्वेसर्वा’ वही बने हुए हैं।

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वहीं, CSTE/नॉर्थ/कंस्ट्रक्शन की कार्यशैली भी लगातार विवादों के घेरे में है:

  • पूर्व में एक होनहार युवा JAG (जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड) अधिकारी को एक साजिश के तहत सेफ्टी विंग में भिजवा दिया गया।
  • हाल ही में प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए, सक्षम प्राधिकारी (#CAO/Con) के पूर्व अनुमोदन के बिना ही, एक अन्य युवा JAG अधिकारी से उसका संपूर्ण कार्यभार और पूरा स्टाफ छीनकर अपने चहेते अधिकारी को सौंप दिया गया।
  • इसी प्रकार, ‘कवच’ परियोजना में पदस्थापित एक योग्य SAG अधिकारी को उनका 2 वर्ष का सामान्य कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अचानक हटाकर महत्वहीन ‘ड्राइंग’ सेक्शन में शंट कर दिया गया। उनकी जगह इस सिंडिकेट के एक नए SAG सदस्य को ‘कवच’ का प्रभार सौंप दिया गया।

चहेतों को संरक्षण और पक्षपात का खामियाजा

यह लॉबी न केवल अपने विरोधियों अथवा सक्षम एवं योग्य अधिकारियों को हाशिए पर धकेलने की नीयत से काम कर रही है, बल्कि अपनी बिरादरी के लोगों को उपकृत करने के लिए अक्षम अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप रही है। हाल ही में इस समूह से जुड़े एक अत्यंत अयोग्य JAG अधिकारी को पं. दीनदयाल उपाध्याय (मुगलसराय) में वर्क्स का इंचार्ज बनाया गया था। वहां उस अधिकारी की गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी विफलता तथा भारी किरकिरी के चलते प्रशासन को उसे एक साल के भीतर ही पद से हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

हजारों करोड़ के टेंडरों पर सिंडिकेट की गिद्ध दृष्टि

सूत्रों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में ईसीआर के एसएंडटी विभाग में करीब ₹1,000 करोड़ के टेंडर जारी किए गए थे, जबकि लगभग ₹2,000 करोड़ के बड़े प्रोजेक्ट्स और टेंडर अभी पाइपलाइन में हैं। विभागीय गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि विभाग के हितों की बलि चढ़ाकर इन भारी-भरकम टेंडरों के आवंटन में अपने करीबी नेटवर्क को सीधा लाभ पहुंचाने की सुनियोजित तैयारी चल रही है।

महाप्रबंधक से पटरी नहीं खाती कार्यशैली

इस लॉबी के शीर्ष सूत्रधार की प्रशासनिक साख का यह हाल है कि उनकी महाप्रबंधक (#GMECR) से बिल्कुल नहीं बनती। स्थिति यह है कि महाप्रबंधक अपने आधिकारिक निरीक्षणों (#Inspections) तक में इस अधिकारी को साथ ले जाने से पूरी तरह परहेज करते हैं।

सार्वजनिक मंचों पर सामाजिक न्याय और पारदर्शिता की बातें करने वाले जब प्रशासनिक शक्ति पाते हैं, तो उनका पूरा ध्यान केवल जातिगत गोलबंदी, पक्षपात और भ्रष्टाचार पर केंद्रित हो जाता है। ईसीआर एसएंडटी का यह पूरा घटनाक्रम रेलवे की कार्यकुशलता और संरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

#RailSamachar इस पूरे मामले और आगामी घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।