कैग रिपोर्ट ने खोली रेलवे के वित्तीय कुप्रबंधन की पोल: 89% स्टेशनों पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव, क्रिस में नियम विरुद्ध बांटे गए ₹259.13 करोड़

नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (#CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने भारतीय रेल के आंतरिक प्रशासन, वित्तीय अनुशासन और बुनियादी यात्री ढ़ांचे की गंभीर खामियों को बेनकाब किया है। संसद में रखी गई इस ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, देश के लगभग 89 प्रतिशत गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ, रेलवे की सूचना प्रौद्योगिकी संस्था ‘सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स’ (#CRIS) में नियमों को दरकिनार कर ₹259.13 करोड़ के अनधिकृत भत्ते बांटे गए हैं और संरक्षा के लिए बनाए गए ‘राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष’ (#RRSK) की मदों से टॉयलेट सीट खरीदने और बिजली के बिल भरने जैसी वित्तीय विसंगतियां उजागर हुई हैं।

कैग और रेल अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा 16 जोनों के 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों के किए गए विस्तृत ऑडिट में पाया गया कि 458 स्टेशनों (लगभग 89%) पर कम से कम एक या उससे अधिक न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी है। ऑडिट के मुताबिक, 42% स्टेशनों पर पंखे, 40% पर वॉटर कूलर, 27% पर पीने के पानी के नल, 22% पर मूत्रालय, 15% पर बैठने के बेंच, 13% पर प्लेटफॉर्म शेल्टर तथा 12% पर शौचालयों की स्वीकृत मानकों के अनुसार कमी पाई गई।

केवल 11% यानि 54 स्टेशन ही ऐसे थे जहां सभी अनिवार्य सुविधाएं पूरी मिलीं। आश्चर्यजनक रूप से, नई दिल्ली, मुंबई सेंट्रल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, हावड़ा और सियालदह जैसे ₹500 करोड़ से अधिक कमाई वाले शीर्ष ‘NSG-1’ श्रेणी के प्रमुख टर्मिनलों पर भी बैठने की व्यवस्था, शौचालय, डस्टबिन और इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड जैसी आवश्यक सुविधाओं में बड़ी कमियां दर्ज की गईं। अर्थात यात्री सुविधाओं से संबंधित फंड का उपयोग कहां और किस मद में किया गया, इसका कोई विवरण उपलब्ध नहीं है।

Advertisements

पैसेंजर एमेनिटीज मैनेजमेंट सिस्टम (#PAMS) के फरवरी 2025 के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि 5,908 स्टेशनों के विश्लेषण में 1,983 स्टेशनों पर पब्लिक एड्रेस सिस्टम, 1,440 स्टेशनों पर पानी के नल और 214 स्टेशनों पर शौचालयों की भारी किल्लत है। रेलवे बोर्ड द्वारा सितंबर 2012 में दिए गए निर्देशों के बावजूद कि जनरल सेकंड क्लास डिब्बों के ठहराव वाले प्लेटफॉर्म एरिया में शेल्टर अवश्य होना चाहिए, 379 स्टेशनों पर इसे सुनिश्चित नहीं किया गया, जिससे आम यात्री खुले आसमान के नीचे मौसम की मार झेलने को मजबूर रहे। इसके अलावा, गैर-अमृत भारत स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं के 59% काम एक से चार साल तक के भारी विलंब से चल रहे हैं। दिव्यांगजनों के लिए बनाए जाने वाले सुलभ बुनियादी ढांचे, रैंप, लिफ्ट और टेक्टाइल पाथवे में भी भारी लापरवाही सामने आई है।

रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि यात्री सुविधाओं की यह बदहाली बजट की कमी की वजह से नहीं, बल्कि खराब नियोजन और क्रियान्वयन की लचर व्यवस्था के कारण है। वर्ष 2019-20 से 2023-24 के पांच वर्षों के दौरान यात्री सुविधाओं के लिए आवंटित बजट का 36 से 44 प्रतिशत हिस्सा हर साल बिना खर्च किए ही छोड़ दिया गया, जबकि 2023-24 में बजट आवंटन ₹14,072 करोड़ तक पहुंच चुका था, जिसमें से ₹5,956 करोड़ खर्च ही नहीं हो पाए। यही नहीं, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (#CSR) के तहत करोड़ों रुपये की लागत से बने प्री-फैब्रिकेटेड और बायो-टॉयलेट बिजली, पानी और मेंटेनेंस एजेंसियों के अभाव में ताले में बंद पड़े रहे।

यात्री सुविधाओं के इस संकट के बीच कैग रिपोर्ट के पैरा 2.1 में संस्थागत वित्तीय अनुशासनहीनता का बड़ा खुलासा हुआ है। वित्त मंत्रालय के 15 अक्टूबर 1984 के कार्यालय ज्ञापन के नियमों के अनुसार स्वायत्त निकायों को सामान्य पैटर्न से अलग किसी भी विशेष भत्ते के भुगतान से पहले भारत सरकार की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, रेलवे की तकनीकी शाखा ‘क्रिस’ (CRIS) ने भारत सरकार से कोई मंजूरी लिए बिना मार्च 2025 तक अपने कर्मचारियों को सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल अलाउंस, मेडिकल अलाउंस, लीव इनकैशमेंट और कैंटीन अलाउंस के रूप में कुल ₹259.13 करोड़ का भुगतान कर डाला, जिसे कैग ऑडिट ने पूरी तरह अनियमित घोषित किया है।

Read the Para of CAG Report—Irregular Payments by CRIS

इसके साथ ही, रेल संरक्षा और आधुनिकीकरण के लिए स्थापित ‘राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष’ (#RRSK) के उपयोग में भी गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। ट्रैक रिन्यूअल, सिग्नलिंग अपग्रेड और रेल दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए तय विशेष फंड को सुरक्षा से इतर सामान्य मदों, जैसे टॉयलेट सीटों की खरीद, स्टेशनरी और बिजली बिलों के भुगतान जैसी सामान्य परिचालन गतिविधियों में डायवर्ट किया गया। कैग ने अपनी सिफारिशों में स्पष्ट किया है कि स्टेशनों के री-डेवलपमेंट के नाम पर गैर-प्राथमिकता वाले कार्यों को आगे बढ़ाने की जगह अनिवार्य बुनियादी सुविधाओं, समयबद्ध कार्य योजनाओं और संरक्षा प्राथमिकताओं पर तुरंत ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।