पूर्व मध्य रेलवे में सेवानिवृत्ति से पूर्व आयोजनों के नाम पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और कथित उगाही के आरोप
हाजीपुर: पूर्व मध्य रेलवे में इस माह सेवानिवृत्त हो रहे महाप्रबंधक (जीएम) के विदाई आयोजनों और कथित निरीक्षण दौरों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सुरक्षा और परिचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे रेलवे में शुचिता के स्थापित मानदंडों की अनदेखी करते हुए निजी स्वार्थों और विदाई आयोजनों के लिए व्यापक स्तर पर तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।
हाल ही में 12 अगस्त को धनबाद मंडल में एक भीषण रेल दुर्घटना के चलते तीज का प्रस्तावित भव्य कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। सूत्रों के अनुसार, सोनपुर मंडल में तीज के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने के बाद अब 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के दिन धनबाद में कथित तौर पर निरीक्षण व उद्घाटन के नाम पर पुनः एक बड़े कार्यक्रम की योजना बनाई गई है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन आयोजनों के माध्यम से अधिकारियों और ठेकेदारों से अनुचित लाभ व महंगे उपहार जुटाए जा रहे हैं, जिसमें उच्चाधिकारियों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आधिकारिक निरीक्षणों की आड़ ली जा रही है।

इतना ही नहीं, विभागीय गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि जयपुर और दिल्ली स्थित निजी आवासों के निर्माण, साज-सज्जा और मरम्मत से जुड़े खर्चों के साथ-साथ पारिवारिक आयोजनों का भार भी कथित तौर पर संवेदकों और अधीनस्थों पर डाला जा रहा है। हाल ही में दानापुर मंडल के अंतर्गत आरा स्टेशन पर एक अर्धनिर्मित आरपीएफ बैरक का आनन-फानन में उद्घाटन कराए जाने का मामला भी सामने आया है, जिसे लेकर प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर प्रश्न उठ रहे हैं।
एक ओर जहां पूर्व मध्य रेल परिक्षेत्र में रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने और तकनीकी खामियों जैसी घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्ति के नाम पर सैलून, इंस्पेक्शन कैरिज और अन्य सरकारी मशीनरी का कथित व्यक्तिगत उपयोग प्रशासनिक मर्यादा के प्रतिकूल माना जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय और संबंधित उच्चाधिकारियों से इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा विदाई आयोजनों की आड़ में होने वाले संसाधनों के अनुचित उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने की मांग की जा रही है।

