तीज और फेयरवेल के नाम पर संसाधनों का दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और नियमों का उल्लंघन

पूर्व मध्य रेल (#ECR) में तीज-त्योहारों के आयोजनों और विदाई कार्यक्रमों (#फेयरवेल) के नाम पर महंगे उपहार देने का चलन एक नियमित प्रथा बनता जा रहा है। इन आयोजनों के आवरण में ठेकेदारों और कर्मचारियों से कथित धन उगाही और उनके मानसिक एवं आर्थिक शोषण की शिकायतें सामने आ रही हैं। सरकारी संसाधनों के इस तरह के उपयोग से रेलवे की साख और पद की गरिमा पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री के ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ के भ्रष्टाचार-विरोधी संकल्प के विपरीत माना जा रहा है।

हालांकि, अधिकारी विदाई कार्यक्रमों के जरिए शिष्टाचार और सम्मान व्यक्त करने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसे आयोजनों को रेलवे की मर्यादा और छवि को ठेस पहुंचाए बिना आयोजित किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। निरीक्षण और उद्घाटन के नाम पर अधिकारियों के दौरों के दौरान होने वाले व्यय, चंदा उगाही और रेलवे कैरिज, सैलून व इंस्पेक्शन कारों के कथित निजी उपयोग पर रेल कर्मचारियों और अधिकारियों ने गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि सेवानिवृत्ति के अंतिम महीनों में आयोजित होने वाले कई निरीक्षण और उद्घाटन कार्यक्रम केवल औपचारिक न होकर व्यक्तिगत लाभ और संसाधनों के अनुचित उपयोग का जरिया बन चुके हैं। ऐसे में रेलवे के इंस्पेक्शन व्हीकल्स और सैलून के मूवमेंट पर सख्त निगरानी रखने और उन्हें नए नियमों के तहत रेगुलेट करने की मांग जोर पकड़ रही है।

नियमों के संदर्भ में देखा जाए तो पूर्व में भी महाप्रबंधक (GM) और मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के नाम वाले शिलापट्टों (पट्टिकाओं) पर रोक के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, फिर भी कई स्थानों पर उद्घाटन और शिलापट्ट लगाने की परंपरा लगातार जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। इसके अलावा, तीज जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए सरकारी वाहनों और संसाधनों के उपयोग तथा निरीक्षण के नाम पर होने वाले अनावश्यक आयोजनों को तुरंत प्रतिबंधित करने की आवश्यकता जताई गई है। आयोजनों में अधिकारियों के परिजनों को मिलने वाले आधिकारिक प्रोटोकॉल, गाड़ियों और स्टाफ के उपयोग के विधिक आधार पर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं।

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इस स्थिति को देखते हुए चेयरमैन/रेलवे बोर्ड (#CRB) और सदस्य वित्त (#MemberFinance) से उच्च स्तरीय निर्देश जारी कर ऐसे अवैध खर्चों और संसाधनों के दुरुपयोग पर तत्काल रोक लगाने का आग्रह किया गया है। अब सभी की निगाहें रेल मंत्रालय पर टिकी हैं कि पूर्व मध्य रेल में सामने आ रहे इन मामलों, प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार-विरोधी संकल्प के उल्लंघन और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या प्रशासनिक कदम उठाए जाते हैं।