दानापुर मंडल: ट्रैकमैन से ट्रैक के बजाय बंगलों में कराई जा रही रसोईए और दफ्तरों की चाकरी

पटना / दानापुर: पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के दानापुर मंडल में रेल सुरक्षा और संरक्षा को दरकिनार कर प्रशासनिक अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंडल रेल प्रबंधक (#DRM) के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद कई योग्य और अनुभवी ट्रैकमैन अधिकारियों के बंगलों पर व्यक्तिगत काम करने तथा कार्यालयों में बाबूगीरी करने को मजबूर हैं।

डीआरएम के आदेश की अवहेलना

विभागीय नियमों और डीआरएम के आदेशानुसार, 2800 ग्रेड पे वाले सीनियर ट्रैकमैन को रेल पटरियों की सुरक्षा सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘कीमैन’ या ‘मेठ’ के रूप में तैनात किया जाना है। हालांकि, मंडल के कुछ सहायक मंडल अभियंता (#ADEN) और स्थायी मार्ग निरीक्षक (#PWI) की मिलीभगत से इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। अनुभवी ट्रैक मेंटेनरों को फील्ड में तैनात करने के बजाय उनसे ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम (#TMS) की एंट्री कराने, दफ्तरी कार्य कराने और साहबों के बंगलों पर रसोइए के तौर पर काम कराने की शिकायतें मिली हैं।

सुरक्षा पर गहराया संकट

फील्ड में अनुभवी कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण उनके स्थान पर 1800 और 1900 ग्रेड पे वाले कम अनुभवी कर्मचारियों को भेजा जा रहा है। इसके कारण पटरियों के रखरखाव और गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ रहा है, जिससे किसी भी वक्त बड़े रेल हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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सरकारी खजाने को चूना और वित्तीय अनियमितता

आरोप है कि बंगलों और कार्यालयों में सेवाएं दे रहे सैकड़ों ट्रैक मेंटेननर हर महीने जोखिम और कठिन परिश्रम भत्ता (हार्ड ड्यूटी अलाउंस) भी उठा रहे हैं। रेलवे ट्रैक पर तैनात न होकर भी इस भत्ते का भुगतान पाना सीधे तौर पर रेलवे बोर्ड के नियमों का उल्लंघन और जनधन का दुरुपयोग है। और यह स्थिति पूर्व मध्य रेलवे के सभी मंडलों में है।

मंडल मुख्यालय से लेकर विभिन्न पीडब्ल्यूआई कार्यालयों में इस प्रकार की कार्यशैली से न केवल कर्मचारियों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि रेलवे के राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। सजग रेलकर्मियों ने इस मामले को रेलवे बोर्ड के संज्ञान में लाकर शीघ्र कड़ी कार्रवाई की मांग की है।