कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अवैध वेडर्स का कब्जा, यात्रियों की जान जोखिम में, वैध वेंडर्स ने की लिखित शिकायत

प्रयागराज/कानपुर: उत्तर मध्य रेलवे (#NCR), प्रयागराज मंडल का सबसे प्रमुख और व्यस्ततम ‘कानपुर सेंट्रल’ रेलवे स्टेशन हमेशा तमाम अवैध गतिविधियों के लिए चर्चित रहा है, जबकि यहां आए दिन मंडल या जोनल मुख्यालय के किसी न किसी बड़े अधिकारी का आना-जाना होता है। वर्तमान में भी यह स्टेशन व्यापक प्रशासनिक शिथिलता और अवैध वेंडिंग की गंभीर अराजकता की चपेट में है। स्टेशन के विभिन्न प्लेटफार्मों पर सुचारू रूप से कार्य कर रहे वैध खानपान और कैटरिंग स्टॉल संचालक स्थानीय सांठगांठ और अवैध वेडर्स की मनमानी से बुरी तरह त्रस्त हैं। वैध लाइसेंस धारकों को जहां एक ओर रेलवे को भारी-भरकम वार्षिक लाइसेंस शुल्क का भुगतान करना पड़ता है और खानपान की गुणवत्ता को कड़े मानक स्तरों पर बनाए रखना अनिवार्य होता है, वहीं इसके विपरीत अवैध रूप से संचालित हो रहे खोमचे और वेंडर बिना किसी वित्तीय और प्रशासनिक जवाबदेही के खुलेआम अपना समानांतर कारोबार चला रहे हैं।

प्राप्त विश्वसनीय इनपुट और स्टेशन परिसर से मिली शिकायतों के अनुसार, कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर अवैध वेंडिंग का यह संजाल जीआरपी, आरपीएफ और स्थानीय कमर्शियल स्टाफ की कथित मूक सहमति और प्रत्यक्ष मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यह अनधिकृत गतिविधि न केवल प्रतिदिन यात्रा करने वाले हजारों यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ है, बल्कि इससे भारतीय रेल को मिलने वाले गैर-किराया राजस्व (#NFR) को भी भारी क्षति पहुंच रही है। वैध कैटरिंग वेंडर्स का आरोप है कि इस संगठित कदाचार के कारण उनकी दैनिक बिक्री में भारी गिरावट आई है, जिससे उन्हें निरंतर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इस अवैध तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में कानपुर सेंट्रल पर अवैध खोमचों और अनधिकृत विक्रेताओं की बाढ़ आ गई है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, वैध खोमचों की आड़ में एक ही टोकन अथवा अनुमति पत्र का दुरुपयोग करके कई-कई अवैध सब-वेंडर चल रहे हैं और अनधिकृत खोमचे चलाए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एक विशिष्ट शिकायत में उल्लेख किया गया है कि हेमंत गुप्ता नामक एक खोमचा संचालक द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए बड़े पैमाने पर अनधिकृत काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। कथित तौर पर इस व्यवस्था को संरक्षण देने के एवज में कैटरिंग इंस्पेक्टर (सीआई) द्वारा प्रति अवैध खोमचा 50,000 रुपये प्रति माह और प्रत्येक वैध खानपान स्टॉल से 10,000 रुपये प्रति माह की अवैध कमीशन वसूली की जा रही है, जिसमें वाणिज्य विभाग के कुछ अन्य स्थानीय इंस्पेक्टरों की संलिप्तता भी सामने आ रही है।

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इससे भी अधिक चिंताजनक पहलू इन वेंडर्स की गतिविधियाँ सर्वसामान्य रेल यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा मानकों से जुड़ी हुई हैं। स्टेशन पर कार्यरत इन अवैध वेंडर्स के पास न तो कोई वैध पहचान पत्र है और न ही उचित स्वास्थ्य प्रमाण पत्र। अत्यंत गंभीर आरोपों के अनुसार, रेलवे डॉक्टरों के यहां से फर्जी मेडिकल कार्ड और फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए इन अनधिकृत आवेदनों को अग्रसारित करने के एवज में स्टेशन के हेल्थ इंस्पेक्टर द्वारा भी कथित तौर पर अवैध रूप से धन उगाही की जा रही है। खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण यात्रियों को परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की शुद्धता और स्वच्छता मापने का कोई पैमाना यहां उपलब्ध नहीं है।

लिखित साक्ष्य एवं आधिकारिक शिकायत:

हाल ही में कानपुर सेंट्रल के सात प्रमुख कैटरिंग और स्टॉल लाइसेंस धारकों (जिनमें मुख्य रूप से राधे रानी कैटरर्स-PF 4/5, संगीता जैन एंड संस-PF 8/9, एम कैटरर्स-PF 8/9, एम कैटरर्स-PF 2/3, प्रदीप कुमार जैन-PF 6/7, और केआरडी संस-PF 2/3 आदि शामिल हैं) ने 12 जून 2026 को वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (#SrDCM), प्रयागराज को एक हस्ताक्षरित लिखित शिकायत प्रेषित की है। इस पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि रेलवे के नियमों के अनुसार प्रति शिफ्ट एक टोकन पर केवल एक ही कर्मचारी को कार्य करने की अनुमति है, परंतु कुछ फ्रूट वेंडर एक ही टोकन पर तीन से चार अनधिकृत कर्मचारियों के माध्यम से अवैध रूप से स्टेशन पर फलों की बिक्री करवा रहे हैं, जो पूरी तरह नियम-विरुद्ध है।

कानपुर सेंट्रल स्टेशन के वैध कैटरिंग स्टाल लाइसेंस धारकों द्वारा की गई लिखित शिकायत!

विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपरोक्त अवैध गतिविधियाँ प्रयागराज और प्रयागराज छिवकी रेलवे स्टेशन पर भी संचालित हो रही हैं और मंडल के इन तीनों बड़े रेलवे स्टेशनों के कमर्शियल इंस्पेक्टरों के तार सीधे वाणिज्य मुख्यालय से जुड़े बताए गए हैं। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अब यह आवश्यक हो गया है कि मंडल रेल प्रबंधक (#DRM), प्रयागराज इस संगठित भ्रष्टाचार और अवैध वेंडिंग रैकेट का संज्ञान लें। रेलवे के कैटरिंग इंस्पेक्टरों, कमर्शियल इंस्पेक्टरों और हेल्थ इंस्पेक्टरों पर लगे ये आरोप बेहद संवेदनशील श्रेणी के हैं। रेल प्रशासन को इस मामले की उच्च स्तरीय विजिलेंस जांच कराकर दोषी अधिकारियों और अनधिकृत वेंडर्स के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि रेल राजस्व और यात्री सुरक्षा दोनों की रक्षा की जा सके।

अवैध गतिविधियों की रोकथाम एवं सुधार हेतु मुख्य प्रशासनिक सुझाव:

  1. बायोमेट्रिक सत्यापन एवं डिजिटल वेंडर आईडी प्रणाली: स्टेशन पर कार्यरत सभी वैध वेंडर्स और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान या फेस रिकग्निशन) उपस्थिति अनिवार्य की जानी चाहिए। प्रत्येक वेंडर को क्यूआर-कोड युक्त डिजिटल पहचान पत्र जारी किए जाएं, जिससे ऑन-ड्यूटी कमर्शियल स्टाफ या विजिलेंस टीम किसी भी समय वेंडर की प्रामाणिकता की जांच मौके पर कर सके।
  2. औचक निरीक्षण एवं स्वतंत्र विजिलेंस फ्लाइंग स्क्वाड: मंडल मुख्यालय (प्रयागराज) द्वारा समय-समय पर स्थानीय स्टाफ को बिना सूचित किए कानपुर सेंट्रल पर औचक छापेमारी की जानी चाहिए। इसके लिए एक स्वतंत्र फ्लाइंग स्क्वाड का गठन हो, जो सीधे Sr.DCM या DRM को रिपोर्ट करे, ताकि स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना खत्म हो सके।
  3. मेडिकल प्रमाणीकरण प्रक्रिया का सरलीकरण एवं ऑडिट: हेल्थ इंस्पेक्टर और रेलवे डॉक्टरों के स्तर पर जारी होने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट्स का एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए। किसी भी संदेहास्पद या अचानक बढ़े मेडिकल कार्डों की जांच के लिए समय-समय पर तृतीय-पक्ष ऑडिट सुनिश्चित किया जाए।
  4. टोकन दुरुपयोग पर सख्त आर्थिक दंड एवं लाइसेंस रद्दीकरण: यदि कोई वैध लाइसेंस धारक अपने आवंटित टोकन का दुरुपयोग करते हुए पाया जाता है या अपनी आड़ में अवैध वेंडर्स को बढ़ावा देता है, तो उस पर भारी वित्तीय जुर्माना लगाया जाना चाहिए। बार-बार उल्लंघन करने पर संबंधित स्टॉल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने का कड़ा नियम बने।
  5. सीसीटीवी निगरानी और जवाबदेही तय करना: प्लेटफार्मों पर स्थित सभी स्टॉल्स और खोमचों के आसपास की गतिविधियों की चौबीसों घंटे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से मॉनिटरिंग की जाए। यदि किसी विशेष प्लेटफार्म या शिफ्ट में अवैध वेंडिंग पाई जाती है, तो उसकी सीधी प्रशासनिक जवाबदेही संबंधित शिफ्ट के कैटरिंग इंस्पेक्टर एवं कमर्शियल इंस्पेक्टर की तय की जाए और उनके विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।

अस्वीकरण: यह लेख प्राप्त लिखित शिकायतों और स्थानीय इनपुट्स पर आधारित एक खोजी रिपोर्ट है। इसका उद्देश्य रेल प्रशासन में पारदर्शिता और यात्री हितों की रक्षा करना मात्र है। क्रमशः