संपादकीय: पुराने रेल पुलों के रखरखाव में लापरवाही पर जवाबदेही तय हो!
भारतीय रेल के हजारों पुल देश के परिवहन तंत्र की रीढ़ हैं। इन पुलों की नियमित पेंटिंग और रखरखाव केवल सौंदर्य का विषय नहीं, बल्कि लाखों लोगों की संरक्षा और सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पेंटिंग में देरी होने पर लोहे के ढ़ांचों में जंग लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे भविष्य में मरम्मत की लागत और सुरक्षा संबंधी जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं।
देशभर में जहां सैकड़ों नए रेल पुलों का निर्माण कार्य चल रहा है, वहां रेलवे को उसी निर्माण एजेंसी से आसपास के पुराने पुलों की पेंटिंग और संरक्षण का कार्य भी कराना चाहिए। इससे मशीनरी, श्रमिकों और तकनीकी संसाधनों के आवागमन पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बचाया जा सकता है तथा रखरखाव कार्य में तेजी लाई जा सकती है।
साथ ही, इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। प्रत्येक जोन में मुख्य पुल अभियंता (#CBE) तथा संबंधित फील्ड अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए कि वे उनके अधिकार क्षेत्र के सभी पुराने रेल पुलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निरीक्षण, पेंटिंग और रखरखाव सुनिश्चित करें।
यदि किसी पुल की पेंटिंग वर्षों तक लंबित रहती है या रखरखाव में लापरवाही पाई जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर तय होनी चाहिए। नियमित ऑडिट, डिजिटल मॉनिटरिंग और वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन में पुलों की स्थिति को शामिल किया जाना चाहिए। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और रखरखाव कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा।
जानकारों का मानना है कि रेलवे को एक ऐसी नीति बनानी चाहिए जिसमें नए रेल पुलों के निर्माण अनुबंधों के साथ पुराने पुलों के संरक्षण कार्य को भी जोड़ा जाए तथा इसकी निगरानी मुख्य पुल अभियंता (चीफ ब्रिज इंजीनियर) और फील्ड अधिकारियों द्वारा की जाए। इससे सरकारी धन की बचत, संसाधनों का बेहतर उपयोग और रेल संरचनाओं की समयानुसार सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
रेल प्रशासन को निश्चित रूप से यह समझना चाहिए कि पुराने रेल पुलों की समय पर पेंटिंग और रखरखाव के लिए स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है। जब तक मुख्य पुल अभियंता और फील्ड अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक कई रेल पुल उपेक्षा का शिकार होते रहेंगे। सुरक्षा, पारदर्शिता और वित्तीय दक्षता के लिए अब जवाबदेही आधारित रखरखाव व्यवस्था लागू करने का समय आ गया है।

