NFR में गहराता संकट: संस्थागत भ्रष्टाचार और शीर्ष स्तरीय संरक्षण पर वरिष्ठ अधिकारियों ने जताई गंभीर चिंता

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (#NFR) के भीतर प्रशासनिक संकट—संगठन के भीतर से नए खुलासों के बाद और गहरा गया है। एनएफआर के एक वरिष्ठ रेल अधिकारी द्वारा साझा किए गए नए इनपुट संकेत देते हैं कि मालीगांव में महाप्रबंधक का सचिवालय और मुख्य कार्यकारी विंग भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गहरे केंद्र बन गए हैं। आंतरिक सूत्रों के अनुसार, ये गतिविधियां सर्वोच्च क्षेत्रीय अधिकारियों (जीएम) के सीधे संरक्षण और आशीर्वाद के तहत फल-फूल रही हैं, जिससे रेल प्रशासन के इस नैतिक पतन पर कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों के बीच बहुत गहरी चिंता और व्याकुलता पैदा हो रही है।

नवीनतम खुलासे उन पिछली घटनाओं पर प्रकाश डालते हैं जिन्हें आंतरिक सूत्र लंबे समय से चली आ रही टालमटोल (कार्रवाई न होने) के प्रमाण के रूप में देखते हैं। आंतरिक स्रोतों द्वारा उद्धृत एक प्राथमिक उदाहरण सिलीगुड़ी के पास एक बड़ी नकदी जब्ती का मामला है, जहां राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने रांची एक्सप्रेस में बेहिसाब नकदी ले जाते समय दो रेल कर्मचारियों को हिरासत में लिया था। आंतरिक चर्चा के अनुसार, इस घटना में वर्तमान महाप्रबंधक (#GMNFR) और तत्कालीन प्रधान मुख्य यांत्रिक अभियंता (#PCME/NFR) सीधे तौर पर शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों का आरोप है कि स्थानीय कानून प्रवर्तन (पुलिस) और न्यायिक चैनलों को फेवर में लेकर और ले-देकर इस मामले को अचानक रफा-दफा कर दिया गया और जब्त की गई नकदी को सफलतापूर्वक छुड़ा लिया गया।

संसाधनों के इस सुनियोजित दुरुपयोग को एनएफआर के अन्य विभागीय मुख्यालयों के दैनिक कामकाज में भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आंतरिक व्हिसलब्लोअर्स आधिकारिक महाप्रबंधक के बंगले पर आयोजित होने वाली बेहद आलीशान और खर्चीली पार्टियों की ओर इशारा करते हैं। उनका आरोप है कि इन कार्यक्रमों का आयोजन जीएम के लंबे समय से जमे सहायक सचिव (असिस्टेंट सेक्रेटरी) और जीएम के सचिव द्वारा स्थानीय रेलवे ठेकेदारों (कॉन्ट्रैक्टर्स) से उगाही करके पानी की तरह पैसा बहाकर किया जाता है।

Advertisements

एनएफआर के वरिष्ठ संवर्ग (कैडर) के बीच चिंता और हताशा का मुख्य कारण शीर्ष निगरानी संस्थाओं द्वारा जवाबदेही की पूर्ण कमी है। आंतरिक विश्लेषकों का तर्क है कि रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (#CRB) इस तरह के खुले और बार-बार होने वाले भ्रष्टाचार की अनदेखी तब तक नहीं कर सकते, जब तक कि संबंधित अधिकारी को शीर्ष स्तर से असाधारण राजनीतिक संरक्षण प्राप्त न हो। चिंतित अधिकारियों के बीच आंतरिक आम सहमति यह है कि राजनीतिक नेतृत्व और रेलमंत्री जांच से बचने के लिए इन भ्रष्ट अधिकारियों को स्पष्ट रूप से सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं!

इस कथित संस्थागत संरक्षण के प्रत्यक्ष प्रमाण के रूप में, वरिष्ठ कर्मचारी बताते हैं कि तत्कालीन पीसीएमई के खिलाफ लोकपाल में भ्रष्टाचार का मामला आज भी लंबित होने के बावजूद उन्हें हाल ही में पदोन्नत करके एक उत्पादन इकाई का महाप्रबंधक बना दिया गया। इस तरह करप्ट सिस्टम द्वारा और बड़े पैमाने पर करप्शन को प्रेरित किया गया है। भ्रष्ट कर्मियों को पुरस्कृत करने के इस स्थापित ढ़र्रे को देखते हुए, आंतरिक व्हिसलब्लोअर्स गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहते हैं कि यदि वर्तमान महाप्रबंधक/एनएफआर को सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार मिल जाए या उन्हें रेलवे-नियंत्रित किसी संगठन या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) में कोई बड़ा पद दे दिया जाए, तो विभाग में किसी को कोई आश्चर्य नहीं होगा।

ये आंतरिक खुलासे रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच गहरे मोहभंग को दर्शाते हैं, जो खुद को केंद्रीय निगरानी तंत्र द्वारा पूरी तरह से असहाय और अकेला महसूस कर रहे हैं। इन अधिकारियों ने बड़ी कड़वाहट के साथ नोट किया कि विभिन्न क्षेत्रों से देश के सर्वोच्च कार्यकारी निगरानी कार्यालयों (पीएमओ) को बार-बार शिकायतें, व्यापक सबूत और सीधी अपीलें भेजे जाने के बावजूद, पूरा तंत्र गहरी नींद में सो रहा है, जिससे यह एनएफआर जोन सहित लगभग हर जोनल प्रशासन अभूतपूर्व नैतिक पतन की ओर बढ़ रहा है।