एक PHOD दिखा रहा रेलवे बोर्ड को उसकी औकात
रेलवे बोर्ड से जारी सारे ट्रांसफर ऑर्डर्स का तुरंत अनुपालन कराने के लिए आवश्यक है कि ट्रांसफर ऑर्डर के साथ ही संबंधित अधिकारी का स्पेयरिंग ऑर्डर भी साथ में बोर्ड से ही जारी किया जाए, वरना ऐसे ऑर्डर जारी करने का कोई औचित्य नहीं है, जिन्हें रेलवे बोर्ड लागू न करा पाए!
1 जनवरी 2026 को रेलवे बोर्ड द्वारा 22 सीनियर स्केल स्टोर्स ऑफिसर्स (#IRSS) का जेएजी में प्रमोशन-ट्रांसफर ऑर्डर नंबर E(O)III-2026/PM/01 निकाला गया था। इस ऑर्डर के क्रम संख्या 17 पर सुजीत कुमार का नाम है और उनका प्रमोशन-ट्रांसफर दक्षिण रेलवे में किया गया था, लेकिन आज लगभग 3 महीने होने जा रहे हैं, इन महाशय को दक्षिण रेलवे के लिए रिलीज नहीं किया गया।


जानकारों का कहना है कि सुजीत कुमार दानापुर मंडल में वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक (#SrDMM) के पद पर प्रिंसिपल चीफ मैटीरियल मैनेजर (#PCMM) की कृपा से बैठे हुए हैं। ये अब तक क्यों बैठे हुए हैं, ये तो पीसीएमएम या फिर जीएम ही बता सकते हैं।
उनका कहना है कि रेलवे बोर्ड के आदेश को धत्ता बताते हुए पीसीएमएम ने ट्रांसफर ऑर्डर को तीन महीने से रोक रखा है। सूत्रों का कहना है कि पीसीएमएम जल्दी ही रिटायर होने वाले हैं, ट्रांसफर ऑर्डर को डिले कर वो उक्त अधिकारी से सेवा ले रहे होंगे।
इसके अलावा उक्त ऑर्डर में क्रम संख्या एक से लेकर पंद्रह तक के सभी अधिकारियों, और क्रम संख्या 21 को भी उसी जगह उसी रेलवे में पदोन्नति और नियुक्ति दे दी गई। जबकि ऑन-प्रमोशन ट्रांसफर सुनिश्चित किए जाने पर जोर होना चाहिए, क्योंकि यहीं से सिस्टम की डंपिंग शुरू होती है और यहीं से युवा अधिकारियों को करप्ट बनाने की ट्रेनिंग भी दी जाने लगती है।
रेलमंत्री और सीआरबी के स्पष्ट आदेश के बावजूद अधिकारियों के रेलवे बोर्ड से हुए ट्रांसफर को रोके रखने की क्या कीमत होगी, इसका अंदाजा लगाना बहुत कठिन नहीं है। इस तरह के कई ऑर्डर ईसीआर में विभाग प्रमुखों के स्तर पर लंबित हैं, और उन पर विभाग प्रमुख कुंडली मारकर बैठे हैं, और अपनी पूजा करा रहे हैं, और चढ़ावा चढ़ रहा है।
रेलवे बोर्ड के आदेश को महीनों तक नीचे के अधिकारियों द्वारा लटका कर रखना साफ बताता है कि रेलवे बोर्ड अपनी गरिमा खो चुका है। मंत्री जी आपसे अनुरोध है रेलवे बोर्ड में बैठे अपने चापलूसों को आदेश दीजिए कि पहले वे उनके नीचे बैठे गिद्धों से मामला सेटल कर लें कि किसका ट्रांसफर करना है और किसका नहीं करना है, कम से कम इस तरह की बेइज्जती से बच जाएँगे।
मंत्री जी, रेलवे बोर्ड से जारी सारे ट्रांसफर ऑर्डर्स का तुरंत अनुपालन कराने के लिए आवश्यक है कि ट्रांसफर ऑर्डर के साथ ही संबंधित अधिकारी का स्पेयरिंग ऑर्डर भी साथ में बोर्ड से ही जारी किया जाए, वरना ऐसे ऑर्डर जारी करने का कोई औचित्य नहीं है, जिन्हें रेलवे बोर्ड लागू न करा पाए।

