कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करने वाली दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी

इन परियोजनाओं से भारतीय रेल के नेटवर्क में लगभग 192 किमी की वृद्धि होगी

इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत ₹4,474 करोड़ है और इन्हें 2030-31 तक पूरा किया जाएगा

दिल्ली (पीआईबी): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट समिति (आर्थिक मामलों की समिति) ने मंगलवार, 10 मार्च 2026 को रेल मंत्रालय की दो परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग ₹4,474 करोड़ है। इन परियोजनाओं में शामिल हैं:

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  • सैंथिया – पाकुड़ चौथी लाइन
  • संतरागाछी – खड़गपुर चौथी लाइन
     
    रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से आवाजाही में काफी सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की संचालन क्षमता और सेवा की विश्वसनीयता बेहतर होगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं रेलवे संचालन को सुचारु बनाने और भीड़भाड़ को कम करने में मदद करेंगी।
     
    ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “न्यू इंडिया” के विज़न के अनुरूप हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर (आत्मनिर्भर भारत) बनाना है। इससे क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ाना है। इससे लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर और निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।
 
ये दोनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल और झारखंड के 5 जिलों को कवर करेंगी और भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 192 किलोमीटर की वृद्धि करेंगी।

स्वीकृत मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 5,652 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी कुल आबादी करीब 1.47 करोड़ है।
इन परियोजनाओं से कई महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा, जिनमें शामिल हैं:

  • बोलपुर-शांतिनिकेतन
  • नंदीकेश्वरि मंदिर (शक्तिपीठ)
  • तारापीठ (शक्तिपीठ)
  • पटचित्र ग्राम
  • धादिका वन
  • भीमबंध वन्यजीव अभयारण्य
  • रामेश्वर कुंड

ये स्वीकृत परियोजनाएं कई महत्वपूर्ण वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं, जैसे: कोयला, पत्थर, डोलोमाइट, सीमेंट, स्लैग, जिप्सम, लोहा और इस्पात, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद (POL), कंटेनर आदि।

इन परियोजनाओं से माल ढुलाई क्षमता में लगभग 31 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) की अतिरिक्त वृद्धि होगी।

रेलवे एक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन है। इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही लगभग 6 करोड़ लीटर तेल की बचत होगी और 28 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी, जो लगभग 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।