ट्रांसफर ऑर्डर के तुरंत बाद कथित बीमारी के बहाने NRCH में ही भर्ती हो गई CBI केस में चीफ ओएस के साथ सह-आरोपी एएनओ

Northern Railway HQs

आए दिन पड़ रही सीबीआई रेड से रेलवे की छवि खराब हो रही है, इससे रेलवे में भ्रष्टाचार के मामले भी उजागर हो रहे है। इस मामले में रेलवे का शीर्ष नेतृत्व और सतर्कता विभाग दोनों कटघरे में हैं!

नॉर्दर्न रेलवे सेंट्रल हॉस्पिटल (#NRCH) में 19 फरवरी को #CBI द्वारा की गई रेड में एक चीफ ओएस दिलीप कुमार चावला और उसकी पत्नी सहायक नर्सिंग अधिकारी (#ANO) ज्योति चावला के खिलाफ सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज की गई थी। दिलीप कुमार चावला अभी तिहाड़ जेल में है और ज्योति चावला को फिरोजपुर ट्रांसफर किया गया है, लेकिन मैडम ने अपने सोर्स और पहुंच के दम पर अभी तक फिरोजपुर में ज्वाइन नहीं किया है।

सेंट्रल हॉस्पिटल के सूत्र बताते हैं कि जैसे ही ज्योति चावला को अपने ट्रांसफर का पता चला, तत्काल वह NRCH के ICU में जाकर एडमिट हो गई और डॉक्टर्स के सहयोग से अभी तक बिना किसी बड़ी बीमारी के वहीं भर्ती है।

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सुनने में आ रहा है के यूनियन के पदाधिकारियों के सहयोग से जीएम/उ.रे. से उनका यह ट्रांसफर कैंसिल कराने या फिर उन्हें दिल्ली में ही रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

जब सीबीआई जैसी बाहरी एजेंसी की कार्रवाई होती है, तब रेल प्रशासन को रोटेशन की याद आती है, बाकी समय उसके विभागीय विजिलेंस अधिकारी मस्त ऊंघते रहते हैं और वसूली में अपना हिस्सा बंटाने में लगे रहते हैं!

हॉस्पिटल स्टाफ का कहना है कि ANO ज्योति चावला एकदम स्वस्थ है, लेकिन कागजों में बीमार बनकर ट्रांसफर से बचना चाह रही है। यहां रहकर मैडम अपने किए गए कर्मों के सबूत को मिटाना चाहती हैं।

ऐसे मामले में रेल प्रशासन भी मूकदर्शक बना हुआ है। हालांकि उन्हें ट्रांसफर ऑर्डर जारी होने के तुरंत बाद 27 फरवरी को ही सेंट्रल हॉस्पिटल दिल्ली से फिरोजपुर के लिए रिलीव कर दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर बीमारी के नाम से उन्होंने रेल प्रशासन को उल्लू बना रखा है। स्टाफ का कहना है कि CBI की 15 घंटे से ज्यादा चली रेड में मैडम की तबीयत खराब नहीं हुई, लेकिन ट्रांसफर का ऑर्डर जारी होते ही मैडम बीमार पड़ जाती हैं और NRCH के ICU में जाकर एडमिट हो जाती हैं।

सीबीआई की एफआईआर में दूसरे नंबर की आरोपी हैं श्रीमती ज्योति चावला, एएनओ—पहले नंबर हैं उनके पति दिलीप कुमार चावला, चीफ ओएस/एनआरसीएच

ऐसी तिकड़मों के कारण ही रेलवे आज भ्रष्टाचार के गर्त में डूबा है, क्योंकि ऐसे लोग सिस्टम को अपनी जागीर समझते हैं और उसमें यूनियन के कई लोग उन्हें बचाने में अपना पूरा जोर लगा देते हैं जैसा इन मैडम के केस में होता दिख रहा है। सूत्रों का कहना है कि ऐसा लगता है GM/NR भी इसमें असहाय दिख रहे हैं।

हॉस्पिटल स्टाफ ने बताया कि जब जीएम एक पावरफुल कपल के भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई उपयुक्त कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं, तो बाकी भ्रष्टाचार मुक्त रेल के सपने तो मात्र सपने ही रहेंगे। एक मामूली मैडम ने एक साथ अपनी सारी बीमारियां उजागर करना शुरू कर दिया है और साथ में करप्ट सिस्टम की बीमारियों को भी उजागर कर दिया है!

हॉस्पिटल स्टाफ ने उम्मीद जताते हुए कहा कि रेल के सक्षम अधिकारी—मैडम एएनओ—जैस लोग सिस्टम को अपनी बपौती समझते हैं—को तुरंत प्रभाव से फिरोजपुर में ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए बोलेंगे और कथित बीमारी के बहाने मैडम को भी सीबीआई की जांच में बाधक नहीं बनने देंगे।

पैरामेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि NRCH में यह सोच बड़ी कॉमन है कि इस तरह के कांड के बाद कई अधिकारी तुरंत बीमार हो जाते हैं। पहले भी कई लोग ऐसी ही जोड़तोड़ से अपने ट्रांसफर रुकवाने में सफल रहे हैं, जिसमें सबसे बड़ी कर्मकांडी डॉ रुष्मा टंडन भी शामिल रही हैं।

स्टाफ ने बताया कि डॉ रुष्मा टंडन ने भी अपने पहले के कई ट्रांसफर इसी तरह से रुकवाए थे और वह आज भी लंबे समय से इसी अस्पताल (NRCH) में डायरेक्टर के तौर पर कार्यरत हैं। ये सारा भ्रष्टाचार उन्हीं के कार्यकाल में हो रहा था। ANO ज्योति चावला को भी उन्हीं का वरदहस्त प्राप्त है, इसलिए वह आराम से उनके संरक्षण में बीमारी का बहाना बनाकर यहीं एडमिट हैं। क्रमशः