रेलवे ने माल ढुलाई में बनाया नया रिकॉर्ड
एक ही दिन में 892 ट्रेनों का इंटरचेंज
डीएफसी ने परिचालन दक्षता में नया मानक स्थापित किया
दिल्ली (पीआईबी): भारतीय रेल देश में माल परिवहन की नई परिभाषा गढ़ रही है और तेज, भरोसेमंद एवं किफायती एंड-टू-एंड रेल फ्रेट समाधान के माध्यम से माल ढुलाई में नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्नत अवसंरचना, उच्च-क्षमता कॉरिडोर और आधुनिक परिचालन प्रणालियों के संयोजन से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (#DFC) नेटवर्क देशभर में माल की कुशल आवाजाही सुनिश्चित कर रहा है, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आ रही है।
उच्च घनत्व वाले माल परिचालन की अपनी निरंतर परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (#DFCCIL) ने DFC नेटवर्क पर अब तक का सबसे अधिक ट्रेन इंटरचेंज कर परिचालन दक्षता का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
रविवार, 5 जनवरी 2026 को DFC नेटवर्क और भारतीय रेल के पाँच जोनों के बीच एक ही दिन में कुल 892 ‘इंटरचेंज’ ट्रेनें संचालित की गईं। इससे पहले का रिकॉर्ड 4 जनवरी 2026 को 865 ट्रेनें था।
रिकॉर्ड माल इंटरचेंज से पारंपरिक रेल लाइनों पर भीड़ कम हो रही है, जिससे यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक समय पर और आरामदायक हो रहा है तथा दैनिक यात्रियों को होने वाली देरी भी घट रही है।
इसके साथ ही, यह उद्योगों की आर्थिक वृद्धि में सहायक है और आम नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की तेज आपूर्ति और कम लॉजिस्टिक्स लागत का लाभ मिल रहा है।
यह उपलब्धि DFCCIL की बढ़ती परिचालन क्षमता, मजबूत योजना ढ़ाँचे और प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन प्रणालियों को दर्शाती है। यह सफलता ट्रेन गति के बेहतर नियमन, सुरक्षित हेडवे बनाए रखने और पड़ोसी स्टेशनों के बीच घनिष्ठ समन्वय से संभव हुई, जिससे भारी लोड वाले सेक्शनों पर भी सुरक्षित, ईंधन-कुशल और निर्बाध परिचालन सुनिश्चित किया जा सका।
आधुनिक ट्रेन शेड्यूलिंग टूल्स, रियल-टाइम ट्रैफिक मॉनिटरिंग, स्वचालित सिग्नलिंग, डिजिटल कंट्रोल रूम और कड़े सुरक्षा मानकों ने इस प्रदर्शन को और मजबूत बनाया। सेंट्रल कंट्रोल ने सभी ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर्स और ज़ोनल कंट्रोल कार्यालयों से मिले इनपुट के आधार पर नेटवर्क स्तर पर योजना और निगरानी सुनिश्चित की, जिससे पूरे नेटवर्क में सुचारू संचालन संभव हुआ।
उच्च-शक्ति वाले इंजनों ने लंबी और भारी मालगाड़ियों को अधिक औसत गति से खींचने में अहम भूमिका निभाई, जबकि लोको पायलट, सहायक लोको पायलट और ट्रेन प्रबंधकों के बीच मजबूत समन्वय से पूरे दिन सतर्क, अनुशासित और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित हुआ। मजबूत फीडर रूट और कुशल यार्ड प्रबंधन से ट्रेनों की रोक-ठहराव कम हुई, जिससे तेज़ प्रवेश-निकास और समय पर माल निकासी संभव हो सकी।
यह रिकॉर्ड भारत की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है, जिससे कोयला, सीमेंट, कंटेनर और कृषि उत्पादों की तेज़, सुरक्षित और अधिक भरोसेमंद ढुलाई संभव हो रही है, साथ ही पारंपरिक रेल नेटवर्क पर भीड़ भी कम हो रही है।
DFC नेटवर्क पर हाल के अन्य उच्च इंटरचेंज वाले दिन इस प्रकार रहे हैं:
- 30 मार्च 2025 — 846 ट्रेनें
- 14 सितंबर 2025 — 830 ट्रेनें
- 31 मार्च 2025 — 820 ट्रेनें
- 3 जनवरी 2026 — 812 ट्रेनें
- 25 मई 2025 — 808 ट्रेनें
यह आँकड़े उच्च घनत्व वाले माल परिचालन की निरंतर प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
जहाँ भारतीय रेलवे लाखों यात्रियों को सुरक्षित और समय पर उनके गंतव्य तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है, वहीं वह उच्च-घनत्व माल परिचालन को भी पूरी सुरक्षा, गति और विश्वसनीयता के साथ संभालने में सक्षम है। आधुनिक इंजनों, डिजिटल निगरानी और सुव्यवस्थित यार्ड व फीडर प्रबंधन के माध्यम से DFC नेटवर्क आवश्यक वस्तुओं की तेज ढुलाई सुनिश्चित कर रहा है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला मजबूत, लॉजिस्टिक्स लागत कम और देश की अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।

