नए कोलाघाट रेलवे पुल से संरक्षा में वृद्धि और रेल परिचालन होगा अधिक सुगम
कोलकाता, 24 दिसंबर, 2025: दक्षिण पूर्व रेलवे, खड़गपुर मंडल के हावड़ा–खड़गपुर खंड में उपनगरीय सेक्शन की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से रुपनारायण नदी पर एक नए रेल पुल का निर्माण कर रहा है। यह अत्याधुनिक नया पुल, पुराने कोलाघाट पुल संख्या–57 का स्थान लेगा, जिस पर वर्तमान में मिडिल लाइन एवं डाउन मेन लाइन संचालित हो रही हैं। यह पुल देउलटि एवं कोलाघाट स्टेशनों के बीच स्थित है।
आवश्यकता
पुराना कोलाघाट पुल वर्ष 1900 में चालू किया गया था और पिछले 125 वर्षों से दक्षिण पूर्व रेलवे की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में हावड़ा एवं कोलकाता क्षेत्र को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता रहा है। 804 मीटर लंबा यह प्रतिष्ठित स्टील गर्डर पुल अब अपनी निर्धारित तकनीकी (कोडल) आयु पूरी कर चुका है, अतः इसके प्रतिस्थापन की आवश्यकता है।
नए पुल की योजना
- ₹481.11 करोड़ की लागत से डाउन मेन एवं मिडिल लाइनों को सम्मिलित करते हुए नए पुल का निर्माण किया जाएगा।
- वायाडक्ट सहित यह पुल कंपोजिट एवं ओपन वेब गर्डर संरचना का संयोजन होगा।
- इस परियोजना के अंतर्गत कोलाघाट स्टेशन का विकास भी किया जाएगा, जिसमें परिवर्तित संरेखण (डाइवर्टेड एलाइन्मेंट) पर उन्नत (एलीवेटेड) प्लेटफार्मों का निर्माण शामिल है।
- यह नया पुल वर्ष 2027 के अंत तक चालू होने की संभावना है तथा आगामी कम से कम 100 वर्षों तक सेवा में रहेगा।
वर्तमान परिचालन संबंधी बाधाएँ
- नए पुल के निर्माण तथा पुराने पुल की सेवा-आयु समाप्त होने के कारण दक्षिण पूर्व रेलवे के अत्यंत व्यस्त हावड़ा–खड़गपुर खंड में ट्रेन परिचालन पर कुछ प्रभाव पड़ा है। वर्तमान में पुराने पुल पर डाउन मेन लाइन से मालगाड़ियों तथा अधिकांश मेल/एक्सप्रेस एवं यात्री ट्रेनों का संचालन प्रतिबंधित है।
- फलस्वरूप सभी डाउन दिशा की ट्रेनें, जिनमें संपूर्ण मालगाड़ी, मेल/एक्सप्रेस, अन्य यात्री ट्रेनें एवं उपनगरीय लोकल ट्रेनें शामिल हैं, मुख्यतः मिडिल लाइन से संचालित की जा रही हैं, जिससे डाउन मेन लाइन पर यातायात दबाव बढ़ गया है। केवल कुछ यात्री ट्रेनों को 30 किमी प्रति घंटा की गति सीमा के साथ डाउन मेन लाइन से चलने की अनुमति है।
- तीन लाइनों वाले इस खंड में पुल पर केवल दो लाइनों के उपयोग से संकीर्णता (बॉटलनेक) उत्पन्न होती है, जिससे व्यस्त समय में यातायात जाम की स्थिति बनती है।
- मिडिल लाइन में रिवर्सिबल सिग्नलिंग की व्यवस्था होने के कारण सभी डाउन ट्रेनों को उसी लाइन से चलाने हेतु पुल के दोनों सिरों पर स्थित स्टेशनों पर जटिल परिचालनात्मक विचलन करने पड़ते हैं। इन अतिरिक्त गतिविधियों से खंड में भीड़ बढ़ती है और ट्रेनों के परिचालन में विलंब होता है।
निष्कर्ष
वर्तमान में ट्रेनों के सुरक्षित एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। नए पुल का निर्माण न केवल रेलवे सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ट्रेन परिचालन में गतिशीलता बढ़ाने के साथ-साथ यात्रियों को अधिक सुविधाजनक एवं आरामदायक यात्रा अनुभव भी प्रदान करेगा।
फोटो परिचय: नए कोलाघाट रेलवे पुल के निर्माण कार्य की प्रगति।

