प्रशासनिक नेतृत्व के विकास में लोकतांत्रिक सुधार की आवश्यकता!

भारतीय रेल—देश की सबसे बड़ी तकनीकी–प्रशासनिक संस्था है, जहाँ लिए गए सभी निर्णय—संरक्षा, सुरक्षा, सार्वजनिक संपत्ति और राष्ट्रीय विकास से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में नेतृत्व के चयन की प्रक्रिया जितनी पारदर्शी, निष्पक्ष और सहभागी होगी, संस्था उतनी ही मजबूत और भरोसेमंद बनेगी।

समय की मांग है कि अंग्रेजों की आदेश आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को तिलांजलि दे दी जाए। हर व्यवस्था में अनुशासन की अनिवार्यता के लिए आदेश का अनुपालन आवश्यक है, तथापि इसके साथ ही प्रोफेशनलिज्म को अनदेखा नहीं किया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि प्रशासनिक स्तर पर नेतृत्व में बैलेंस बनाया जाए।

वर्तमान व्यवस्था में रेलवे के शीर्ष पदों—जैसे जोनल जनरल मैनेजर (#GM), चेयरमैन/रेलवे बोर्ड (#CRB) और रेलवे बोर्ड के सदस्यों—का चयन सीमित दायरे में होता है। इससे निर्णय-प्रक्रिया में केंद्रीकरण बढ़ता है और जवाबदेही कमजोर पड़ती है।

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लीडरशिप चयन में सहभागी मॉडल

जोनल रेलवे का जनरल मैनेजर—जोन का सर्वोच्च कार्यकारी होता है। इसलिए यह सुझाव सामने आया है कि संबंधित जोन के सभी अधिकारियों जैसे CAO, PHOD और DRM को अपने GM की सालाना व्यक्तिगत कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट (#APAR) लिखने का अधिकार दिया जाए। यही अधिकार डिवीजन के सभी ब्रांच अफसरों (#BOs) को अपने DRM की APAR लिखने का होना चाहिए।

इससे जोनों और डिवीजनों के नेतृत्व को जमीनी अनुभव, संस्थागत विश्वास और पेशेवर स्वीकार्यता के साथ समकक्ष व्यवहार्यता मिलेगी।

CRB के लिए जोन की आवाज

चेयरमैन/रेलवे बोर्ड—पूरे भारतीय रेल नेटवर्क की दिशा तय करता है। ऐसे में सभी जोनों के महाप्रबंधकों को चेयरमैन/रेलवे बोर्ड के छमाही कार्य मूल्यांकन का अधिकार दिए जाने से नीतियाँ वास्तविकता धरातल से अधिक जुड़ेंगी और शीर्ष स्तर पर संतुलित दृष्टिकोण विकसित होगा।

बोर्ड मेंबर्स के लिए मातहतों की आवाज

इंजीनियरिंग, मैकेनिकल-इलेक्ट्रिकल, ट्रैफिक और फाइनेंस जैसे विभागों के बोर्ड मेंबर्स के लिए संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी उनके कार्य-व्यवहार का छमाही मूल्यांकन करने का अधिकार विचारणीय है। इससे उनकी डोमेन-विशेषज्ञता, मेरिट और उत्तरदायित्व को न केवल बढ़ावा मिलेगा, बल्कि उनके बीच एक प्रोफेशनल जवाबदेही बनेगी।

इसी तरह नीचे स्तर पर सीनियर सबॉर्डिनेट्स (फील्ड सुपरवाइजर्स) की सालाना कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट उनके मातहत कर्मचारियों से भरवाए जाने का प्रयोग भी किया जाना चाहिए, इससे उनके दैनंदिन कार्य व्यवहार और मातहतों के शोषण को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता मिल सकती है!

भ्रष्टाचार पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोक्रेसी में भ्रष्टाचार अक्सर नीति निर्माण करने, फाइलें रोकने, निर्णय में देरी, चयनात्मक स्वीकृतियों और दबाव-आधारित कार्यप्रणाली के रूप में उभरता है। सहभागी और बैलेंस नेतृत्व सत्ता एवं अधिकारों के अत्यधिक केंद्रीकरण को तोड़ता है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही स्वाभाविक रूप से बढ़ती है।

निष्कर्ष

नेतृत्व के उपरोक्त तीनों स्तरों पर लोकतांत्रिक प्रशासनिक प्रणाली का समावेश प्रशासन में अनुशासन और संस्थागत सुधार का सशक्त माध्यम बन सकता है। नेतृत्व के विकास में सहभागिता से न केवल प्रोफेशनलिज्म और आपसी भरोसा बढ़ेगा, बल्कि निर्णय-प्रक्रिया अधिक नैतिक, व्यावहारिक और परिणाम-केंद्रित होगी। भारतीय रेल जैसे विशाल संगठन के लिए यह लोकतांत्रिक सुधार समय की मांग है।