उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के वित्त विभाग में डीलिंग सीटों पर तैनाती हेतु रेलवे बोर्ड की कार्यकाल नीति का उल्लंघन
रेलवे बोर्ड द्वारा संवेदनशील पदों पर कर्मचारियों/अधिकारियों की तैनाती के संबंध में निर्धारित कार्यकाल (#Tenure) नीति के उल्लंघन की गंभीर स्थिति उत्तर रेलवे, लखनऊ मंडल के वित्त विभाग में स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है।
नीति उल्लंघन का विवरण
नीतिगत प्रावधान: रेलवे बोर्ड की स्थापित कार्यकाल नीति के अनुसार, ठेकेदार डीलिंग (Contractor Dealing) से संबंधित संवेदनशील पदों पर किसी भी अधिकारी/कर्मचारी का अधिकतम कार्यकाल चार (4) वर्ष निर्धारित है। इस प्रावधान का उद्देश्य पीरियोडिकल #Rotation सुनिश्चित करना तथा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना है।
अनियमितताएँ: इसके विपरीत, मंडल स्तर पर इस नीति का अनुपालन केवल औपचारिक रूप में किया जा रहा है। आवधिक स्थानांतरण (Periodical Transfers) के दौरान, सीट परिवर्तन को मात्र एक दिखावा बना दिया गया है। कर्मचारियों/अधिकारियों को नाममात्र के लिए विभिन्न अनुभागों (यथा: व्यय, वित्त) में स्थानांतरित दर्शाया जाता है, जबकि उनका वास्तविक कार्यक्षेत्र और कार्यभार पूर्ववत ठेकेदार/विक्रेता डीलिंग से ही संबंधित रहता है।
विशिष्ट उदाहरण: यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब विशेष स्टाफ सदस्यों को लंबे समय से इन संवेदनशील कार्यों पर बनाए रखा गया है। उदाहरण के लिए, वरिष्ठ अनुभाग अधिकारी (#SSO), जो वर्तमान में व्यय अनुभाग में कार्यरत हैं, वर्ष 2018 से निरंतर ठेकेदार डीलिंग से संबंधित कार्यभार संभाल रहे हैं, ऐसे ही कई अन्य अनुभाग अधिकारी (SSOs) भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
प्रणालीगत विफलता: यह विसंगति मंडल स्तर पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारी यूनियनों की कथित मिलीभगत को दर्शाती है, जिसके परिणामस्वरूप इच्छित स्टाफ सदस्यों को संवेदनशील पदों पर बनाए रखने के लिए कार्यकाल नीति का उल्लंघन किया जा रहा है।
यह स्थिति स्पष्ट रूप से नीतिगत उल्लंघन, प्रणालीगत अक्षमता और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इंगित करती है। अतः रेलवे बोर्ड की कार्यकाल नीति का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा उपरोक्त विशिष्ट उदाहरणों सहित समस्त अनियमितताओं की तत्काल जांच एवं प्रभावी हस्तक्षेप आवश्यक है।
साभार: सोशल मीडिया

