रेलवे बोर्ड एकाउंट्स डायरेक्टोरेट के कारनामे!
कोर्ट के आदेश के बावजूद भी रेलवे बोर्ड से रिटायर्ड HAG, SAG लेवल का वेतन, पेंशन और वेतन निर्धारण पेंडिंग !
रेलवे बोर्ड ने #CAT के 31.05.2016 (OA No. 591/ 2009 और OA No. 2981/2009 के निर्णय को मानते हुए 5 अगस्त 2024 को पूरे रेलवे बोर्ड सेक्रेट्रिएट सर्विस (#RBSS) की रिवाइज्ड सीनियरिटी लिस्ट पब्लिश की थी और फिर 14 अक्टूबर, 2024 को सभी ग्रेड में पे-फिक्सेशन एरियर के साथ इंप्लीमेंटेशन का ऑर्डर भी दिया था।
इसमें सर्विंग और रिटायर्ड के बीच कोई भेदभाव नहीं किया गया था। लेकिन बोर्ड के एकाउंट्स डायरेक्टोरेट ने—जो अधिकारी बोर्ड में फिलहाल 10 अधिकारी सर्विस में हैं—उनके तो पे-फिक्सेशन, एरियर सब कुछ कर दिया। उनके नाम है: प्रेम सिंह मीणा, दहिया, सुनील कुमार सिंह, मनोज कुमार, सुधीर कुमार, टी श्रीनिवास, रवि शेखर, प्रिया सुदर्शनी, किरण। एकाउंट्स डिपार्टमेंट को शाबाशी ! धन्यवाद !!
लेकिन कुछ का कहना है कि एकाउंट्स डिपार्टमेंट ने इसलिए यह तुरंत किया, क्योंकि उनसे उनका रोज मतलब पड़ता है और भी अगड़म बगड़म आदि! दो रिटायर लोगों का भी सब कुछ भुगतान कर दिया—सुनील कुमार और मनीष कुमार— यह कोर्ट ऑर्डर का उल्लंघन करते हुए पिक एंड चूज हुआ और बाकी लोगों को पुनः कोर्ट में जाने तथा रेलवे के विरुद्ध कोर्ट की मानहानि का मामला दर्ज कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
सरकारी पैसा बर्बाद करने का ज्वलंत उदाहरण!
रिटायर्ड आठ लोग—प्रेमपाल शर्मा, हिमाद्री, महाराणा, बी. मजूमदार, आर मीणा, सुनील अग्रवाल, डी. वी. राव—बार-बार शराफत से बोर्ड से अनुरोध—रिमाइंडर और मीटिंग—कर चुके हैं और हर बार उनको झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं!
बोर्ड और मंत्री के स्पष्ट आदेश के बावजूद एकाउंट्स डिपार्टमेंट के लोगों ने ऐसा गणित/नियम कहां से सीखा—जो रिटायर्ड और सर्विस वालों के बीच भेदभाव कर दिया?
सभी रिटायर्ड लोगों से तीन बार लिखित में अंडरटेकिंग भी ले ली कि भविष्य में कोई रिवर्स कोर्ट का आदेश आया तो हम सारा पैसा वापस कर देंगे। और ऐसा तो सर्विंग और रिटायर्ड सभी के लिए लागू होगा।
एकाउंट्स अधिकारियों के बहाने—वो छुट्टी पर है—कभी दशहरा—कभी डीए का एरियर बनाना है, सैलरी बनानी है। कभी दिवाली! अब दिवाली भी बिना भुगतान के गई। बाबूगीरी-लालफीताशाही के सौ बहाने!
14 अक्टूबर 2024 से लेकर अब तक पूरा एक साल निकल गया? परंतु फिर वही ढ़ाक के तीन पात! रेलरत्न श्रीधरन जी इसीलिए कहा करते थे—एक दिन भी फाइल रखने पर बाबुओं पर जुर्माना होना चाहिए!
आश्चर्य की बात यह है कि एकाउंट्स कर्मी मेंबर फाइनेंस, सेक्रेटरी रेलवे बोर्ड की भी बात नहीं सुन रहे! मजबूर होकर कुछ लोग पीएमओ और डिपार्मेंट ऑफ पर्सनल पेंशन एंड पब्लिक ग्रीवेंस का फोरम भी तलाशने लगे हैं।
यह रिटायर्ड लोग उम्मीद पर जिंदा है! पूरे देश की तरह! शुभ दीपावली! रेलवे बोर्ड के एकाउंट्स कर्मियों को विशेष रूप से!

