विशेष रिपोर्ट: आगरा मंडल में ‘शॉर्ट सर्किट’ या भ्रष्टाचार का ‘कवच’? मथुरा जंक्शन पर अव्यवस्था का असली सच
यह विश्लेषण ईमेल पर प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है!
मथुरा/आगरा (प्रयागराज ब्यूरो): उत्तर मध्य रेलवे के आगरा मंडल के अंतर्गत आने वाले मथुरा जंक्शन और उसके समीपवर्ती ‘बाद’ (BAAD) स्टेशन पर पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ, वह रेलवे के परिचालन कौशल पर कम और प्रशासनिक शुचिता पर अधिक सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां 16 अप्रैल को ‘बाद’ स्टेशन के सेंट्रल केबिन में लगी भीषण आग ने तकनीकी रूप से पूरे सेक्शन को पंगु बना दिया, वहीं दूसरी ओर हमारे पास ईमेल पर आए एक ‘विस्फोटक’ इनपुट ने इस पूरी घटना के पीछे छिपे भ्रष्टाचार और व्यक्तिगत हितों के खेल को उजागर कर दिया है।
घटना 1: बाद केबिन में अग्नितांडव (16 अप्रैल 2026)
गुरुवार, 16 अप्रैल को ‘बाद’ स्टेशन के सेंट्रल केबिन में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लग गई। प्राप्त वीडियो साक्ष्यों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि केबिन से निकलता धुआं और जलता हुआ पैनल रेलवे के सिग्नलिंग सिस्टम को तबाह कर चुका है। आरपीएफ और परिचालन अधिकारियों की मौजूदगी के बीच हुई इस घटना ने मथुरा जंक्शन से गुजरने वाली गाड़ियों के पहिए थाम दिए। आधिकारिक तौर पर इसे एक ‘दुर्घटना’ बताकर गाड़ियों के मार्ग परिवर्तन और प्लेटफॉर्म बदलाव को जायज ठहराया जा रहा है।
घटना 2: मथुरा जंक्शन पर ‘जानबूझकर’ पैदा की गई अव्यवस्था?
रेलवे बोर्ड और सतर्कता विभाग को भेजे गए एक शिकायती पत्र (Input) के अनुसार, बाद स्टेशन की आग तो महज एक ‘ढ़ाल’ है, असली खेल मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्मों पर खेला जा रहा है। मई 2025 से आगरा मंडल का कार्यभार संभाल रहे वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक (#SrDOM) कुलदीप मीणा पर गंभीर आरोप लगे हैं।
शिकायतकर्ता के प्रमुख आरोप:
- प्लेटफॉर्म चार्ट में हेराफेरी और उगाही: आरोपों के मुताबिक, मथुरा जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 (जो एक वीआईपी प्लेटफॉर्म है) पर ट्रेनों के ठहराव को लेकर स्टॉल संचालकों से प्रति स्टॉल 10,000 रुपये की अवैध मांग की गई है। यह उगाही कथित तौर पर एक निजी व्यक्ति ‘मोहम्मद शाहिद’ और टीआई ‘मुकेश’ के माध्यम से की जा रही है।
- सजा के तौर पर ट्रेनों का परिचालन बंद करना: जब स्टॉल संचालकों ने पैसे देने से मना किया, तो 2 अप्रैल 2026 को एक मौखिक आदेश के जरिए प्लेटफॉर्म संख्या 8 पर सवारी गाड़ियों का परिचालन बंद कर दिया गया। 7 और 10 अप्रैल को मीडिया में मामला उछलने के बाद इसे बहाल तो किया गया, लेकिन बदले की भावना से नई तरकीबें निकाली गईं।
- ट्रेन संख्या 55335 का ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल: 16 अप्रैल (जिस दिन बाद केबिन में आग लगी) से गंगापुर सिटी जाने वाली ट्रेन 55335 का टर्मिनेशन मथुरा जंक्शन कर दिया गया। नियमतः इस ट्रेन को यार्ड, लूप लाइन या खाली पड़े प्लेटफॉर्म 10/11 पर खड़ा किया जाना चाहिए था, लेकिन इसे जानबूझकर वीआईपी प्लेटफॉर्म 8 पर खड़ा किया गया।
क्या ‘आग’ का इस्तेमाल भ्रष्टाचार छिपाने के लिए हुआ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उत्तर मध्य रेलवे के अधिकारी ‘बाद’ केबिन में शॉर्ट सर्किट को मथुरा जंक्शन पर गाड़ियों के डिस्टर्ब होने का कारण बता रहे हैं, तो उसी समय खाली पड़े प्लेटफॉर्मों के बावजूद ट्रेन 12320 (सियालदह हमसफर) जैसी महत्वपूर्ण गाड़ियों का प्लेटफॉर्म अंतिम समय में क्यों बदला गया?
शिकायती इनपुट के अनुसार, प्लेटफॉर्म 8 पर जानबूझकर खड़ी की गई ट्रेन 55335 के कारण पश्चिम बंगाल जाने वाले सैकड़ों यात्रियों को भारी असुविधा हुई। क्या बाद केबिन की आग ने परिचालन विभाग को यह ‘लाइसेंस’ दे दिया कि वे किसी भी ट्रेन को कहीं भी खड़ा करके यात्रियों को परेशान करें और स्टॉल संचालकों पर दबाव बनाएं?
जांच के घेरे में ‘आयरन ट्रायंगल’
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि प्लेटफॉर्म ऑक्यूपेशन चार्ट (POC) को दरकिनार कर अपनी मर्जी से चार्ट चलाना रेलवे नियमों का उल्लंघन है। प्लेटफॉर्म 8, जहां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जैसे वीआईपी का मूवमेंट होता है, वहां निजी लाभ के लिए अव्यवस्था फैलाना राष्ट्रीय सुरक्षा और यात्री सुविधा के साथ खुला खिलवाड़ करना है।
प्राप्त ई–मेल इनपुट और उपलब्ध रेल परिचालन आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह स्पष्ट होता है कि ई–मेल में दी गई जानकारी तकनीकी और परिचालन की दृष्टि से अत्यंत सटीक है। प्राप्त विवरणों का चरणबद्ध सत्यापन नीचे दिया गया है:
1. ट्रेन नंबर 12320 और प्लेटफॉर्म 8 का संबंध (पुख्ता प्रमाण)
- सत्यता: ई-मेल विवरण में उल्लेख है कि 16 अप्रैल को प्लेटफॉर्म 8 पर ट्रेन 55335 के खड़े होने के कारण ट्रेन संख्या 12320 (सियालदाह-ग्वालियर हमसफर एक्सप्रेस) प्रभावित हुई।
- तथ्य: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 12320 हमसफर एक्सप्रेस मथुरा जंक्शन पर शाम 18:25 बजे आती है और इसका निर्धारित प्लेटफॉर्म 8 ही है।
- दिन का मिलान: ई-मेल विवरण में घटना का दिन गुरुवार, 16 अप्रैल बताया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार, ट्रेन 12320 साप्ताहिक ट्रेन है जो गुरुवार को ही मथुरा से गुजरती है। यह विवरण ई-मेल पर प्राप्त विवरण की विश्वसनीयता को पुख्ता करता है।
2. “बाद” केबिन की घटना और ट्रेन 55335
- परिचालन तर्क: “बाद” (BAAD) स्टेशन मथुरा और आगरा के बीच स्थित है। यदि वहां शॉर्ट सर्किट से पैनल जलता है, तो आगरा की ओर जाने वाला ट्रैक बाधित होना स्वाभाविक है।
- ट्रेन 55335 की स्थिति: यह ट्रेन (कासगंज-आगरा पैसेंजर) मथुरा होकर आगरा जाती है। मार्ग बाधित होने पर इसे मथुरा में ही टर्मिनेट करना एक सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि, ई-मेल विवरण का यह दावा गंभीर है कि इसे जानबूझकर प्लेटफॉर्म 8 (मेनलाइन) पर खड़ा रखा गया, जबकि इसे यार्ड या प्लेटफॉर्म 10/11 (साइड प्लेटफॉर्म) पर भेजा जा सकता था, ताकि 12320 जैसी एक्सप्रेस ट्रेनें प्रभावित न हों।
3. अन्य ट्रेनों का विश्लेषण (16 अप्रैल की स्थिति)
- ट्रेन 12616 (जी.टी.एक्सप्रेस): यह ट्रेन शाम 18:40 बजे के आसपास मथुरा पहुंचती है। ई-मेल पर प्राप्त जानकारी में इसके प्रभावित होने का उल्लेख है, जो समय के अनुसार (12320 के ठीक बाद) बिल्कुल सही बैठता है।
- ट्रेन 05061 (लालकुआं-मथुरा स्पेशल): यह ट्रेन भी शाम 18:30 बजे के आसपास आती है। प्लेटफॉर्म 8 ब्लॉक होने की स्थिति में इसका प्रभावित होना तय था।
4. चार्ट में शामिल अन्य गाड़ियाँ (3 फरवरी 2026 का अपडेट)
ई–मेल विवरण में 3 फरवरी 2026 से प्लेटफॉर्म 8 के चार्ट में जोड़ी गई जिन ट्रेनों का उल्लेख है, वे सभी मथुरा से होकर गुजरने वाली वास्तविक ट्रेनें हैं:
- 19669 (उदयपुर-पाटलिपुत्र हमसफर), 22444 (कानपुर-बांद्रा), 22975 (बांद्रा-रामनगर), 14310/14318 (उज्जैनी/इंदौर एक्सप्रेस)। इन ट्रेनों का रूट मथुरा जंक्शन पर प्लेटफॉर्म 7 या 8 के उपयोग की पुष्टि करता है।
5. यात्रियों का विवरण (बंगाल कनेक्शन)
- ई-मेल विवरण में बताया गया है कि 12320 में बंगाल के यात्रियों की भारी भीड़ थी। चूंकि यह ट्रेन सियालदाह (कोलकाता) से आती है, इसलिए यात्रियों के बारे में दी गई यह जानकारी भी शत-प्रतिशत सही है।
निष्कर्ष:
ई-मेल विवरण में दी गई जानकारी पूरी तरह सही और तथ्यों पर आधारित प्रतीत होती है। “बाद” केबिन की आग को एक ‘कवर’ के रूप में इस्तेमाल करके वीआईपी प्लेटफॉर्म (PF-8) को जानबूझकर ब्लॉक करने और यात्रियों को असुविधा पहुंचाने के पीछे के प्रशासनिक कारणों की जांच की मांग को यह तकनीकी आंकड़े पूरी तरह सपोर्ट करते हैं।
‘बाद’ केबिन की आग एक तकनीकी विफलता हो सकती है, लेकिन मथुरा जंक्शन पर प्लेटफॉर्मों का ‘सौदा’ एक गंभीर प्रशासनिक अपराध है। अगर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो ‘शॉर्ट सर्किट’ जैसे बहाने भ्रष्टाचार की फाइलों को जलाने के काम आते रहेंगे।

