कर्मठ और समर्पित नेतृत्व की एक मिसाल!
मुंबई-सोलापुर: 18 जुलाई की रात को पुणे में हॉट एक्सल के कारण छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-सोलापुर वंदे भारत एक्सप्रेस को निरस्त करना पड़ा। वंदे भारत के हॉट एक्सल को सही समय पर आइडेंफाई करके एक संभावित बड़ी दुर्घटना को बचा लिया गया।
हमें कुछ यात्रियों से आज घटनाक्रम का पता चला, जिसे हमने अपने सूत्रों से वेरीफाई किया।
जब ये पता चला कि वंदे भारत का वह रेक नहीं चल पाएगा, तब उक्त रेक को पुणे में ही निरस्त कर दिया गया और मामले से हेड क्वार्टर को अवगत कराया गया। महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने त्वरित निर्णय लेते हुए मामले पर स्पष्ट निर्देश दिए कि यात्रा सभी यात्रियों की उनके गंतव्य तक पूरी करवाई जाएगी।
इसके बाद पुणे मंडल के डीआरएम के नेतृत्व में दो घंटों में सभी यात्रियों को डेक्कन क्वीन के दूसरे रेक को तैयार करवाकर उसमें ट्रांसफर करवाया गया। आरपीएफ और कमर्शियल स्टाफ ने वृद्ध यात्रियों की सुरक्षा के साथ उतारने और चढ़ाने में सहायता भी की।
पुणे के बाद गाड़ी के दो हाल्ट और थे, कुर्दुवाड़ी-जहाँ 50 और सोलापुर-जहाँ 589 यात्री उतरे। वहीं पुणे में 841 यात्री उतरे। ध्यान रहे कि पुणे का रेलवे स्टेशन बहुत छोटा है और उसमें हमेशा बहुत भीड़ रहती है-लेकिन डीआरएम के स्टेशन पर लगातार उपस्थित रहने से सारे संसाधन समस्या के निदान में लग गए।

यात्री डेक्कन क्वीन की रेक से गंतव्य—सोलापुर—तक भेज तो दिए गए, लेकिन महाप्रबंधक ने कुछ और महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जो निम्नवत हैं-
- पुणे मंडल का कमर्शियल स्टाफ और अधिकारी हर यात्री को टिकट रिफंड का तरीका बताएँ!
- सोलापुर मंडल कुर्दुवाड़ी और सोलापुर में यात्रियों के रिफंड के लिए विशेष काउंटर लगवाए!
- डेक्कन क्वीन का रेक—जो अगले दिन सुबह 07:15 मुंबई जाता है, रीशेड्यूल नहीं होगा-रेक सही समय वापस आएगा!
- वहीं सोलापुर में एक बीस कोच का वंदे भारत रेक स्टेबल्ड है, उसे अगले दिन वंदे भारत के निर्धारित समय पर चलाया जाए-इसके लिए उसे उसके स्टेबलिंग स्टेशन से सोलापुर लाया जाए, उसकी पैसेंजर इनफार्मेशन प्रणाली को तुरंत प्रोग्राम किया जाए और उसमें यात्रियों को चढ़ाने में पूरी मदद की जाए-वंदे भारत के यात्रियों को पिछले दिन हुई घटना से कुछ प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
रात को डेक्कन क्वीन का रेक करीब एक बजे सोलापुर से वापस रवाना हुआ। वहीं, वंदे भारत का स्पेयर रेक सुबह सही समय-छह बजे सोलापुर से चलाया गया और डेक्कन क्वीन ने भी पुणे से अपने नियत समय सवा सात पर यात्रा की। बारह घंटे चले इस मिशन में मध्य रेल के वरिष्ठतम अधिकारी पूरे समय अपने अधीनस्थ अधिकारियों को गाइड करते दिखाई और सुनाई दिए।
उल्लेखनीय बात यह है कि सभी विभाग प्रमुख (#PHOD) अपने स्टाफ और अधिकारियों को लगातार गाइड करते रहे, केवल ज्ञान और निर्देश देते नहीं दिखे।

पूरी घटना की रिपोर्ट हमने हेडक्वार्टर, पुणे और सोलापुर मंडल से ली और ध्यान देने वाली उसमें निम्न बातें सामने आयीं:
- जीएम के निर्देश और रात भर की मॉनिटरिंग ने स्पष्टता दी!
- सारे अप्रूवल लाल फीते से आजाद कर दिए!
- मंडल रेल प्रबंधकों का सीधा ग्राउंड पर निर्देशन!
- #RPF और कमर्शियल विभागों का उत्कृष्ट प्रदर्शन!
- #HABD यंत्र द्वारा हॉट एक्सल को डिटेक्ट कर एक संभावित दुर्घटना से बचाव। इस यंत्र पर रेलवे बोर्ड का बहुत जोर है-इस घटना से उनके फोकस की पूरी पुष्टि होती है और यह संतोष का विषय है।
- वंदे भारत में हॉट एक्सल की बात चिंताजनक है-आशा है #RDSO इसके तह में जाएगा!
यह घटना रेलमंत्री के संज्ञान में आनी चाहिए कि कैसे सही फोकस से इतनी महत्वपूर्ण रेल सेवा में संभावित दुर्घटना को मध्य रेल के नो-नॉनसेंस महाप्रबंधक ने हैंडल किया।

हमने पंढ़रपुर मेले में, ALP के सेलेक्शन में, गैंगहट में मीटिंग करना—इत्यादि जैसे विषयों में महाप्रबंधक श्री मीणा के बारे में लिखा है कि कैसे उन्होंने कई बार सरकार की किरकिरी होने से बचाया है। पुणे में हुई इस घटना के मैनेजमेंट में तो उन्होंने फिर कुछ ऐसा कर दिखाया जो मानक है। आशा है, रेलमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय—जो रेल के काम से काफी असंतुष्ट है—इसका संज्ञान लेंगे कि रेल के सभी अधिकारी एक जैसे नहीं हैं! कमर्शियल और आरपीएफ—जिनकी हमेशा सबसे अधिक आलोचना होती है—उन्हें यदि सही और सक्षम नेतृत्व मिले तो वे ऐसे भी काम कर सकते हैं जैसा उन्होंने पंढ़रपुर और पुणे में करके दिखाया है।
हालाँकि रेल प्रशासन—वंदे भारत में हुए हॉट एक्सल की जांच तो करेगा, तथापि यह तो मानना पड़ेगा कि मशीन का फेलियर कभी-भी हो सकता है, ऐसे में रेल प्रबंधन को उपभोक्ताओं का ध्यान रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस तरह महाप्रबंधक/मध्य रेल श्री मीणा ने अपने नेतृत्व से कई मानक स्थापित किए हैं, जिसमें हमेशा ही सबसे अधिक आलोचना के पात्र रहने वाले-कमर्शियल और आरपीएफ का उत्कृष्ट काम भी अब शामिल है।

