NFIR ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रखा मांगों का चार्टर

नई दिल्ली | नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन (#NFIR) के महासचिव डॉ. एम. राघवैया ने 30 अक्टूबर, 2026 को कॉन्फ्रेंस रूम, 7वीं मंजिल, चंदर लोक बिल्डिंग, जनपथ, नई दिल्ली में आयोग के साथ हुई बैठक में 8वें वेतन आयोग को लेकर निम्नलिखित विचार रखे।

नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमैन के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने आज 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के समक्ष रेलवे कर्मचारियों की मांगें प्रस्तुत कीं। यह प्रस्तुति आयोग के अध्यक्ष, सदस्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में की गई।

NFIR के प्रतिनिधिमंडल में गुमान सिंह, अध्यक्ष; डॉ. एम. राघवैया, महासचिव; बी. सी. शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष; आर. पी. सिंह, कोषाध्यक्ष; मुनिन्द्र सैकिया, उपाध्यक्ष; आर. जी. काबर, अशोक शर्मा और प्रवीण वाजपेयी, संयुक्त महासचिव; तथा वी. गोपालकृष्णन, सहायक महासचिव शामिल थे।

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प्रतिनिधिमंडल ने वेतन संशोधन, भत्ते, करियर की प्रगति और सेवा-शर्तों से संबंधित फेडरेशन की मुख्य मांगों को आयोग के सामने रखा, जिसमें रेल कर्मचारियों के लिए एक निष्पक्ष, तर्कसंगत और बेहतर वेतन संरचना की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

NFIR द्वारा प्रस्तुत की गई प्रमुख मांगें थीं:

  1. न्यूनतम वेतन: न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये प्रति माह तय किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर: वेतन के पर्याप्त और सार्थक संशोधन को सुनिश्चित करने के लिए 3.833 का फिटमेंट फैक्टर अपनाया जाए।
  3. वार्षिक वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट): मौजूदा 3% से वार्षिक वृद्धि को बढ़ाकर 6% किया जाए, जिसमें न्यूनतम वित्तीय लाभ 10,000 रुपये हो।
  4. करियर प्रगति: ठहराव को दूर करने और सार्थक उन्नति सुनिश्चित करने के लिए एक कर्मचारी के सेवाकाल के दौरान कम से कम पांच पदोन्नति का प्रावधान किया जाए।
  5. महंगाई भत्ता (DA) का विलय: DA जब 25% तक पहुंच जाए, तो इसे मूल वेतन में शामिल कर दिया जाए।
  6. ओपन-एंडेड वेतनमान: यह सुनिश्चित करने के लिए ओपन-एंडेड वेतनमान शुरू किए जाएं कि कर्मचारियों को उनकी सेवा के दौरान उचित वित्तीय प्रगति से वंचित न होना पड़े।
  7. बेहतर वेतन संरचना: रेल कर्मचारियों के लिए एक अलग और बेहतर वेतन संरचना हो, जो रेलवे ड्यूटी की अनूठी, कठिन और अत्यंत जोखिमपूर्ण प्रकृति को विधिवत मान्यता दे।
  8. पेंशन सुधार: अंतिम प्राप्त वेतन का 67%, 50% पारिवारिक पेंशन, और पेंशन का कम्यूटेशन 15 साल के बजाय केवल 11 साल के लिए काटा जाए।
  9. भत्ते और अग्रिम: बंद किए गए सभी भत्तों को बहाल किया जाए। भत्तों को 3 गुना बढ़ाया जाए।
  10. नौकरी-विशिष्ट भत्ते: विभिन्न श्रेणियों के लिए नौकरी-विशिष्ट भत्तों पर विचार किया जाए।
  11. रनिंग अलाउंस और इंसेंटिव: इसे पिछले वेतन आयोग की तरह फेडरेशन के साथ बातचीत के माध्यम से रेल मंत्रालय द्वारा तय किया जाना चाहिए।
  12. NDA/NHA की सीमा: बिना किसी ऊपरी सीमा (सीलिंग) प्रतिबंध के इसका भुगतान किया जाए।
  13. MACPS: APAR बेंचमार्किंग को ‘बहुत अच्छा’ (Very Good) से बदलकर ‘अच्छा’ (Good) किया जाए।
  14. रेलवे पास: कर्मचारी के माता-पिता को उनके रेलवे पास में शामिल किया जाना चाहिए।

रेलकर्मी निर्वहन करते हैं असाधारण प्रकृति की जिम्मेदारियां

फेडरेशन ने इस बात पर जोर दिया कि रेल कर्मचारी असाधारण प्रकृति की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं, यात्रियों और माल ढुलाई की निर्बाध आवाजाही को बनाए रखने तथा रेल प्रणाली की सुरक्षा और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने के लिए साल के 365 दिन, दिन-रात चौबीसों घंटे काम करते हैं। उनके कर्तव्यों में अक्सर अत्यधिक खतरे, कठिन कार्य परिस्थितियां, भारी जिम्मेदारियां और दिन-प्रतिदिन के कामकाज के दौरान जोखिम शामिल होते हैं।

NFIR ने आयोग के सामने यह बात भी रखी कि रेलकर्मियों की वेतन संरचना में न केवल अन्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू होने वाले वेतन संशोधन के सामान्य सिद्धांतों को प्रतिबिंबित होना चाहिए, बल्कि रेलवे के संचालन की विशिष्ट प्रकृति, रेल कर्मचारियों द्वारा निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उनके अनिवार्य योगदान को भी शामिल किया जाना चाहिए।

8वें केंद्रीय वेतन आयोग के अध्यक्ष और अन्य अधिकारियों ने फेडरेशन द्वारा प्रस्तुत मांगों और तर्कों को धैर्यपूर्वक सुना। प्रतिनिधिमंडल ने विस्तार से अपना पक्ष रखा और आयोग से अनुरोध किया कि वह रेल कर्मचारियों की वैध अपेक्षाओं और लंबे समय से लंबित मांगों को उचित महत्व दे।

NFIR ने पूरी उम्मीद जताई कि 8वां केंद्रीय वेतन आयोग फेडरेशन के प्रस्तावों पर गंभीरता से और सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा तथा एक ऐसी वेतन संरचना की संस्तुति करेगा जो रेलकर्मियों के योगदान, कौशल, जिम्मेदारियों, कठिनाईयों और व्यावसायिक जोखिमों को उचित मान्यता देती हो।