पीएफए की प्रशासनिक मनमानी और पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली से ईसीआर में भारी असंतोष

हाजीपुर: पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के वित्त विभाग में प्रशासनिक पदों के दुरुपयोग और पक्षपातपूर्ण स्थानांतरण नीतियों को लेकर रेल कर्मियों और अधिकारियों के बीच गहरा असंतोष व्याप्त है। प्राप्त शिकायतों और अंदरूनी सूत्रों की फीडबैक के अनुसार, विभाग में नियमों को ताक पर रखकर चुनिंदा कर्मचारियों और अधिकारियों को मनचाही जगहों पर तैनात किया जा रहा है, जबकि अन्य कर्मियों को उनकी वरिष्ठता और वैध कारणों के बावजूद उपेक्षित रखा जा रहा है।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि रेलवे जैसे विशाल और संवेदनशील उपक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों का नॉन-रोटेशन (लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहना) और पारदर्शी स्थानांतरण नीति का अभाव पूरी कार्यप्रणाली को पटरी से उतार रहा है। जब प्रशासनिक कैडर में पारदर्शी रोटेशन और वरिष्ठता के मानदंडों की अनदेखी की जाती है, तो इसका सीधा असर फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के मनोबल और कार्यकुशलता पर पड़ता है। इससे पूरे सिस्टम में भाई-भतीजावाद और मनमाने फैसलों को बढ़ावा मिलता है, जिससे न केवल आंतरिक असंतोष बढ़ता है बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी कमजोर होती है।

वर्तमान मामलों में यह बात सामने आई है कि पूर्व जीएम के निर्देशों के तहत हटाए गए लंबे समय से एक ही जगह जमे लेखा विभाग के कर्मचारियों को पुनः चुनिंदा स्थानों अथवा उनकी मनपसंद पोस्टों पर वापस लाया गया है। इसके विपरीत, गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं या सेवानिवृत्ति के करीब होने जैसे वैध और मानवीय आधार पर स्थानांतरण या राहत चाहने वाले अन्य अधिकारियों के मामलों में अपेक्षित नरमी या न्यायसंगत रुख नहीं अपनाया जा रहा है। एक तरफ चुनिंदा लोगों को पटना, दानापुर और सोनपुर जैसे सुविधाजनक मंडलों में घुमाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जरूरतमंद कर्मियों की अनदेखी की जा रही है।

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कर्मचारियों और कनिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वे भारी मानसिक दबाव और अनावश्यक अनुशासनिक कार्रवाई के भय के वातावरण में काम करने को विवश हैं। स्थानीय स्तर पर यूनियनें और प्रतिनिधि संगठन भी इस मनमानी के आगे बेअसर साबित हो रहे हैं। इस प्रकार की कार्यशैली से रेलवे बोर्ड की नीतिगत मंशा और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़े प्रश्न खड़े होते हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि रेलवे बोर्ड और वित्त सदस्य (मेम्बर फाइनेंस) स्तर पर इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया जाए। जब तक प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों के कार्यों की निष्पक्ष समीक्षा कर सख्त रोटेशन नीति और पारदर्शी पदस्थापना के नियम लागू नहीं किए जाते, तब तक कर्मचारियों में व्याप्त अविश्वास और असंतोष को दूर करना कठिन होगा। रेल प्रशासन को चाहिए कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी संवर्गों के लिए समान नियम सुनिश्चित करे, ताकि संस्थागत शुचिता और कर्मचारियों का मनोबल सुरक्षित रह सके।