DFCCIL और NHAI परियोजनाओं में खनन रॉयल्टी एवं सरकारी राजस्व के स्वतंत्र ऑडिट और जांच की माँग
नई दिल्ली: देश भर में चल रहे वृहद राजमार्गों (#Highways) और रेल कॉरिडोरों (#RailCorridors) के निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्रियों की वैधता और खनन रॉयल्टी भुगतान पर प्रश्न उठने लगे हैं। सार्वजनिक हित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे के तहत राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात में विभिन्न परियोजनाओं के दौरान खपत हुई निर्माण सामग्री—जैसे मिट्टी, ब्लैंकेटिंग मटेरियल, GSB, WMM, रेलवे गिट्टी (Ballast), रोड़ी और बजरी—के संबंध में संबंधित राज्यों को मिले खनन एवं रॉयल्टी राजस्व का स्वतंत्र ऑडिट कराने की जोरदार माँग उठी है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, ठेकेदार या संस्था को बिना सत्यापित प्रमाण के दोषी ठहराना नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के इन प्रोजेक्ट्स में पूर्ण पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक राजस्व (#PublicMoney) की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
परियोजना-वार जाँच के प्रमुख बिंदु
विभिन्न जनहित मंचों और जानकारों द्वारा उठाई गई इस माँग के तहत निम्नलिखित मुख्य बिन्दुओं पर गहन जाँच और रिकॉर्ड मिलान की आवश्यकता जताई गई है:
- स्वीकृत मात्रा बनाम वास्तविक खपत: संबंधित परियोजनाओं में निर्माण सामग्री की कुल स्वीकृत मात्रा, वास्तविक खपत और साइट पर हुई कुल आपूर्ति का विस्तृत विवरण।
- कानूनी अनुपालन और ट्रांजिट पास: जहाँ भी कानूनी रूप से आवश्यक था, वहाँ खनन रॉयल्टी, ई-रवन्ना (e-Ravanna) और ट्रांजिट पास के वैध रिकॉर्ड्स की उपलब्धता।
- दस्तावेजों का मिलान: ठेकेदारों के बिल, सामग्री आपूर्ति के चालान और संबंधित राज्यों के खनन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड का क्रॉस-वेरिफिकेशन।
- राजस्व नुकसान के संकेत: क्या किसी परियोजना विशेष में अवैध खनन या रॉयल्टी भुगतान में कमी के कारण सरकारी खजाने को संभावित नुकसान पहुँचा है?
- जिम्मेदारी और वसूली: यदि जाँच के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या चूक प्रमाणित होती है, तो संबंधित नियमों के तहत जवाबदेही तय कर नियमानुसार वसूली और कानूनी कार्रवाई की जाए।
प्रमुख जाँच एजेंसियों और सरकारों से अपील
इस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा के लिए देश की शीर्ष संस्थाओं और संबंधित राज्य सरकारों से गंभीर कदम उठाने की अपील की गई है:
- CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग): अपने वैधानिक अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की जाँच या उचित निगरानी सुनिश्चित करे।
- CBI (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो): अपने अधिकार क्षेत्र एवं लागू कानूनी प्रावधानों के अधीन, पर्याप्त आधार मिलने पर संबंधित आरोपों की जाँच पर विचार करे।
- संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री (राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा और गुजरात): अपने-अपने राज्यों के संबंधित विभागों से खनन एवं रॉयल्टी राजस्व की मौजूदा स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा कराएँ।
- राज्य खनन विभाग एवं भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियाँ (ACB): खनन अनुमतियों, परिवहन दस्तावेजों, रॉयल्टी भुगतान और राजस्व घाटे की संभावनाओं की स्वतंत्र जाँच करें।
- CAG (भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक) एवं ऑडिट प्राधिकरण: अपने वैधानिक अधिकार क्षेत्र के अनुसार सार्वजनिक राजस्व और बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के रिकॉर्ड्स की समीक्षा करें।
- परियोजना एजेंसियाँ (DFCCIL, IRCON, RVNL, रेलवे एवं NHAI): लागू नियमों के तहत सामग्री आपूर्ति, गुणवत्ता, बिलिंग और अनुपालन रिकॉर्ड्स की आंतरिक और स्वतंत्र जाँच करवाएँ।
जनहित में मुख्य माँग
इस पूरी मुहिम का मूल ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि देश के बुनियादी ढाँचे (#Infrastructure) के विकास के साथ-साथ राज्य सरकारों के खनन राजस्व की भी पूरी सुरक्षा हो। जनहित में यह माँग की गई है कि निर्माण सामग्रियों की कुल मात्रा, उनके वैध स्रोतों और जमा की गई रॉयल्टी का परियोजना-वार सत्यापन किया जाए तथा इसके निष्कर्षों को कानून के दायरे में सार्वजनिक किया जाए।
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