म्यूचुअल ट्रांसफर में तकनीकी बदलाव से बढ़ीं रेलकर्मियों की मुश्किलें, IRMT 1.0 से V-2 में माइग्रेशन पर सारा श्रम व्यर्थ

इंटर-रेलवे म्यूचुअल ट्रांसफर (आपसी स्थानांतरण) के लिए आवेदन करने वाले रेल कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुराने आईआरएमटी 1.0 (#IRMT 1.0) सॉफ्टवेयर से नए यूडीआईटी/आईआरएमटी वी-2 (#UDIT/IRMT V2) मॉड्यूल में डेटा माइग्रेशन के कारण लगभग एक साल से प्रक्रियाधीन मामला फिर से आरंभिक स्तर पर पहुंच गया है, जिससे कर्मचारियों में असमंजस और चिंता व्याप्त हो गई है।

एक साल की मेहनत पर फिरा पानी

मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली मंडल और झांसी मंडल के कर्मचारियों के बीच आपसी स्थानांतरण का यह प्रकरण पिछले एक साल से प्रक्रिया में था। दोनों कर्मचारियों ने सभी आवश्यक सहमति दे दी थी और फाइल प्रशासनिक अनुमोदन के कई चरण पार करते हुए दिल्ली मंडल से आगे बढ़कर झांसी मंडल तक पहुंच चुकी थी।

लेकिन, जैसे ही इस प्रकरण को नए तकनीकी मॉड्यूल में माइग्रेट किया गया, यह बताया गया कि आवेदन को अब दोबारा दिल्ली मंडल से नए सिरे से प्रोसेस करना होगा।

Advertisements

कर्मचारियों का कहना है कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है, फिर भी सिस्टम बदलने की तकनीकी खामी के कारण उन्हें एक साल पुरानी स्थिति में धकेल दिया गया है।

कर्मचारियों और यूनियनों के मुख्य प्रश्न

इस मामले को लेकर रेल प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने और तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठाई गई है:

  • क्या पुराने सिस्टम से माइग्रेट हुए लंबित मामलों को नए सिस्टम में अनिवार्य रूप से शून्य से आरंभ करना होगा?
  • क्या पुराने सिस्टम में पहले से पूरे हो चुके अनुमोदन चरणों को नए सिस्टम में कैरी फॉरवर्ड (मान्य) नहीं किया जा सकता?
  • क्या ऐसे माइग्रेट किए गए मामलों की मूल आवेदन तिथि और प्राथमिकता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी?
  • क्या रेलवे बोर्ड या क्रिस (CRIS) द्वारा ऐसा कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया है जिसके तहत पुराने मामलों को दोबारा प्रक्रिया से गुजारना आवश्यक है?
  • क्या तकनीकी बदलाव के बीच कर्मचारियों के द्वारा प्रतीक्षा में बिताए गए लंबे समय और पूर्व स्वीकृतियों को बचाने का कोई विकल्प नहीं है?

व्यापक नीतिगत मुद्दे के रूप में देखने की मांग

प्रभावित पक्षों का कहना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण का उद्देश्य व्यवस्था को पारदर्शी और तेज बनाना होना चाहिए, न कि कर्मचारियों के समय और श्रम को व्यर्थ करना। यह समस्या केवल एक व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी कर्मचारियों को प्रभावित कर रही है जिनके म्यूचुअल ट्रांसफर प्रकरण पुराने सिस्टम से नए सिस्टम में माइग्रेट हुए हैं। इसे एक व्यापक नीतिगत मुद्दे (Policy Issue) के रूप में उच्च स्तर पर देखे जाने की आवश्यकता है, ताकि पीड़ित कर्मचारियों को अनावश्यक मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों से बचाया जा सके।