पश्चिम रेलवे में दूरसंचार और संरक्षा व्यवस्था की लचर स्थिति: अधिकारियों की कागजी औपचारिकताएं और फील्ड पर अक्षम्य लापरवाही

पश्चिम रेलवे में दूरसंचार और संरक्षा व्यवस्था की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो चुकी है, जहाँ उच्च अधिकारियों के कागजी निर्देशों और फील्ड की वास्तविकताओं के बीच जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है। रेलवे बोर्ड और मुख्यालय द्वारा दूरसंचार संपत्तियों की सुरक्षा तथा ट्रेन संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनका धरातल पर पालन कराने में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। स्थिति यह है कि कई महत्वपूर्ण स्टेशनों और कॉन्फ्रेंस हॉल के नवीनीकरण कार्यों के दौरान भी संवेदनशील सर्वर और दूरसंचार उपकरणों के लिए विश्वसनीय और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जा रही है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे या गंभीर तकनीकी संकट को खुला आमंत्रण दे रही है।

रेलवे बोर्ड द्वारा 12 मई 2023 को जारी परिपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया था कि आईपी-एमपीएलएस, सुरंग संचार, एमटीआरसी और ट्रेन नियंत्रण प्रणाली जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण दूरसंचार प्रणालियों के साथ-साथ सीसीटीवी और यात्री सुविधा प्रणालियों को भी सुदृढ़ और निर्बाध एटी बिजली आपूर्ति से जोड़ा जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद पश्चिम रेलवे के विभिन्न मंडलों और निर्माण इकाइयों में इस पर अमल करने के बजाय केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है।

16 अप्रैल 2026 को वरिष्ठ अनुभाग अभियंता द्वारा इस संबंध में लिखित पत्राचार करने और 17 सितंबर 2026 को दोबारा पत्र लिखने के बाद भी पांच महीने से अधिक का समय बीत जाने पर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उच्चाधिकारियों के आदेश केवल कार्यालयों की फाइलों तक सीमित रहकर दम तोड़ रहे हैं, और फील्ड स्तर पर मैकेनिज्म पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

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दूरसंचार व्यवस्था में इस प्रकार की घोर लापरवाही के कारण कई गंभीर तकनीकी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। स्थानीय बिजली आपूर्ति में होने वाले उतार-चढ़ाव और अस्थिरता के कारण लिंक बाधित हो जाते हैं, जिससे संपूर्ण ट्रेन संचालन प्रभावित होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा महंगे और संवेदनशील दूरसंचार उपकरण समय से पहले खराब होने लगते हैं, उनके कॉन्फिगरेशन या सॉफ्टवेयर दूषित हो जाते हैं और बार-बार रीइंस्टॉल करने की समस्या उत्पन्न होती है। यदि समय रहते इन दिशा-निर्देशों को पूरी कर्तव्यनिष्ठा से लागू किया जाए तो न केवल रखरखाव और दैनिक परिचालन सुचारू होगा, बल्कि इससे जुड़े भ्रष्टाचार और फर्जी खर्चों पर भी प्रभावी लगाम लगेगी।

“RailSamachar.com” की “आपने बंदरों को काम पर रखा है, तो आपको बंदरों वाला खेल ही देखने को मिलेगा!” शीर्षक खबर के बाद पश्चिम रेलवे से पता चली दूरसंचार व्यवस्था की चिंताजनक स्थिति और प्रस्तुत है उस पर की जा रही अक्षम्य लापरवाही की कुछ बानगी!

फील्ड स्टाफ का कहना है कि “कथनी और करनी जब दूर–दूर तक मेल नहीं खाए तो फिर कितना भी सुरक्षा कवच की बातें क्यों नहीं करें सभी खोखली ही साबित होती हैं, क्योंकि हमने देखा है “संरक्षा एवं सुरक्षा” के नाम पर लूट मची है! अधिकारी अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाते हैं। फील्ड में कार्य करने के लिए किसी भी वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (एसएसई) की बातों पर ध्यान न देकर अपनी “बॉसिंग” करना, धमकियां देना, APAR खराब करने, स्थानांतरण एवं चार्जशीट की बार–बार धमकी, यदि इससे भी बात नहीं बनती है तो असंवैधानिक भाषा में अभद्र व्यवहार, गाली–गलौज करते हैं, कॉन्ट्रैक्टर्स पर कोई दबाब नहीं बनाएंगे तो कई “बालासोर” देखने और सुनने को मिलेंगे, और ये होंगे ही! फील्ड में कार्य करने वाले लोगों को केवल बंधुआ मजदूर समझेंगे, पॉवर अधिकारी अपने पास रखेंगे, फील्ड में लागू होने ही नहीं देंगे तो फिर बन्दरों वाली किस्से–कहानियां ही सुनने को मिलेंगी!”

“SSE/T/C/ST, ओपन लाइन के द्वारा AT selected चेंज ओवर पैनल सप्लाई की डिमांड की गई है—टेलीकॉम असेट्स की सेफ्टी के दृष्टिकोण से, मगर इसे अब तक सुनिश्चित नहीं किया जा सका है!”

“अखिरकार टेलीकॉम असेट्स की सुरक्षा हेतु सेलेक्टिव सप्लाई की सुदृढ़ व्यवस्था लागू क्यों नहीं हो पा रही है!”

“16.04.2026 को एसएसई द्वारा लिखित में रिमाइंड करने और पांच महीने बीत जाने के बाद भी सेलेक्टिव पॉवर सप्लाई सुनिश्चित नहीं हो सकी है।”

18.09.2026 को एसएसई/टेली/सूरत द्वारा एसएसई/टेली/कंस्ट्रक्शन/ग्रांट रोड, एसएसई/वर्क्स/कंस्ट्रक्शन/सूरत और एसएसई/पॉवर/कंस्ट्रक्शन/ग्रांट रोड को 20.03.2026 के पत्र का हवाला देते हुए पुन: मुख्यालय के निर्देशों पर अमल करने को कहा गया था। इस पर एसएसई/टेली/कंस्ट्रक्शन/ग्रांट रोड ने 16.04.2026 को रिमाइंडर भी दिया, परंतु उक्त निर्देशों पर अब तक अमल सुनिश्चित नहीं कराया जा सका।

फील्ड स्टाफ का कहना है कि “ये 20.03.2026 का पत्र देखें, हायर–अथॉरिटी द्वारा ऑफिसियल दिशानिर्देश अपने ऑफिस तक ही रखे जाते हैं, फील्ड पर लागू नहीं करेगें तो “दूरसंचार यंत्रों की संरक्षा एवं सुरक्षा” कैसे सुनिश्चित होगी और आने वाले समय में IP-MPLS, KAVACH (TCAS) एवं LTE पर भारतीय रेल की गति एवं समयपालन कैसे सुनिश्चित होगा!”

इसके अतिरिक्त, रेलवे बोर्ड द्वारा दूरसंचार सर्कुलर संख्या 06/2023 (पत्र संख्या 2021/Tele/11(6)/3(AT Supply), दिनांक 12.05.2023) के तहत भी यह निर्देश दिए गए थे कि ट्रेन संचालन और यात्री सुविधाओं से जुड़े दूरसंचार उपकरणों (जैसे MTRC, टनल कम्युनिकेशन, IP-MPLS, CCTV, यात्री सुविधा प्रणाली आदि) के लिए एटी पावर सप्लाई (AT Supply) विस्तारित की जाए, और जहां स्थानीय बिजली आपूर्ति अस्थिर है, वहां इसके प्रावधान को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, 16.04.2026 के इस लेटर (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी निर्माण चर्चगेट कॉन्फ्रेंस हॉल रेनोवेशन कार्य में दूरसंचार असेट्स और सर्वर की संरक्षा एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में) के आधार पर अब तक सेलेक्टेड सप्लाई सुनिश्चित नहीं की गई है।

यह केवल पश्चिम रेल की ही नहीं, बल्कि समस्त भारतीय रेल की मूलभूत समस्या है। फील्ड स्टाफ के अनुसार, यदि उक्त दिशानिर्देश लागू किए जाते हैं, तो निम्नलिखित सुविधाएं होंगी:

  • सप्लाई के उतार-चढ़ाव से लिंक में व्यवधान नहीं होगा!
  • टेलीकॉम असेट्स खराब नहीं होगे!
  • टेलीकॉम असेट्स की कॉन्फिगरेशन या सॉफ्टवेयर करप्टेड नहीं होंगे, बार-बार रीइंस्टाल की समस्या दूर हो जाएगी!
  • मेंटेनेंस, ऑपरेशन सरल और बेहतर हो जाएंगे!
  • इसके नाम पर लूट और भ्रष्टाचार पर लगाम लग जाएगी!
  • पॉवर सेविंग की व्यवस्था भी खत्म हो जाएगी, और पूरी भारतीय रेल की समस्त दूरसंचार कार्य प्रणाली काफी अच्छी हो जाएगी! 

निष्कर्ष:

भारतीय रेल में संरक्षा, सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों (जैसे कवच, आईपी-एमपीएलएस) के दावों के विपरीत धरातल पर स्थिति बेहद निराशाजनक और चिंताजनक बनी हुई है। जब तक उच्च अधिकारी वातानुकूलित कार्यालयों और फाइलों से बाहर निकलकर फील्ड स्तर पर वास्तविक मैकेनिज्म को दुरुस्त नहीं करेंगे, और आदेशों-दिशानिर्देशों को ताक पर रखकर मनमानी करने वाले अधिकारियों तथा लापरवाह ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इसी प्रकार की अक्षम्य लापरवाही और बंदरों वाली व्यवस्था के कारण रेल यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरे मंडराते रहेंगे। फील्ड इंजीनियरों और कर्मचारियों को केवल बंधुआ मजदूर समझना और उनकी जायज मांगों एवं सुझावों को अनदेखा-अनसुना करना भारतीय रेल के भविष्य के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।

पश्चिम रेलवे में दूरसंचार और संरक्षा व्यवस्था की जो पोल खुली है, वह किसी हास्यास्पद तमाशे से कम नहीं है। जैसा कि ऊपर उजागर किया गया है—यह बात आज पूरी भारतीय रेल में फील्ड स्तर पर अक्षरशः सच साबित हो रही है। रेलवे बोर्ड के सख्त और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, उच्चाधिकारियों की एसी कमरों के वातावरण और फील्ड की हकीकत के बीच इस कदर विरोधाभास है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो व्यवस्था को संभालने वाले खुद अपनी जिम्मेदारियों से अनजान हैं। 

जब अधिकारियों की प्राथमिकता केवल अपनी ‘बॉसिंग’ चमकाने, ट्रांसफर-चार्जशीट की धमकियां देने और फील्ड स्टाफ के सही सुझावों और मांगों को दबाने तक सीमित रह जाएगी, तो सब तरफ तकनीकी लापरवाही और ‘बंदर व्यवस्था’ के ही दर्शन होंगे। इसके परिणामस्वरूप, आईपी-एमपीएलएस, सीसीटीवी और महत्वपूर्ण ट्रेन संचालन प्रणालियों के लिए एटी पावर सप्लाई जैसी बुनियादी और संवेदनशील आवश्यकताएं महीनों बीत जाने पर भी कागजों से बाहर नहीं आ पा रही हैं।

इस व्यवस्थागत लाचारी और ‘बंदर राज’ के कारण बार-बार लिंक फेल होना, उपकरणों का कॉन्फिगरेशन बिगड़ना और महंगे सर्वर तथा दूरसंचार संपत्तियों का समय से पहले दम तोड़ना आम बात बन गई है। यदि समय रहते इस दिशाहीन और लापरवाह कार्यप्रणाली को नहीं बदला गया, तो आने वाले समय में ‘कवच’ (#TCAS) और भारतीय रेल की गति के सारे दावे धरे रह जाएंगे। जब तक कागजी आदेशों और खोखले सुरक्षा दावों की आड़ में चल रही इस ‘बंदर व्यवस्था’ पर पूरी तरह लगाम नहीं लगाई जाती, और फील्ड की वास्तविकता को सुधारने के लिए जवाबदेही तय नहीं की जाती, तब तक रेल यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहेगी!