पर्दाफाश: ओएसडी पर एमएफ के निजी आवास के नवीनीकरण हेतु ₹50 लाख का मटीरियल डायवर्ट करने का आरोप

RailSamachar.com पर पूर्व मध्य रेल के वित्त विभाग की ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रशासनिक विसंगतियों को उजागर करने वाली 6 सितंबर 2026 की रिपोर्ट, “पूर्व मध्य रेल: वित्त विभाग की ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रशासनिक विसंगतियों पर प्रश्नचिन्ह” के बाद, अब एक नया और बेहद सनसनीखेज व्हिसलब्लोअर इनपुट सामने आया है। हालाँकि भारतीय रेल में पारंपरिक रूप से इंजीनियरिंग और ऑपरेटिंग-कमर्शियल विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तो बहुत चर्चा होती है, लेकिन #RailSamachar के ये नए खुलासे रेलवे बोर्ड के शीर्ष स्तर पर गंभीर प्रशासनिक और नीतिगत भ्रष्टाचार तथा व्यवस्थागत अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं।

व्हिसलब्लोअर की जानकारी के अनुसार, रेलवे के वित्त विभाग में प्रशासनिक भ्रष्टाचार केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग तक सीमित नहीं है। इस खुलासे में सीधे तौर पर प्रमुख अधिकारियों, विशेष रूप से रेलवे बोर्ड की सदस्य वित्त (मेंबर फाइनेंस) के ओएसडी (विशेष कार्य अधिकारी) की जोड़-तोड़ करने वाली भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

मुख्य आरोप रेलवे और निर्माण कार्यों से जुड़ी सामग्रियों के दुरुपयोग को लेकर है। रिपोर्ट के अनुसार, आधिकारिक बंगले के नवीनीकरण के लिए खरीदी गई पचास लाख रुपये से अधिक मूल्य की प्रीमियम टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री को कथित तौर पर सदस्य वित्त के निजी आवास के रेनोवेशन के लिए डायवर्ट कर दिया गया है, जिन्होंने कथित तौर पर अवैध रूप से दो सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाया हुआ है।

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इस अवैध हेराफेरी को छिपाने के लिए आईओडब्ल्यू (#SSE/Works) और सहायक मंडल अभियंता (#ADEN) कार्यालयों के फील्ड इंजीनियरों पर भारी प्रशासनिक दबाव डाला गया, और मेंबर फाइनेंस के ओएसडी द्वारा व्यक्तिगत रूप से फील्ड ऑपरेशन की निगरानी कर आधिकारिक मेजरमेंट बुक्स (#MB) में हेरफेर करने की बात सामने आई है।

इसके अलावा, व्हिसलब्लोअर ने इस प्रशासनिक हेराफेरी और रेलवे मटीरियल से निजी निर्माण गतिविधियों के पीछे एक बड़े ‘क्विड प्रो को’ (quid pro quo) यानी अदला-बदली के सौदे का भी पर्दाफाश किया है। फंड के प्रबंधन, संदिग्ध ट्रांसफर-पोस्टिंग और निजी आवास के नवीनीकरण के कार्य को पूरा कराने के इनाम के तौर पर ओएसडी को उत्तर रेलवे के दिल्ली डिवीजन में वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक (#SrDFM) के पद पर मलाईदार पोस्टिंग देने का वादा किया गया है।

यह मामला सार्वजनिक बुनियादी ढ़ांचे के प्रशासन में गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है और केंद्रीय सतर्कता आयोग (#CVC) के दिशानिर्देशों तथा सामान्य वित्तीय नियमों के उल्लंघन की ओर संकेत करता है। जानकारों का मानना है कि रेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए इस प्रकार के प्रशासनिक गठजोड़ की गहन जांच आवश्यक है। क्रमशः