आपने बंदरों को काम पर रखा है, तो आपको बंदरों वाला खेल ही देखने को मिलेगा!
एक पखवाड़े में बालासोर श्रेणी की दो विफलताएं, और उसके पीछे की पोस्टिंग की संस्कृति!
21 अगस्त 2026 को, बंडामुंडा (#BNDM) में एक पैसेंजर ट्रेन ने गलत लाइन ले ली। #Railwhispers ने एक व्हिसलब्लोअर (मुखबिर) की इनपुट प्रकाशित की, जिसने इस #बालासोर श्रेणी की विफलता को सबके सामने ला दिया।
24 August 2026: Balasore, Again | Part I: “The Letter Sixty Days Before”
21 September 2026: The Cockroaches of Railways | Part 15: “Send Them Home. Then Look at Who Built the House”
इसके बाद एक दूसरे व्हिसलब्लोअर ने खुलासा किया कि ठीक इसी विफलता के कारण 14 अगस्त 2026 को पुरी में एक MEMU ट्रेन भी बेपटरी (डिरेल) हुई थी। इस तरह एक पखवाड़े के भीतर बालासोर श्रेणी की दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
7 September 2026: The Cockroaches of Railways | Part 13: “The Last Rung Wires the Interlocking”
2023 में #मंत्री जी बालासोर में कैंप किए हुए थे। प्रधानमंत्री ने भी दुर्घटना स्थल का दौरा किया था। दोनों ने स्वयं देखा है कि इस तरह की विफलता क्या तबाही ला सकती है।
यह विफलता नई नहीं है। 2005 में, जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, साबरमती एक्सप्रेस को मुख्य लाइन (मेन लाइन) का सिग्नल दिया गया था। लेकिन वह लूप लाइन पर चली गई और #समलाया में एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई थी।
22 April 2005: The Tribune, “17 killed as trains collide in Gujarat”
हमने 2023 में इस बात को फिर से याद दिलाया था:
14 July 2023: The Trillion Rupee Blunder – Modi ji Beware!
समलाया की घटना के बाद पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (#NFR) पर भी ऐसी ही दुर्घटना हुई। वर्ष 2006 में, रेलवे बोर्ड के एक पत्र में सिग्नलिंग सर्किट में डबल कट-इन और क्रॉस प्रोटेक्शन लागू करने की मांग की गई थी। उस पत्र को लिखने वाले अधिकारी तब बोर्ड में कार्यकारी निदेशक (ED) थे और अब वे मंत्री के सलाहकार हैं। यह पत्र बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है: “View Section JSP”।
सिग्नलिंग के अतिरिक्त सदस्य (Additional Member Signal) के छुट्टी पर जाने को मंत्री जी की नाराजगी का ही परिणाम माना जा रहा है। अब मंत्री जी को पॉइंट मशीनों पर किए गए काम की दैनिक रिपोर्ट मिलती है।
4 September 2026: The Cockroaches of Railways | Part 12: “The Minister Counted the Point Machines. That Is the Failure”
मंत्री जी इसलिए नाराज थे, क्योंकि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बालासोर हादसे के एक साल के भीतर सभी सिग्नलिंग सर्किट ठीक कर दिए जाएंगे। किसी ने उन्हें यह नहीं बताया कि 2006 का रेलवे बोर्ड का आदेश 20 साल बाद भी लागू क्यों नहीं किया गया!
बात यहाँ तक पहुँची कैसे? आज स्थिति यह है कि रेलवे बोर्ड और RDSO में अधिकारियों की पोस्टिंग को वेंडर और ठेकेदार तय (मैनेज) कर रहे हैं। इंजीनियरिंग विशेषज्ञता अब एक असुविधा बन गई है। सत्यनिष्ठ और अडिग अधिकारियों को तभी बुलाया जाता है जब कोई समस्या इतनी बड़ी हो जाती है कि किसी को बलि का बकरा बनाना पड़े।
1 September 2026: Approved by RDSO | Part III: “The Chair Was Filled. The Job Was Not”
18 September 2026: Approved by RDSO | Part VI: “A Policy Built on Confusion About What RDSO Is For”
26 September 2026: Administrative Propriety and Railway Board Postings: “Policy Inconsistencies and Serious Questions on Cadre Control”
पूरे सिस्टम में यही पैटर्न दिखाई दे रहा है:
- ट्रेनों में आग लगने की बढ़ती घटनाएं
- राजधानी श्रेणी की ट्रेनों में कपलिंग टूटना (ट्रेन पार्टिंग)
- ब्रेक फेल होना और ब्रेक में आग लगना
- पावर कारों के लिए अत्यधिक ऊंचे AMC (वार्षिक रखरखाव अनुबंध) दरें, जबकि फील्ड का सारा काम आज भी वही पुराने लोग करते हैं
- LHB कोचों में खतरनाक स्तर का जंग (corrosion) लगना
- ट्रेन सेट के रखरखाव के लिए पूरी तरह वेंडरों पर निर्भरता
- लोकोमोटिव के रखरखाव के लिए AMC और कुछ चुनिंदा वेंडरों पर निर्भरता
इन सबका संकेत केवल एक ही मुख्य कारण की ओर है: कम योग्यता और कम सत्यनिष्ठता वाले अधिकारी उन महत्वपूर्ण पदों पर बैठे हैं जहाँ फैसले लिए जाते हैं।
‘हाँ में हाँ मिलाने वाले’ (Yes men) अधिकारी टेंडर और नीतियों को वैसे ही मोड़ देंगे जैसा उन्हें निर्देश दिया जाएगा। लंबे समय तक शासन करने की चाह रखने वाली किसी भी राजनीतिक पार्टी को एक न एक दिन इन परिणामों का जवाब देना ही होगा, और तब उनके पास दोष मढ़ने के लिए कोई और नहीं बचेगा। एकमात्र विकल्प यह है कि प्रतिभा, योग्यता और सत्यनिष्ठा पर दांव लगाया जाए।
#Railwhispers के माध्यम से विशेषज्ञों ने रेल मंत्रालय को बार-बार अवगत कराया है कि प्रतिभा का सम्मान करें, योग्य एवं सत्यनिष्ठ अधिकारियों की तैनाती करें और उनका रोटेशन (बारी-बारी ट्रांसफर) करें। 3 सितंबर 2026 की समीक्षा यह साफ दर्शाती है कि 2006 में चुना गया रास्ता कहाँ ले गया है। अगर रास्ते नहीं बदले, तो ठीक यही समीक्षा 2046 में भी दोहराई जाएगी। तब तक मंत्रालय को कई अन्य विफलताओं के भी जवाब देने होंगे:
- कवच प्रणाली !
- मेगा टेंडर !
- बड़े लोकोमोटिव और ट्रेन सेट अनुबंध !
- RDSO, जिसके पत्रों का मूल्य आज उस कागज जितना भी नहीं है जिस पर वे लिखे जाते हैं !
आपने बंदरों को काम पर रखा है, तो आपको बंदरों वाला खेल ही देखने को मिलेगा मंत्री जी !

