पश्चिम रेलवे: अहमदाबाद मंडल में फर्नीचर मरम्मत और खरीद के नाम पर वित्तीय घालमेल: चालीस लाख से अधिक की चपत

अहमदाबाद: भारतीय रेल में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के दावों के बीच पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल से एक आश्चर्यजनक मामला सामने आया है। यहां वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (#SrDCM) कार्यालय के अंतर्गत आने वाले वीआईपी वेटिंग रूम, टिकट बुकिंग एवं पार्सल कार्यालयों में फर्नीचर की मरम्मत और नई खरीद के नाम पर कथित रूप से भारी अनियमित्ताओं और वित्तीय भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। एक व्हिसलब्लोअर द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों, पत्रों और तस्वीरों से यह खुलासा हुआ है कि जनता की गाढ़ी कमाई का किस प्रकार दुरुपयोग किया जा रहा है।

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प्राप्त जानकारी और दस्तावेजों के अनुसार, मंडल में फर्नीचर की मरम्मत और नए सामान के नाम पर कुल ₹40 लाख से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च दिखाई गई है। जानकारों का मानना है कि आश्चर्य इस बात का है कि यदि नया सामान खरीदा जाता तो यह काम तीस लाख रुपये के भीतर पूरा हो जाता और वास्तविक मरम्मत कार्य पर तो पांच लाख रुपये का खर्च भी नहीं हुआ है। आरोप है कि वाणिज्य विभाग के संबंधित कर्मचारियों और सीनियर डीसीएम ने इस बजट का उपयोग अपने आवासों पर इंटीरियर डिजाइन और रेनोवेशन कराने में भी किया और उनके बिलों को सरकारी खाते में जोड़ दिया गया।

वित्तीय दस्तावेजों और जेम पोर्टल (GeM Portal) के आंकड़ों से यह भी स्पष्ट होता है कि एक ही विशेष फर्म को संदिग्ध रूप से लगातार और बड़े पैमाने पर काम दिए गए। फर्म को जेम पोर्टल के माध्यम से ₹15.44 लाख और ऑफलाइन डिमांड के जरिए ₹24.67 लाख यानी कुल ₹40,12,262 का भुगतान किया गया है। कार्य आदेशों के विश्लेषण से पता चलता है कि सोफा रिपेयरिंग के लिए औसतन ₹5,800 और टिकट बुकिंग ऑफिस की चेयर रिपेयरिंग के लिए औसतन ₹6,200 प्रति चेयर का अत्यधिक खर्च दिखाया गया है, जो बाजार दरों से कई गुना अधिक है।

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ऐसा ही एक मामला साबरमती (SBIB) स्टेशन पार्सल ऑफिस का है, जहां कुल 8 ऑफिस चेयर खरीदी गईं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार प्रति चेयर खरीद लागत ₹6,375 दर्शाई गई, जिससे इन 8 कुर्सियों का कुल भुगतान ₹51,000 किया गया। इसके विपरीत, बाजार में सामान्य खुदरा मूल्य पर ऐसी ही एक कुर्सी मात्र ₹2,300 से ₹2,700 के बीच आसानी से उपलब्ध हो जाती है।

इसी प्रकार कलोल बुकिंग ऑफिस और पालनपुर वीआईपी रूम के नाम पर भी भारी-भरकम राशि के मरम्मत कार्य स्वीकृत किए गए, जिन पर प्रशासनिक नियंत्रण और सतर्कता एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। जनता के धन की इस खुली लूट ने रेल प्रशासन की आंतरिक वित्तीय जांच और जवाबदेही की पोल खोल दी है।

“रेल में चौतरफा खुली लूट चल रही है, जिसे जहां जितना अवसर मिल रहा है वह वहां उतना लूट रहा है, यहां देखने वाला कोई नहीं है”, यह कहना है जानकारों का!