कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन: निर्माण की आड़ में लूट के नए तरीके या व्यवस्था की नाकामी?
“रेलवे के कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन का नाम बदलकर ‘कांट्रेक्टर ऑर्गनाइजेशन’ और चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर (#CAO) का नामकरण ‘करप्ट एक्टिविटी ऑफिसर’ कर देना चाहिए, क्योंकि वहाँ कुछ भी कंस्ट्रक्टिव नहीं हो रहा है।” यह तीखी टिप्पणी पूर्व मध्य रेलवे (#ECR) के निर्माण संगठन में कार्यरत निचले स्तर के कर्मचारियों और जूनियर अधिकारियों की है। उनका आरोप है कि संगठन में तैनात होने वाला हर सीएओ केवल अपना थैला भरकर निकलने की फिराक में रहता है। उनका यह भी कहना है कि पूर्व मध्य रेलवे में हजारों करोड़ रुपये के निर्माण कार्य होने के बावजूद न तो यात्रियों को कोई फायदा हुआ है, न रेलवे को और न ही देश को। इसका लाभ केवल दो पक्षों—संबंधित CAO और ठेकेदारों—तक सीमित होकर रह गया है।
मनमाने टेंडर और दबाव की कार्यशैली
शिकायतों के अनुसार, बिना ड्राइंग-डिजाइन के टेंडर जारी करवाना, बाद में उनमें जमकर वेरिएशन करवाना और बिल पास कराने के लिए दबाव बनाना सीएओ कंस्ट्रक्शन का मुख्य धंधा बन गया है। निर्माण स्थलों पर जाकर किसी प्रकार के रचनात्मक निर्देश या विचार साझा करने के बजाय, उनका एकमात्र लक्ष्य ठेकेदारों के साथ मिलकर रेलवे को वित्तीय हानि पहुँचाकर केवल अपना निजी हित साधना होता है। इसके अलावा, जूनियर अधिकारियों पर लगातार दबाव बनाने और उनके साथ अनुचित भाषा का प्रयोग कर उनका मनोबल तोड़ा जाता है, ताकि उनसे ठेकेदारों के सभी गलत-सही कार्यों का अनुमोदन कराया जा सके।
फर्जी ईमानदारी और अवास्तविक डेडलाइन
कर्मचारियों का आरोप है कि ईसीआर कंस्ट्रक्शन के शीर्ष अधिकारी ईमानदारी का दिखावा कर जनता और विभाग को दिग्भ्रमित करते हुए भ्रष्टाचार के नए रास्ते तलाश रहे हैं। ये अधिकारी अपने उच्चाधिकारियों को अवास्तविक समय-सीमा (डेडलाइन) का झूठा आश्वासन दे देते हैं, जबकि वे स्वयं भली-भांति जानते हैं कि वह कार्य उनकी तय टार्गेट अवधि में पूरा होना असंभव है। इसके बावजूद, ठेकेदारों और अधीनस्थ अधिकारियों पर अनुचित दबाव बनाकर अपनी जेबें भरने का यह उनके लिए एक आसान जरिया बन चुका है।
उच्चस्तरीय जाँच और नीतिगत सुधार की आवश्यकता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यह सुझाव दिया गया है कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (#CRB) और मेंबर इंफ्रास्ट्रक्चर (#MI) को एक विशेष टीम का गठन कर ईसीआर निर्माण कार्यालय भेजना चाहिए। यह टीम चल रहे और आगामी कार्यों का निरीक्षण कर उनके वास्तविक पूर्ण होने और उपयोग में आने की समय-सीमा का आकलन करे, जिससे पूरी सच्चाई सामने आ सके। वर्तमान में ईसीआर में पदस्थापित अधिकांश CAO का कार्यकाल मात्र छह से पंद्रह महीने का बचा है, ऐसी स्थिति में उनसे किसी भी दीर्घकालिक परियोजना को पूरा करने की उम्मीद करना बेमानी है।
वरिष्ठ अधिकारियों की प्रमुख माँगे:
- न्यूनतम सेवा अवधि: किसी भी ऐसे अधिकारी को CAO/कंस्ट्रक्शन के पद पर नियुक्त न किया जाए जिसकी सेवा पाँच वर्ष से कम बची हो।
- निश्चित कार्यकाल: CAO का कार्यकाल कम से कम दो से तीन वर्ष का होना चाहिए।
- जवाबदेही और समीक्षा: अधिकारियों के कार्यकाल के दौरान दिए गए लक्ष्यों की कड़ी समीक्षा होनी चाहिए और उनकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
- गुणवत्ता और पारदर्शिता: कार्यों में उच्च गुणवत्ता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।

