सिग्नलिंग और ‘कवच’ प्रोजेक्ट में रिश्वत का खेल: 5 करोड़ की बंटी घूस, सुरक्षा मानकों से खिलवाड़, सीबीआई करेगी फोरेंसिक जांच
उत्तर पश्चिम रेलवे और बीकानेर मंडल में सिग्नलिंग तथा अति-महत्वाकांक्षी ‘कवच’ प्रोजेक्ट के कार्यों में बड़े स्तर पर रिश्वतखोरी और सुरक्षा मानकों से किए गए समझौते का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीकानेर मंडल में 1500 किलोमीटर ट्रैक पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम लगाने के करीब ₹48 करोड़ के प्रोजेक्ट में बिल पास कराने के लिए ठेकेदारों द्वारा 10 प्रतिशत यानि करीब ₹5 करोड़ की घूस बांटी गई थी।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए गए सात रेल अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि कमीशन की भरपाई करने के लिए प्रोजेक्ट में भारी शॉर्टकट अपनाए गए, काम पूरा होने का समय भी संभवतः वास्तविक समय से पीछे खिसकाया गया, और सुरक्षा से गंभीर समझौता किया गया। लाखों यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए अब सीबीआई द्वारा अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) के विशेषज्ञों के साथ मिलकर पूरे सिग्नलिंग सिस्टम का तकनीकी ऑडिट और फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी की जा रही है।
विस्तृत जांच में यह बात भी सामने आई है कि सिग्नलिंग प्रोजेक्ट के सबसे संवेदनशील हिस्से, जैसे केबल ट्रेंचिंग की गहराई, सुरक्षा परत और सामग्री के मानकों में भारी अनदेखी की गई है, जिससे ट्रैक मेंटेनेंस या बारिश के समय केबल क्षतिग्रस्त होकर सिग्नल प्रणाली ठप होने का खतरा बढ़ गया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग के हजारों सिमुलेशन और फेल-सेफ टेस्ट, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने न आएं, बिना किसी फील्ड ट्रायल के सीधे कागजों में ही पास दिखा दिए गए।
इस मामले में सीबीआई ने वरिष्ठ अनुभाग अभियंता राजेन्द्र चौधरी, लेखा सहायक राकेश कुमार नवल को गिरफ्तार किया है, जबकि मैसर्स एमआरटी सिग्नल्स लिमिटेड के देबाशीष दास, अमित टिब्रेवाल और सिद्धार्थ घोष समेत अन्य को नामजद किया गया है।
इसी नेटवर्क से जुड़ी एक अन्य जांच में उत्तर पश्चिम रेलवे, जयपुर में टेंडर आवंटन से लेकर बिल पास कराने और अंतिम भुगतान तक अधिकारियों और कर्मचारियों का अलग-अलग ‘शेयर’ तय होने का पैटर्न उजागर हुआ है। मेसर्स दिनेश इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ‘कवच’ प्रोजेक्ट के तहत लगाए गए ₹6.20 करोड़ के टावर इरेक्शन और ₹4.70 करोड़ के ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) कार्यों के बिलों को तेजी से पास कराने के लिए मुंबई से हवाला के जरिए रिश्वत की रकम मंगवाई गई थी।
इस साठगांठ में डिप्टी सीएसटीई विक्रम सिंह शेखावत, ओएस संगीता कुमारी और एकाउंट्स सेक्शन के कर्मचारियों की भूमिका सामने आई है, जिसमें कंपनी के मुंबई कार्यालय से सुनील दत्त के जरिए रकम जयपुर लाकर गौरव गुप्ता के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंचाई जानी थी।
सीबीआई अब कमीशनखोरी के इस पूरे रैकेट की कड़ियों को जोड़कर लंबे समय से चल रहे इस कमीशन नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है।

