NFR में बोर्ड की ट्रांसफर पॉलिसी की उड़ रही धज्जियां: 15 साल से एक ही जगह जमे एक्सईएन के ट्रांसफर का ‘खेल’!

गुवाहाटी/न्यू जलपाईगुड़ी: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (#NFR) के निर्माण संगठन में रोटेशन और ट्रांसफर पॉलिसी के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। फील्ड कर्मचारियों ने रेल प्रशासन, सभी संबंधित अधिकारियों, रेलवे बोर्ड तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग (#CVC) का ध्यान आकर्षित करते हुए #RailSamachar को एक ईमेल भेजकर ट्रांसफर पॉलिसी में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने की मांग की है।

विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक अधिकारी जमालुद्दीन खान बीते 15 वर्षों से भी अधिक समय से न्यू जलपाईगुड़ी (#NJP) में ही डटे हुए हैं। कागजों में उनका पदनाम बदलकर क्रमशः #ADEN/NJP, #XEN/RE/NJP और वर्तमान में XEN/Con/NJP दर्शाया गया है, लेकिन प्रत्यक्षतः व्यावहारिक रूप से वह एक ही स्टेशन पर लगातार जमे हुए हैं। ट्रांसफर के कागजी फेरबदल के बावजूद उन्हें असामान्य रूप से लंबे समय तक न्यू जलपाईगुड़ी में ही बनाए रखा गया।

इतना ही नहीं, XEN/Con/NJP के रूप में उनकी वर्तमान पदस्थापना 20 अक्टूबर 2023 के एक कार्यालय आदेश के तहत केवल छह महीने की अस्थायी व्यवस्था के रूप में की गई थी। हालांकि, निर्धारित अवधि बीत जाने के महीनों बाद भी वह इसी पद पर काबिज हैं।

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आदेश जारी होने के बाद भी अनुपालन नहीं

सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बाद कार्यालय आदेश संख्या 64/2025(Gaz), दिनांक 03.07.2026 को जारी किया गया। इस आदेश के तहत—दिव्य कुमार मिली (AXEN/Con/G-2/MLG) को पदोन्नत कर जमालुद्दीन खान के स्थान पर XEN/Con/NJP नियुक्त किया गया, और जमालुद्दीन खान का स्थानांतरण XEN/Con/Mariani (मरियानी) के पद पर किया गया।

ताजा स्थिति यह है कि नए अधिकारी दिव्य कुमार मिली ने न्यू जलपाईगुड़ी में अपना कार्यभार संभाल लिया है, लेकिन इसके बावजूद ट्रांसफर आदेश का पूर्णतः अनुपालन नहीं किया गया है। जमालुद्दीन खान को न्यू जलपाईगुड़ी परिसर के भीतर ही अन्य कार्यों में समायोजित कर दिया गया है। सूत्रों का दावा है कि वह इस स्थानांतरण को रद्द या संशोधित कराने के लिए लगातार मुख्य अभियंता (CE) और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (CAO/Const.) के चक्कर काट रहे हैं।

कर्मचारियों में रोष, निष्पक्ष जांच की मांग

प्रशासनिक स्तर पर इस प्रकार का दोहरा रवैया अपनाने से फील्ड कर्मचारियों में भारी असंतोष है। कर्मचारियों का कहना है कि स्थानांतरण नीति का मूल उद्देश्य संस्थागत ईमानदारी और निष्पक्षता बनाए रखना है। यदि सक्षम अधिकारी द्वारा जारी आदेशों की अनदेखी कर मनमानी की जाएगी, तो इससे कर्मचारियों का मनोबल टूटेगा और रेल प्रशासन की साख प्रभावित होगी।

इस पूरे प्रकरण पर प्रताड़ित कर्मचारी, जीएम/कंस्ट्रक्शन और वरिष्ठ अधिकारियों से पूछ रहे हैं कि स्थानांतरण आदेश के अनुपालन में देरी क्यों की जा रही है? कर्मचारियों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा कर नियमों के तहत तत्काल कार्रवाई की जाए।

उपरोक्त प्रकरण पर इंजीनियरिंग अधिकारी जमालुद्दीन खान का कहना है कि यह सही नहीं है कि वे लगातार पंद्रह साल से एक ही जगह कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इस बीच वे आरई में गुवाहाटी, लम्डिंग और न्यू जलपाइगुड़ी में भी कार्यरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी फेमिली हाई शुगर की मरीज है, इसलिए उनकी मजबूरी है और प्रशासन ने उनकी मजबूरी को समझते हुए उन्हें कुछ राहत दी है जिसके कारण वे पूरी लगन से काम करते हैं और प्रशासन को कभी शिकायत का अवसर नहीं देते। बहरहाल, यह प्रशासन पर निर्भर करता है कि सही क्या है, यह जांच करे और रोटेशन पॉलिसी पर अमल करे।