दक्षता का संकट: ट्रैफिक सर्विस के लिए स्वयं को साबित करने का अवसर

#IRTS अधिकारियों—सेवारत और सेवानिवृत्त दोनों—द्वारा रेलवे बोर्ड के सदस्य परिचालन एवं व्यवसाय विकास (#MOBD) का पद पुनः IRTS के पास लाने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का अभियान चलाया गया था। यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इसमें वे सफल रहे। हालांकि, अब समय आ गया है कि वे अपने “शीशमहलों” (सपनीली दुनिया) से बाहर निकलें और एक सेवा को दूसरी सेवा के खिलाफ खड़ा करने के बजाय ईमानदारी से जमीन पर काम करना सीखें। हर अधिकारी यह स्पष्ट रूप से समझ ले कि MOBD का पद फिलहाल ‘परिवीक्षा’ (#probation) पर है। यदि ट्रैफिक ऑफिसर जमीनी स्तर पर अपने तौर-तरीकों में सुधार नहीं लाते है, तो इस पद को फिर से ‘एक्स-कैडर’ बनाना आवश्यक हो जाएगा।

#RailSamachar ने भी MOBD की पोस्ट को “कैडर पोस्ट” बनाने का पूरा समर्थन किया था। और हम यह भी जानते हैं कि MOBD पोस्ट को ट्रैफिक कैडर में रखने का समर्थन करने के लिए अन्य कैडर्स द्वारा हमारी बहुत आलोचना की गई—जबकि हमारी आलोचना उस व्यक्ति विशेष की थी जिसने स्वयं को उस IRTS कैडर के रैंक-एंड-फाइल (मातहत अधिकारियों एवं कर्मचारियों) से काट लिया था जिसे वह अपनी बचकानी हरकतों के साथ नियंत्रित कर रहा था। हम एक ऐसी कार्यप्रणाली के पक्ष में हैं जहाँ हर विभाग—हर अधिकारी हर कर्मचारी ‘सेवा की भावना’ के साथ अपने-अपने दायित्व का निर्वाह करे। दुर्भाग्य से, ऐसा प्रतीत होता है कि यातायात सेवा ने अभी तक अपने सबक नहीं सीखे हैं।

रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (#CRIS) को भारतीय रेल यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारियों का प्ले-ग्राउंड माना जाता है। रेलवे कंट्रोल रूम्स के आधुनिकीकरण में क्रिस की विफलता एक खतरनाक बाधा बन गई है, जो पूरी भारतीय रेल के साथ पूरे देश को प्रभावित कर रही है—यह सर्वविदित है कि कैसे ट्रैफिक अधिकारियों ने ट्रेन डिस्पैच के लिए आधुनिक रियल-टाइम उपकरणों की शुरुआत का विरोध किया था।

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एक वरिष्ठ सिविल इंजीनियर ने बताया कि शुक्रवार, 10 अप्रैल को हुई चेयरमैन, रेलवे बोर्ड (सीआरबी) की सेफ्टी मीटिंग में ट्रैक के 20 नए निगरानी पॉइंट प्रस्तुत किए गए हैं, जिन पर तत्काल संज्ञान लेने की आवश्यकता है। हालांकि, फील्ड अधिकारी वर्तमान में दैनिक आधार पर पूर्वानुमानित ‘ब्लॉक प्रबंधन’ (मरम्मत एवं रखरखाव के लिए ट्रैक खाली मिलना) हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि ट्रैफिक अधिकारी मनमाने ढ़ंग से किसी भी विभाग पर विफलताओं और देरी का दोष मढ़ने का प्रयास करते हैं, जिससे ब्लॉक के संचालन में अनिश्चितता पैदा होती है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज हर विभाग को ‘आउटसोर्स मैनपावर’ के साथ काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, क्योंकि काम की मात्रा का प्रबंधन विभागीय स्तर पर नहीं किया जा सकता है। संसाधन जुटाने के बाद, जब ब्लॉक में कटौती की जाती है या उन्हें रद्द कर दिया जाता है, तो व्यवस्था में भारी तनाव उत्पन्न होता है जो काम की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। इसके लिए ठेकेदारों को अकारण दंडित किया जाता है, क्योंकि मुआवजे के बिना ब्लॉक रद्द होने पर उन्हें भारी मशीनरी और श्रम के लिए अनावश्यक लागत वहन करनी पड़ती है।

उन्होंने ब्लॉक मीटिंग्स को ‘डार्क ट्विस्ट वाले कॉमेडी सर्कस’ के समान बताया। उन्होंने कहा कि बड़े तामझाम के साथ शुरू किए गए ‘रोलिंग ब्लॉक प्रोग्राम’ को नियमित रूप से कागजों पर गढ़ा (फर्जीवाड़ा) जाता है। इससे संगठन के भीतर व्यापक अविश्वास पैदा हुआ है। उनका कहना था कि ब्लॉक संचालन में दैनिक और प्रति घंटे की अनिश्चितता को देखते हुए, रोलिंग ब्लॉक की अवधारणा ही संदिग्ध हो गई है।

रेल कंट्रोलर्स का मरणासन्न और गुटों (siloed) में बंटा हुआ कैडर एक गंभीर चिंता का विषय है। एक पूर्व ट्रैफिक अधिकारी ने कहा है कि कंट्रोलर्स अब प्रबंधन के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समूह बन गए हैं और कई ऑपरेटिंग अधिकारी इनको नियंत्रित करने में विफल हो रहे हैं, जिससे सभी फ्रंटलाइन विभागों के कामकाजी स्तर पर तनाव बढ़ गया है। यह ‘दक्षता का संकट’ है। जब तक ट्रैफिक कैडर वास्तविकता के प्रति नहीं जागता, उन्हें देश की अर्थव्यवस्था के लिए बाधा माना जाएगा।

विश्लेषण और तथ्यात्मक संदर्भ

व्हिसलब्लोअर का उपरोक्त इनपुट भारतीय रेल की आंतरिक ‘वैमनस्यता’ (Departmentalism) को उजागर करता है, जो अक्सर ऑपरेटिंग (Traffic) बनाम मेंटेनेंस/रखरखाव (Engineering/S&T) के बीच होती है।

MOBD पद का विवाद और IRMS

  • तथ्य: भारत सरकार ने रेलवे के 8 विभिन्न कैडरों को मिलाकर Indian Railways Management Service (#IRMS) बनाया था, ताकि “विभागवाद” (विभागीय अहं) को खत्म किया जा सके।
  • संदर्भ: IRMS में MOBD का पद विशेष रूप से IRTS के लिए आरक्षित नहीं रह गया था, जिसका IRTS अधिकारियों ने कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि परिचालन (Operations) एक विशेषज्ञता है। हालिया बदलावों में इसे फिर से बहाल करने की दिशा में कदम उठाए गए, जिसे एक ‘चेतावनी’ के रूप में देखा जा रहा है।

रोलिंग ब्लॉक प्रोग्राम

  • तथ्य: रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने रखरखाव के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करने हेतु ‘रोलिंग ब्लॉक’ (#RollingBlock) की अवधारणा प्रस्तुत की थी—जिसमें 15 दिन पहले से ही ट्रैक मरम्मत का समय तय करना होता है।
  • संकट: जमीन पर, ‘समयपालन’ (#Punctuality) के दबाव के कारण ऑपरेटिंग विभाग अक्सर इंजीनियरिंग विभाग को रोलिंग ब्लॉक देने से मना कर देता है या आखिरी समय पर रद्द कर देता है—जैसा कि ऊपर बताया गया है—इससे संसाधनों की बर्बादी होती है और ट्रैक की सुरक्षा से समझौता होता है।

CRIS और तकनीक का विरोध

  • तथ्य: CRIS (Centre for Railway Information Systems) रेलवे के आईटी ढ़ांचे को संभालता है।
  • विश्लेषण: अक्सर आरोप लगते हैं कि डेटा आधारित पारदर्शी सिस्टम (जैसे रीयल-टाइम ट्रेन ट्रैकिंग) का विरोध इसलिए किया जाता है, क्योंकि इससे ‘मैनुअल’ हेरफेर और देरी को छिपाने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

संरक्षा बनाम समयपालन

  • तथ्य: हाल के वर्षों में हुए हादसों—जैसे कंचनजंगा एक्सप्रेस हादसा 2024–ने कंट्रोल रूम के कामकाज और सेक्शन कंट्रोलर्स के भारी तनाव को उजागर किया है।
  • विश्लेषण: जब कंट्रोलर और ऑपरेटिंग ऑफिसर केवल “ट्रेन चलाने” पर ध्यान देते हैं और “ट्रैक रखरखाव” को समयपालन में बाधा मानते हैं, तो संरक्षा संकट पैदा होता है। ‘कॉमेडी सर्कस’ शब्द का प्रयोग उन बैठकों के लिए किया गया है जहाँ आंकड़ों को सुधारने के लिए कागजी खानापूर्ति की जाती है।

निष्कर्ष

उपरोक्त तथ्य एक “अकुशल अथवा गैरजिम्मेदार कार्य संस्कृति” की ओर इशारा करते हैं। यदि यातायात विभाग (IRTS) अन्य तकनीकी विभागों के साथ वास्तविक समन्वय नहीं करता है, तो यह न केवल रेलवे की संरक्षा-सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचाता है, जो किसी के हित में नहीं है।