Editorial | दोहरा मापदंड: रेलवे और हाईवेज में ठेकेदारी का भविष्य संकट में!
आने वाले अगले दो वर्षों में #IndianRailways और National Highways Authority of India (#NHAI) की परियोजनाओं में ठेकेदारी व्यवस्था एक बड़े असंतुलन की ओर बढ़ती दिख रही है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि बड़ी कंपनियों की गंभीर गलतियों पर आंखें मूंदी जा रही हैं, जबकि छोटे और #MSME श्रेणी के ठेकेदारों पर कार्रवाई की पूरी फौज उतार दी जाती है।
जहाँ बड़ी कंपनियों के लिए कार्यवाही में देरी, गुणवत्ता में कमी, डिजाइन त्रुटियाँ, लागत बढ़ोतरी जैसे मामलों को “व्यावहारिक मजबूरी” बताकर समायोजित कर दिया जाता है, वहीं नए और छोटे ठेकेदारों पर बैनिंग ऑफ बिजनेस, ब्लैकलिस्टिंग, डिबारमेंट की तलवार तुरंत लटक जाती है। यह गंडासा–तलवार–पिस्तौल वाली कार्रवाई नीति-नियम और प्रतिस्पर्धा को खत्म कर एकाधिकार को मजबूत करती है।
इस दोहरे मापदंड का सीधा प्रभाव ईमानदार प्रतिस्पर्धा, लागत नियंत्रण और गुणवत्ता पर पड़ता है। MSME ठेकेदार, जो स्थानीय रोजगार, नवाचार और लागत दक्षता लाते हैं—डर के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। नतीजा—बोली में जोखिम प्रीमियम बढ़ता है, परियोजनाएँ महंगी होती हैं, और जवाबदेही कमजोर पड़ती है।
समाधान साफ है:
- समान नियम, समान दंड—कंपनी का आकार नहीं, गलती की गंभीरता निर्णायक हो।
- पारदर्शी जांच और कारणयुक्त आदेश—हर कार्रवाई लिखित, समयबद्ध और अपील-योग्य हो।
- MSME—संरक्षण ढ़ाँचा—अनुपातिक दंड, सुधार का अवसर और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो।
यदि यह असंतुलन नहीं सुधरा, तो अगले दो साल में ठेकेदारी पर कुछ गिनी-चुनी बड़ी कंपनियों का वर्चस्व और मजबूत होगा—और सार्वजनिक हित, गुणवत्ता और लागत—तीनों को कीमत चुकानी पड़ेगी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने एक बयान में कहा कि गुणवत्तापूर्ण (क्वालिटेटिव) उत्पादों के माध्यम से ही भारत को विश्व के पटल पर स्थापित किया जा सकता है!
#gadkari #NHAI #CBI #ED #Railway #JhajhariaNirman #ParasRailtech #JPWInfra

