नए मार्ग से नासिक-पुणे को जल्द ही सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी
महाराष्ट्र में उद्योग, शिक्षा और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रस्तावित पुणे-नाशिक हाई-स्पीड कॉरिडोर पर बात की, जिसका संशोधित मार्ग महाराष्ट्र के दो सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों — नाशिक और पुणे — के बीच संपर्क को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह उत्तर प्रस्तावित नासिक-पुणे हाई-स्पीड परियोजना पर लोकसभा में दिए गए सुझावों पर था।
पहले के एक प्रस्ताव के अनुसार, प्रस्तावित मार्ग नारायणगाँव से होकर, जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (#जीएमआरटी) के पास से होकर गुजरता था। यह एक अंतर्राष्ट्रीय वेधशाला परियोजना है जिसे 31 देशों के योगदान से शुरू किया गया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा कहा गया था कि यह मार्ग व्यवहार्य नहीं था, क्योंकि वेधशाला के पास से गुजरने वाली रेलवे लाइन अवलोकनों में बाधा उत्पन्न करेगी।
महाराष्ट्र सरकार, स्थानीय प्रतिनिधियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा के बाद, रेलवे ने एक वैकल्पिक मार्ग-निर्धारण का प्रस्ताव रखा है जो जीएमआरटी जोन से बचता है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सुविधा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और साथ ही क्षेत्र में प्रमुख बुनियादी ढ़ाँचे के विकास को भी बढ़ावा मिलता है।
नया मार्ग इन स्थानों को जोड़ता है
नासिक → साईनगर शिर्डी → पुणताम्बा → निंबलक → अहिल्यानगर → पुणे (चाकन औद्योगिक क्षेत्र होते हुए)

इस संशोधित मार्ग की वर्तमान स्थिति और प्रस्तावित कार्यों में शामिल हैं-
- नाशिक रोड और साईनगर शिर्डी के बीच लाइनों के दोहरीकरण हेतु एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार है।
- साईनगर शिर्डी – पुणताम्बा लाइन (17 किलोमीटर) के बीच दोहरीकरण कार्य के लिए 240 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं।
- 80 किलोमीटर पुणताम्बा-निंबलक लाइन के दोहरीकरण का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है।
- निंबलक-अहिल्यानगर 6 किलोमीटर के दोहरीकरण का कार्य पहले से ही प्रगति पर है।
- अहिल्यानगर और पुणे (133 किलोमीटर) के बीच चाकन औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली नई दोहरी लाइनों के लिए 8970 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार है।
यह मार्ग पिछली योजना की तुलना में यात्रा-समय में कम अंतर सुनिश्चित करता है और साथ ही कॉरिडोर के साथ-साथ समुदायों के लिए कनेक्टिविटी को भी बढ़ाता है।
परियोजना का लाभ
- तीर्थयात्रा, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
यह नया मार्ग नाशिक, एक विरासत और धार्मिक नगरी, को देश के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक—शिर्डी और पुणे—एक ऐतिहासिक शहर, जो पेशवा शासन के दौरान मराठा साम्राज्य की राजधानी थी, से जोड़ता है।
बेहतर कनेक्टिविटी से लाभ होगा
- शिर्डी, त्र्यंबकेश्वर और पंढरपुर मार्ग पर धार्मिक पर्यटन
- पुणे के किलों और विरासत स्थलों से जुड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन
- कॉरिडोर के साथ ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग
- आगंतुकों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को इन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों पर सुगम, तेज़ और सुरक्षित यात्रा का अनुभव होगा।
औद्योगिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा
यह कॉरिडोर इस क्षेत्र में आने वाले विभिन्न उद्योगों, विशेष रूप से चाकन औद्योगिक क्षेत्र, जो एक सबसे तेज़ी से बढ़ता विनिर्माण केंद्र है और ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उद्योगों के लिए जाना जाता है, को महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित करेगा।
सीधी रेल कनेक्टिविटी
- माल ढुलाई में सुधार और रसद लागत में कमी
- नए औद्योगिक निवेश आकर्षित करेगी
- एमएसएमई और आपूर्ति-श्रृंखला समूहों के विस्तार को बढ़ावा देगी
- राष्ट्रीय विनिर्माण केंद्र के रूप में क्षेत्र की स्थिति को मज़बूत करेगी
शैक्षिक और शहरी विकास
- पुणे और नाशिक दोनों तेजी से औद्योगिक और शैक्षिक केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।
तीव्र इंटरसिटी कनेक्टिविटी
- छात्रों की आवाजाही को बढ़ावा देगी
- शैक्षणिक और कौशल-विकास सहयोग को मज़बूत करेगी
- ज्ञान-संचालित और प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों के विकास को बढ़ावा देगी
- पूरे कॉरिडोर में संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा देगी
रेलमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के सभी माध्यमों को जोड़ने के दृष्टिकोण के तहत, रेलवे द्वारा गति शक्ति मल्टीमॉडल कार्गो टर्मिनल पहल शुरू की गई थी और वर्तमान में पूरे भारत में 130 टर्मिनल पहले से ही शुरू हैं। इसी नीति के तहत इन दोनों शहरों के विकास के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है और राज्य सरकार, सांसदों, रेलवे और स्थानीय अधिकारियों की एक टीम प्रस्तावित क्षेत्रों के विकास पर चर्चा कर सकती है।
प्रस्तावित पुणे-नासिक मार्ग महाराष्ट्र के बुनियादी ढ़ाँचे के विकास में एक बड़ा कदम है। दो प्रमुख महानगरीय क्षेत्रों को जोड़कर, चाकन और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुँच बढ़ाकर, और पर्यटन एवं शैक्षिक गतिशीलता को मजबूत करके, यह परियोजना भारत के लिए आधुनिक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार परिवहन के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

