मिजोरम तक पहली राजधानी ट्रेन को मिला जबरदस्त प्रतिसाद

रेल कार्गो सेवाओं ने पूर्वोत्तर के लोगों का जीवन आसान बनाया

नई रेल लाइनों से स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार, व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे

नई दिल्ली: भारतीय रेल को मिजोरम में बैराबी – सैरांग रेल लाइन के उद्घाटन और नागालैंड के मोल्वम स्टेशन से मालगाड़ी परिचालन की शुरुआत के बाद यात्रियों और माल ढुलाई दोनों से उत्साहजनक प्रतिसाद मिला है।

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केवल कुछ ही हफ्तों में यात्री और माल ढुलाई सेवाओं ने उल्लेखनीय परिणाम दिखाए हैं, जो पूर्वोत्तर के लोगों की उम्मीदों और रेल को विकास की जीवनरेखा मानने के विश्वास को दर्शाता है।

13 सितम्बर 2025 से सैरांग से यात्री ट्रेन सेवाओं की शुरुआत के बाद यात्रियों की ओर से जबरदस्त प्रतिसाद मिला है, कई ट्रेनों में क्षमता से कहीं अधिक बुकिंग दर्ज हुई।

ट्रेन संख्या 20507 (सैरांग – आनंद विहार टर्मिनल, दिल्ली) राजधानी एक्सप्रेस ने 162.5% ऑक्युपेंसी दर्ज की, जबकि इसकी वापसी सेवा 20508 (दिल्ली – सैरांग) राजधानी एक्सप्रेस में 158.3% ऑक्युपेंसी रही।

गुवाहाटी जाने वाली ट्रेनों में भी शानदार प्रतिसाद मिला—15609 (गुवाहाटी – सैरांग) एक्सप्रेस ने 100.1% ऑक्युपेंसी दर्ज की (स्लीपर क्लास पूरी तरह भरी रही), वहीं 15610 (सैरांग – गुवाहाटी) एक्सप्रेस ने लगभग 100% ऑक्युपेंसी बनाए रखी।

कोलकाता सेवाओं को भी उत्कृष्ट प्रतिसाद मिला—13126 (सैरांग – कोलकाता) एक्सप्रेस लगभग 100% भरी रही, जबकि वापसी सेवा 13125 (कोलकाता – सैरांग) एक्सप्रेस ने 144.8% ऑक्युपेंसी दर्ज की, जिसमें स्लीपर क्लास की ऑक्युपेंसी 144% रही।

ये आंकड़े मिजोरम से सीधे और विश्वसनीय रेल संपर्क की मजबूत मांग को दर्शाते हैं।

माल ढुलाई में भी तेज शुरुआत

  • 30 सितम्बर 2025 तक सैरांग स्टेशन पर कुल 8 रैक उतारे गए।
  • पहली रैक 14 सितम्बर को पहुँची, जिसमें गुवाहाटी के पास टेटेलिया स्थित स्टार सीमेंट साइडिंग से 21 डिब्बों में सीमेंट आया।

इसके बाद तीन रेक पत्थर (स्टोन चिप्स), एक रेक ऑटोमोबाइल्स, एक रैक RMC और एक रेक बैराबी से पहुँची।

सैरांग से पहला पार्सल कंसाइनमेंट 19 सितम्बर को बुक हुआ, जिसमें एन्थूरियम फूल ट्रेन संख्या 20507 (सैरांग – आनंद विहार टर्मिनल, दिल्ली) राजधानी एक्सप्रेस के पार्सल वैन से दिल्ली भेजे गए।

नागालैंड में भी शुरुआत

सितम्बर 2025 में मोल्वम स्टेशन से भी माल ढुलाई की शुरुआत हुई।

  • 24 सितम्बर को पहली बार 41 डिब्बों वाली सीमेंट की रेक (तेलंगाना से) मोल्वम पर सफलतापूर्वक रखी गई।
  • 29 सितम्बर को पहली आउटवर्ड रैक लोड हुई, जिसमें 42 डिब्बों में पत्थर (स्टोन चिप्स) भरकर मोल्वम से जिरानिया भेजे गए।

यात्री और माल सेवाओं की बढ़ती मांग यह दर्शाती है कि कैसे रेलवे कनेक्टिविटी पूर्वोत्तर की ज़िंदगी बदल रही है। सुविधा से आगे बढ़कर, ये नई रेल कड़ियाँ आर्थिक विकास, स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाज़ार और व्यापार व रोज़गार के नए अवसर देने का वादा करती हैं।