भारतीय रेल के सबसे पुराने रेल नेटवर्क के नए महाप्रबंधक—विजय कुमार

यह आवश्यक है कि जो जिसका काम है, वह करे और उसे करने भी दिया जाए—जीएम की पहली जिम्मेदारी अथवा प्राथमिकता रेल परिचालन को पटरी पर रखना है। इसका कोई अपवाद या विकल्प नहीं हो सकता!

पंद्रह कार और क्लोज-डोर लोकल सहित लोकल ट्रेनों की पंक्चुअलिटी पर विजय कुमार का ध्यान बना रहे, तो यह मुंबई शहर उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देगा और सदैव उनका आभारी रहेगा!

मध्य रेल के महाप्रबंधक की कुर्सी पर बैठने वाला बहुत सौभाग्यशाली होता है और यह अवसर बहुत भाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त हो पाता है। #IRSME-1988 बैच के मैकेनिकल इंजीनियर विजय कुमार भी इस मायने में सौभाग्यशाली हैं। उन्होंने मध्य रेल के महाप्रबंधक का कार्यभार बुधवार, 1 अक्टूबर को सँभाला है। 30 सितंबर को धरमवीर मीणा अपेक्षाकृत एक लघु मगर सफल कार्यकाल के बाद सेवानिवृत्त हो गए।

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विजय कुमार और धरमवीर मीणा—दोनों ही मंडल रेल प्रबंधक नहीं रहे, हालाँकि धरमवीर मीणा के कंस्ट्रक्शन और ओपन लाइन के कार्यकाल ने उन्हें जीएम/ओपन लाइन के लिए भली-भांति तैयार किया था। विजय कुमार, चितरंजन लोकोमोटिव कारखाने से यहाँ आए हैं, हालाँकि वह भारतीय रेल की एक महत्वपूर्ण प्रोडक्शन यूनिट है, तथापि उसकी कार्यशैली ओपन लाइन से बिल्कुल भिन्न है।

रेल में इस स्तर पर हर नए अधिकारी को एक स्टेज तैयार मिलता है, अच्छे अधिकारी—जो उन्हें अच्छा मिलता है, उसे आगे लेकर चलते हैं, और जिसमें सुधार की आवश्यकता होती है, उसमें वे अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर और सुधार एवं परिमार्जन करते चलते हैं।

माना गया कि धरमवीर मीणा को कवच प्रोजेक्ट को आगे ले जाने के लिए ही महाप्रबंधक बनाया गया था, और उनके नेतृत्व में मध्य रेल के पांचों मंडलों पर कवच के एकीकृत ट्रायल पूरे कर दिए गए, वह भी टेंडर अवार्ड होने के मात्र छह महीनों में—यह प्रशंसनीय है। वैसे भी उनके तकनीकी ज्ञान और उनकी इंटीग्रिटी पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं रहा। उनकी सिग्नल एवं टेलीकॉम की पृष्ठभूमि के चलते उनका सेफ्टी पर बहुत फोकस रहा और उन्होंने हर मंडल को सेफ्टी फर्स्ट में ढ़ाल दिया। वहीं उनकी प्रशासनिक पकड़ पर अवश्य कुछ प्रश्न उठे, जैसे कि रोटेशन का आभाव, लंबी रिव्यू मीटिंग आदि, पर काम, स्टाफ वेलफेयर और सेफ्टी के प्रति उनके समर्पण पर कभी कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगा।

नए महाप्रबंधक विजय कुमार ने भी कार्यभार सँभालने के तुरंत बाद सभी विभाग प्रमुखों (#PHOD) और पांचों मंडल रेल प्रबंधकों (#DRM) को संबोधित किया। सभी ब्रांच ऑफिसर भी इन मीटिंगों में जुड़ते हैं। अपने पहले संबोधन में उन्होंने मीटिंग्स को संक्षिप्त रखने, चौबीस घंटे अपने अधिकारियों के लिए उपलब्ध रहने का आश्वासन दिया। सेफ्टी को उन्होंने प्रथम रखने की बात भी कही। स्टाफ वेलफेयर को ऊपर रखने की बात भी की। उनकी ये कुछ बातें मध्य रेल के नए प्रबंधन के बारे में काफी हद तक आश्वस्त करती हैं।

यह भी पता चलता रहा था कि विजय कुमार लेवल-17 के लिए काफी प्रयासरत रहे हैं, और उनके पास दिसंबर 2026 तक का समय भी है। उन्हें इस फाउंडिंग रेलवे में लाने वाले सतीश कुमार हैं, जो अभी दूसरे कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन पर रेलवे बोर्ड के चेयरमैन हैं। कहा जा रहा है कि सतीश कुमार—जो Non-SCRA अधिकारी हैं—ने एक अन्य Non-SCRA अधिकारी का समर्थन किया है। वैसे इसकी पुष्टि करना कठिन है, लेकिन यह माना जाता रहा है कि मैकेनिकल विभाग में #SCRA और डायरेक्ट #IRSME में हमेशा एक अंतरप्रवाहित तना-तनी रही है।

बताया गया कि जब सतीश कुमार को पहली बार चेयरमैन बनाया गया था, तो उन्हें प्रधानमंत्री ने एक ही बात कही थी—रेल की सेफ्टी ठीक करना! हमने भी रेल की बिगड़ती सेफ्टी के चलते रेल के वरिष्ठ और जानकार अधिकारियों से चर्चा कर रेलमंत्री को सुझाव दिया था कि मंडल रेल प्रबंधकों को गतिशक्ति और कंस्ट्रक्शन के कामों से अलग रखा जाए और उन्हें केवल और केवल सेफ्टी पर ही अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने को कहा जाए। तत्पश्चात मंडलों से गतिशक्ति के निर्माण संबंधी कार्यकलापों को डीआरएम से पूरी तरह अलग कर दिया गया।

पता चला है कि नए महाप्रबंधक विजय कुमार ने प्रोजेक्ट्स को अपनी प्राथमिकता बताया है, जो प्रधानमंत्री के सतीश कुमार को दिए निर्देश से थोड़ा अलग लगता है। कोई कारण है कि ओपन लाइन और कंस्ट्रक्शन को अलग-अलग देखा गया और सीपीएम-गतिशक्ति को डीआरएम के नियंत्रण से निकाल दिया गया। विजय कुमार को यह ध्यान रखना होगा कि एक खतौली दुर्घटना के बाद व्यवस्था पर पड़े उसके दुष्प्रभावों और फिर एक बालासोर ने सरकार के सालों के अच्छे काम पर पानी फेर दिया, और आज भी उसका जवाब देना सरकार को भारी पड़ता है। व्यवस्था के जानकार-एक्सपर्ट—जिन्होंने अपना पूरा जीवन ओपन लाइन में लगा दिया—बताते हैं कि हर दिन जब रेल सुरक्षित पटरी पर चलती है—धन्यवाद दें उस व्यवथा का—जहाँ कई डिपार्टमेंट के कई हजार लोग रोज इनपुट दे रहे हैं। स्मरण रहे कि जब-जब एक्सीडेंट की संख्या कम होने से रेल नेतृत्व ने अपना ध्यान बांटा, वहीं एक बालासोर हो गया।

विजय कुमार टारगेट ओरिएंटेड हैं, ऐसा बताया गया है, जो कि एक बहुत अच्छी बात है। स्वस्थ रेल व्यवस्था में ओपन लाइन, जो दैनंदिन रेल परिचालन देखती है, और कंस्ट्रक्शन ऑर्गनाइजेशन, जो इंफ्रास्ट्रक्चर ऑग्मेंटेशन करता है—के बीच सदैव एक सामंजस्य और संतुलन होना चाहिए। मध्य रेल के पूरे इलेक्ट्रिफाइड सेक्शन में जब भुसावल मंडल में टीआरडी फेलियर से चौदह घंटे रेल परिचालन बंद हो सकता है, ऐसे में नासिक के सिंहस्थ में विजय कुमार कुछ नहीं कर पाएंगे। धरमवीर मीणा ने टीआरडी मेंटेनेंस पर, रोलिंग स्टॉक रिलायबिलिटी पर बहुत प्रयास किया, जिसे आगे ले जाने की आवश्यकता है। खराब ले-आउट, यार्डों पर बहुत काम बाकी है, जिसे पूरा करने की आवश्यकता है।

यह आवश्यक है कि जो जिसका काम है, वह करे और उसे करने दिया जाए—जीएम की पहली जिम्मेदारी अथवा प्राथमिकता रेल परिचालन को पटरी पर रखना है। इसका कोई अपवाद या विकल्प नहीं हो सकता। चेयरमैन का पॉइंट और क्रासिंग पर ध्यान, #SPAD पर काम, शंटिंग, रिले रूम पर ध्यान की सभी ने प्रशंसा की। कहने-सुनने में बहुत खराब लगता है, लेकिन स्वच्छता अभियान और वंदेभारत, अमृत भारत ट्रेनों और स्टेशनों के उद्घाटनों से ओपन लाइन का ध्यान काफी बँटा है। जैसे सीनियर डीएमई को रोलिंग स्टॉक अनुक्षण में ही लगाया जाए, सीनियर डीईएन को अपना सारा ध्यान ट्रैक को चुस्त-दुरुस्त करने पर ही लगाए रखना है—साफ-सफाई और उद्घाटनों के लिए नहीं। साफ-सफाई के लिए #ENHM की परिकल्पना और स्थापना की गई है, तो उसे ही साफ-सफाई को सुनिश्चित करने पर लगाया जाना चाहिए। ब्रांच अफसरों का फोकस केवल सेफ्टी और सुरक्षित अनुरक्षण पर बढ़ाने की आवश्यकता है। इससे मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग, कमर्शियल और ऑपरेटिंग इत्यादि विभाग लाभान्वित होंगे।

पंद्रह कार और क्लोज-डोर लोकल सहित लोकल ट्रेनों की पंक्चुअलिटी पर विजय कुमार का ध्यान बना रहे, तो यह मुंबई शहर उन्हें धन्यवाद देगा और सदैव उनका आभारी रहेगा। पुणे और मुंबई रेलमंत्री के विशेष रूप से ध्यान में हैं। ये दोनों शहर महाराष्ट्र सरकार के भी फोकस में हैं। यहाँ बहुत काम करने की आवश्यकता है। मुंबई और पुणे में अनेक कंस्ट्रक्शन इकाईयां काम कर रही हैं, जिनको दिशा देना, जिनके बीच सामंजस्य बनाए रखना महाप्रबंधक का ही काम होगा, क्योंकि इन सबके हेड PHOD स्तर के हैं। पुणे के सबसे सिरदर्द वाले निर्णय मंत्री जी के सीधे आदेशों पर और धरमवीर मीणा के अथक प्रयासों से लिए जा चुकें हैं। विजय कुमार यदि इन्हें समय से पूरा करा पाएंगे, तो शायद लेवल-17 में उनके लिए ऐसे अचीवमेंट होंगे, जिनका संज्ञान प्रधानमंत्री जी भी स्वयं लेंगे।

हम उन्हें इस कार्यकाल में सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित करते हैं। 💐