महाप्रबंधक मीणा के नेतृत्व में मध्य रेल द्वारा सोलापुर मंडल पर प्रथम “कवच” का सफल परीक्षण
महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने सोलापुर मंडल में किया रेलवे के पहले “कवच” प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन
मुंबई: मध्य रेल के महाप्रबंधक धरमवीर मीणा के नेतृत्व में रविवार, 14 सितंबर 2025 को सोलापुर मंडल में प्रथम “कवच” प्रणाली का सफल लोको परीक्षण किया गया।
सोलापुर मंडल के ढ़वलस और भालवनी स्टेशनों के बीच 26 किलोमीटर के क्षेत्र में किया गया यह सफल परीक्षण मध्य रेल पर पहला “कवच” परीक्षण है और रेलवे संरक्षा बढ़ाने तथा सुरक्षित रेल संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है।

मध्य रेल के प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर मनिंदर सिंह उप्पल, सोलापुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक डॉ. सुजीत मिश्रा और मुख्यालय एवं सोलापुर मंडल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी परीक्षण के दौरान उपस्थित थे।
लोको परीक्षणों के दौरान, कवच प्रणाली की महत्वपूर्ण संरक्षा विशेषताओं के परीक्षण में शामिल हैं:
- स्टॉप सिग्नल पर #SPAD (सिग्नल पास ऐट डेंजर) परीक्षण
- ब्लॉक सेक्शन SOS (आपातकालीन) जनरेशन
- स्टेशन मास्टर SOS (आपातकालीन) जनरेशन
- टर्नआउट पर ओवरस्पीड रोकथाम।
कुर्दुवाड़ी में मध्य रेल की पहली कवच स्टिमुलेशन लैब और प्रशिक्षण केंद्र को एक नए एफएटी सेटअप के साथ संचालित किया गया, जिससे कवच और भविष्य की तकनीकों का एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर कठोर प्रशिक्षण और उन्नत सुरक्षा प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन के प्रति प्रतिबद्धता को बल मिला।

इस अवसर पर बोलते हुए, महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने इस उपलब्धि के महत्व पर जोर दिया: “सोलापुर मंडल में कवच का सफल परीक्षण इस स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली के क्रियान्वयन का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह यात्री सुरक्षा और परिचालन दक्षता के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करने पर भारतीय रेल की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
मध्य रेल में कवच के कार्यान्वयन हेतु निविदा 30 मार्च 2025 को जारी की गई थी और सोलापुर मंडल में 6 महीने से भी कम समय में लोको परीक्षणों का सफलतापूर्वक संचालन अत्यंत सराहनीय है। सोलापुर मंडल ने इस सफल परीक्षण के लिए समर्पित प्रयास किए हैं, महाप्रबंधक ने इसकी व्यापक रूप से सराहना की।
महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने कुर्दुवाड़ी में उन्नत सुविधाओं से युक्त एक पुनर्निर्मित लोको पायलट एवं गार्ड रनिंग रूम, अल्ट्रा सोनिक फ्लॉलेस डिटेक्शन बिल्डिंग और एक उन्नत गैंग हट का भी निरीक्षण किया।

कवच प्रणाली भारतीय रेल की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य ट्रेन परिचालन सुरक्षा बढ़ाना है। यह स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली है, जिसे सिग्नल पासिंग ऐट डेंजर (स्पैड), ओवरस्पीडिंग और टकराव को रोककर रेल संरक्षा बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह रेडियो लिंक के माध्यम से स्टेशन उपकरणों और ऑन-बोर्ड इकाईयों के बीच सिग्नलिंग सूचना और लोकोमोटिव के लोकेशन के वास्तविक समय के आदान-प्रदान के माध्यम से काम करता है। यह प्रणाली मूवमेंट अथॉरिटी सीमाओं और गति प्रतिबंधों को लागू करने के लिए इस डेटा को संसाधित करती है, जिससे सुरक्षित और अधिक कुशल ट्रेन संचालन सुनिश्चित होता है।
मध्य रेल कवच के कार्यान्वयन पर युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। पूरे क्षेत्रीय नेटवर्क के लिए कवच के कार्यान्वयन हेतु निविदाएं आमंत्रित करने वाली मध्य रेल को पहली जोनल रेलवे होने का गौरव मिला है।
महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने 25 अगस्त 2025 को कल्याण स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड में कवच प्रणाली से सुसज्जित 50वें लोकोमोटिव को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुंबई मंडल ने रेल संरक्षा बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की और सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल रेल परिचालन के लिए अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने के मध्य रेल के निरंतर प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
भारतीय रेल बेहतर संरक्षा और स्वचालन (ऑटोमेशन) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत कवच को मिशन मोड में लागू कर रही है। रेलवे बोर्ड ने पहले चरण में मध्य रेल के 730 लोकोमोटिव में कवच के प्रावधान को मंजूरी दी है और मध्य रेल के लोको शेड में कवच फिटिंग का काम प्रगति पर है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी लोकोमोटिव अंततः इस उन्नत संरक्षा प्रणाली से लैस होंगे।
महाप्रबंधक धरमवीर मीणा ने 4 सितंबर 2025 को भुसावल मंडल में मध्य रेल के पहले अत्याधुनिक एकीकृत कवच नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। यह आधुनिक सुविधा भुसावल मंडल के 134 स्थानों पर कवच प्रणाली की निगरानी और पर्यवेक्षण का केंद्रीय सेंटर है। उन्नत तकनीकों और एक समर्पित नेटवर्क मॉनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) से सुसज्जित, यह सेंटर वास्तविक समय पर्यवेक्षण को सक्षम बनाता है, परिचालन दक्षता में भी वृद्धि करता है और ट्रेन परिचालन के लिए संरक्षा उपायों को मजबूत करता है।
प्रत्येक उपलब्धि के साथ, मध्य रेलवे संरक्षा और परिचालन दक्षता को मजबूत करने की अपनी निरंतर यात्रा में यात्रियों की बढ़ी हुई संरक्षा और आरामदायक यात्रा के लिए अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने और लागू करने में अग्रणी बन गया है।

